उत्तर प्रदेशलखनऊ

शासनादेश चिड़ियाघर प्रशासन के ठेंगे पर, बिना टेण्डर के गुलजार हैं दो कैण्टीन

  • बाजारू रेट से तीन गुना अधिक मूल्यों पर विक्रय किए जा रहे हैं फास्टफूड
  • चिडियाघर के महत्ता व गुणवत्ता पर लगने लगा ग्रहण
  • मनमाने तरीके से चिडियाघर प्रशासन जारी करता है मौखिक गाइडलाइन
  • दो, एक वाटर कूलरों को छोड बाकी सभी वाटर कूलर उगल रहे हैं गर्म पानी, आगन्तुक हलकान

दिनेश मिश्र


लखनऊ। सिविल लाइन लखनऊ स्थित चिडियाघर मे व्याप्त मनमानी अव्यवस्था आगन्तुकों पर भारी पड रहा है। यहां शासनादेशों की धज्जियां उडाते हुए आगन्तुकों के जेब पर डाका डाला जा रहा है। यही कारण है कि आम लोगों का इस चिडिया घर से मोहभंग होता जा रहा है। यहां संचालित कैण्टीनों मे आइसक्रीम व फास्टफूड बाजारू रेट से तीन गुना से अधिक मूल्यों पर चिडियाघर प्रशासन के मिली भगत से बिक्री किए जा रहे है। जिसे झेलना आम लोगों की विवशता बनी हुई है। यहां मनमानी दबंगई चरम पर है। जिससे आगन्तुकों की संख्या मे काफी गिरावट भी देखी जा रही है। जिसपर चिडियाघर प्रशासन का कोई नियंत्रण नही है। वैसे तो यह चिडियाघर ट्रस्ट द्वारा संचालित है मगर राज्य सरकार के द्वारा जारी गाइडलाइन के आधीन है।

जिसका अनुपालन दूर—दूर तक यहां नही हो रहा है।आम जनता के सुविधाओं के लिए स्थापित यह चिडियाघर अपने वास्तिविक उद्वदेश्यों से भटकता नजर आ रहा है। यहां स्वच्छता अभियान तो मुंह चिढा रहा है। अनेकों स्थानों पर झाड झंखाड स्वच्छता मिशन की अलग कहानी बयां कर रही हैं। यहां साफ—सफाई तथा संसाधनों पर कागजों मे खर्च किये जाने वाले लाखों रूपये निजी जेबों मे जा रहे हैं। यहां आगन्तुकों को स्थापित संसाधनों का कोई लाभ नही मिल रहा है। चिडियाघर मे लगे अनेकों वाटर कूलर भीषण गर्मी मे हांफ रहे हैं। अधिकांश वाटर कूलर गर्म पानी उगल रहे हैं जो इस भीषण गर्मी मे आगन्तुकों के लिए कोढ मे खाज का काम कर रहे हैं।

चिडियाघर आने वाले आगन्तुकों का कहना है कि चिडियाघर मे प्रवेश एवं बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए के लिए प्रति व्यक्ति 80 रूपये का शुल्क लिया जाता है। लेकिन कोई सुविधा चिडियाघर प्रशासन द्वारा उपलब्ध नही कराया जाता है। 80 रूपये का टिकट लेकर ठगे महसूस करते हैं। लोग बताते हैं कि आज के पांच वर्षें पूर्व यह चिडियाघर बेहतरीन संसाधनों से परिपूर्ण हुआ करता था लेकिन आज के समय मे कुछ नही रह गया है। अब आम जनता के लिए कोई सुविधा अब मुहैया नही है यही कारण है कि लोगोें का यहां से मोहभंग होता जा रहा है। यह कहना गलत नही होगा कि अब यह चिडियाघर मध्यम वर्गीय तथा छोटे तबके के परिवारों के पहुंच से दूर हो गया है।

कैण्टीनों का टेण्डर मार्च 2022 मे समाप्त फिर भी अनाधिकृत रूप से संचालित हो रहे हैं दो कैण्टीन

यहां चिडियाघर मे दो कैण्टीन संचालित हैं जहां आइसक्रीम के अलावा फास्टफूड विक्रय किया जाता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इन कैण्टीनों की वैधता मार्च 2022 मे ही समाप्त हो चुका है। लेकिन चिडियाघर प्रशासन के मिली भगत से सभी कैण्टीन आज भी गुलजार नजर आ रहे हैं। जबकि कैण्टीनों के टेण्डर की प्रक्रिया अभी प्रारम्भ होने वाली है। फिर भी नाजायज तरीके से कैण्टीन संचालित हैं। आगन्तुकों का कहना है कि इन दोनों कैण्टीनों मे बिकने वाला आइटम बाजारू रेट से तीन गुना अधिक दामों पर बेंचे जाते हैं। जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड रहा है। चिडियाघर प्रशासन द्वारा निर्धारित किया गया खाद्व सामग्रियों की मूल रेट लिस्ट नदारद है और ठेकेदारों की मनमानी लोगों पर हावी है।

चिडियाघर के डायरेक्टर अशोक कुमार ने क्या कहा

इन अव्यवस्थाओं के सम्बन्ध मे चिडियाघर के डायरेक्टर अशोक कुमार से पूछा गया तो बिदक गये वे इस संवाददाता पर सवाल दाग दिए कि यहां कई पत्रकार आते हैं लेकिन ऐसे सवाल किसी ने नही किए आप पहले व्यक्ति हैं जो चिडियाघर व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होने कहा कि आप द्वारा जो सवाल उठाया गया है इसकी कोई शिकायत मेरे संज्ञान मे नही है यदि कोई इस सम्बन्ध मे शिकायत करेगा तो उसकी जांच कराकर उचित कार्यवाही की जायेगी।

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