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बिचौलियों ने किया शोषण… सम्मान समारोह में बोले सीएम योगी- ‘ट्रेड यूनियन वाली सोच’ से दूर रहें शिक्षा मित्र, अपनायें सकारात्मक नजरिया

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रदेश के ‘शिक्षा मित्रों’ से ‘ट्रेड यूनियन वाली सोच’ से दूर रहने और टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने का आह्वान करते हुए उनसे सकारात्मक और रचनात्मक नजरिया अपनाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने ‘शिक्षा मित्र सम्मान समारोह’ को सम्बोधित करते हुए कहा शिक्षा मित्रों की लंबे समय से लंबित मांगों को उजागर करते हुए कहा कि हालांकि उनकी चिंताएं वास्तविक थीं, लेकिन दृष्टिकोण रचनात्मक होना चाहिए था।

उन्होंने कहा, ”सालों से आपकी मांगें थीं लेकिन उन्हें स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने देने के बजाय अक्सर टकराव के माध्यम से उन्हें पूरा कराने की कोशिश की गई। हमें बातचीत के माध्यम से समाधान की ओर बढ़ना चाहिए।” यह समारोह राज्य में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत सभी एक लाख 43 लाख शिक्षा मित्रों के मानदेय को प्रतिमाह 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये किये जाने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

मुख्यमंत्री ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना करते हुए उनके उन प्रयासों को ‘अनियमिततापूर्ण और गैर-कानूनी’ करार दिया जिनके तहत उन्होंने उचित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना शिक्षा मित्रों को सहायक शिक्षक का दर्जा देने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा, ”पिछली सरकारों ने नियमों का उल्लंघन किया और जरूरी नियम बनाए बिना मान्यता देने की कोशिश की। ऐसे मनमाने कार्यों के कारण ही उच्चतम न्यायालय ने उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया था।”

मुख्यमंत्री ने अदालत के इस आदेश के बाद पैदा हुए संकट का जिक्र करते हुए कहा, ”हमें एक गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा। लगभग डेढ़ लाख परिवारों की आजीविका छिनने का खतरा था। उनमें से कई लोगों ने 18-19 साल तक सेवा की थी। जीवन के उस पड़ाव पर वे कहां जाते?” उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने उनकी सेवाएं समाप्त न करने का फैसला किया और इसके बजाय उनके मानदेय में काफी वृद्धि की।

आदित्यनाथ ने कहा, ”साल 2017 में हमने मानदेय साढ़े तीन हजार रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया। हमारा इरादा हमेशा इसे समय-समय पर और बेहतर बनाने का रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में कुछ बिचौलियों ने शिक्षा मित्रों का शोषण किया था। मुख्यमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा, ”एक शिक्षक का नजरिया हमेशा सकारात्मक होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो इससे समाज को इतना ज्यादा नुकसान हो सकता है, जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं है। माता-पिता ने जिन बच्चों को आपके भरोसे सौंपा है, उनका भविष्य आपके रवैये पर ही निर्भर करता है।”

उन्होंने शिक्षा मित्रों को श्रम संगठनों वाली सोच से दूर रहने की भी सलाह देते हुए कहा कि ऐसे तरीकों से समाज को नुकसान पहुंच सकता है। आदित्यनाथ ने कहा, ”हमारा स्वभाव ट्रेड यूनियन जैसा नहीं हो सकता। हमें हमेशा कुछ अच्छा करने की भावना से काम करना चाहिए। बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी आप पर ही है। हमें ट्रेड यूनियन वाली सोच से दूर रहना चाहिए। इससे समाज को नुकसान ही होगा, जैसा कि पहले भी काफी नुकसान हो चुका है। वहां लोग अक्सर यह कहते हैं कि हमारी मांगें पूरी होनी ही चाहिए, चाहे कोई भी मजबूरी क्यों न हो, जिसका मतलब यह है कि हमारी मांगें देश की कीमत पर भी पूरी होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा, ”ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता। सबसे पहले देश आता है, उसके बाद ही हमारा अस्तित्व है। अगर मेरा देश है, तभी हम हैं। जब यह भावना हमारे अंदर होगी, तो देश ही हम सबकी रक्षा करेगा और हमें सुरक्षित रखेगा। अगर हम एक अच्छी पीढ़ी तैयार करेंगे तो हर क्षेत्र में अच्छे लोग ही पैदा होंगे।”

मुख्यमंत्री ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के कल्याण के क्षेत्र में हुए सुधारों का जिक्र करते हुए कहा, कि एक समय ऐसा भी था, जब स्कूलों में पीने के पानी, शौचालय या सुरक्षा की कमी के कारण लड़कियां स्कूल नहीं जा पाती थीं लेकिन आज सभी के लिए ये सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि अब लगभग एक करोड़ 60 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, किताबें, जूते, मोज़े और स्वेटर जैसी चीजें दी जा रही हैं। आदित्यनाथ ने कहा, ”हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार है। यह माता-पिता, शिक्षकों और समाज की ज़िम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि इस अधिकार का पूरी तरह से पालन हो।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल बीच में ही छोड़ देने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा, ”जब कोई बच्चा स्कूल छोड़ देता है तो यह सिर्फ उस बच्चे का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का नुकसान होता है। इससे समाज कमजोर होता है और लंबे समय तक चलने वाली चुनौतियां पैदा होती हैं।” आदित्यनाथ ने ‘स्कूल चलो अभियान’ की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि इसके पहले चरण में ही 20 लाख से ज्यादा बच्चों ने स्कूल में दाखिला लिया है। उन्होंने कहा कि यह एक बहुत बड़ी संख्या है, क्योंकि दुनिया में ऐसे कई देश हैं, जिनकी आबादी भी इससे कम है।

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