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कोई बच्चा नहीं होगा शिक्षा से वंचित, स्कूल पेयरिंग से सुनिश्चित होगा भविष्य

  • राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करेगी योगी सरकार
  • छोटे और संसाधनविहीन स्कूलों की पेयरिंग से बच्चों को मिलेगा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण
  • स्कूलों की पेयरिंग से पढ़ाई, संसाधन और शिक्षक व्यवस्था होगी मजबूत, शिक्षा होगी समावेशी
  • बच्चों को स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, खेल के अवसर और पियर लर्निंग जैसे अनुभव मिलेंगे
  • शिक्षक-छात्र अनुपात बेहतर होगा, आॅपरेशन कायाकल्प से मूलभूत सुविधाओं का होगा विकास

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने यह संकल्प लिया है कि राइट टू एजुकेशन एक्ट के अनुरूप किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। इसी सोच के तहत छोटे और कम संसाधनों वाले स्कूलों की नजदीकी स्कूलों से पेयरिंग की जा रही है ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। इस पेयरिंग से न सिर्फ बच्चों को स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, खेल के अवसर और पियर लर्निंग जैसे अनुभव मिलेंगे, बल्कि शिक्षक-छात्र अनुपात भी बेहतर होगा। पेयरिंग से इन स्कूलों में आॅपरेशन कायाकल्प के सभी 19 पैरामीटर्स जैसे शौचालय, पेयजल, फर्नीचर, डिजिटल शिक्षा, बाल वाटिका आदि में सुधार संभव होगा। सरकार ने ये भी तय किया है कि यदि भविष्य में नामांकन बढ़ता है तो पुराने स्कूलों में फिर से पढ़ाई शुरू की जाएगी। यह पेयरिंग व्यवस्था छात्रों के सर्वांगीण विकास और शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो भविष्य में यूपी के लाखों बच्चों की शिक्षा और भविष्य दोनों को संवारने में मदद करेगा।

शिक्षकों, संसाधनों और भवनों का होगा बेहतर उपयोग
उत्तर प्रदेश में ऐसे कई सरकारी स्कूल हैं जहां एक ही शिक्षक को 5 कक्षाओं को पढ़ाना पड़ता है, जिससे न पढ़ाई ढंग से हो पाती है, न बच्चे कुछ सीख पाते हैं। इसके साथ ही, कई विद्यालयों में निर्धारित सीमा से भी काफी कम संख्या में छात्र हैं। यही कारण है कि सरकार ने स्कूल पेयरिंग का फैसला लिया, ताकि शिक्षकों, संसाधनों और भवनों का बेहतर उपयोग हो सके। पेयरिंग का मतलब है कि कम नामांकन (50 से कम) वाले स्कूलों को नजदीकी (1 किमी. के भीतर प्राथमिक और 3 किमी. के भीतर उच्च प्राथमिक) सुव्यवस्थित स्कूलों से जोड़ा जाए। पेयरिंग तीन प्राथमिक आधारों पर की जा रही है। पहला, जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या नामांकन सीमा से कम है। दूसरा, जो स्कूल बहुत पास-पास (1 किमी. से कम दूरी पर) स्थित हैं। और तीसरा, जहां छात्र तो हैं, पर शिक्षक नहीं हैं या भवन जर्जर हालत में है।

स्कूलों की पहुंच पर भी दिया जा रहा विशेष ध्यान
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी स्कूल बंद नहीं किया जा रहा है। शिक्षकों और रसोइयों की पोस्ट भी नहीं हटाई जाएगी, बल्कि 50 तक नामांकन वाले स्कूलों में कम से कम तीन शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित की जा रही है। भवनों की सुरक्षा के लिए सेफ्टी आॅडिट कराए जा रहे हैं और जर्जर भवनों को हटाया जा रहा है। सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि बच्चों को स्कूल पहुंचने में कोई दिक्कत न हो। रेलवे क्रॉसिंग, हाईवे या नाले जैसी बाधाओं को ध्यान में रखते हुए ही पेयरिंग की जा रही है। सरकार का यह भी संकल्प है कि पेयरिंग वाले स्कूलों में आॅपरेशन कायाकल्प के सभी 19 बिंदुओं पर सुधार सुनिश्चित किया जाएगा। इससे स्मार्ट क्लास, शुद्ध पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, खेल का मैदान जैसी सुविधाएं हर बच्चे को मिल सकेंगी। यदि किसी क्षेत्र में पेयरिंग से संबंधित कोई समस्या आती है तो तत्काल समाधान भी किया जा रहा है।

योगी सरकार के प्रयासों से बदल रहा यूपी का शैक्षिक परिदृश्य
योगी सरकार प्रदेश में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत है। सरकार के इन प्रयासों का असर भी असर की रिपोर्ट में देखने को मिल रहा है। असर की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश शिक्षा की गुणवत्ता के क्षेत्र में तमिलनाडु और गुजरात के साथ सम्मिलित हो गया है। छात्रों की पठन दक्षता और गणितीय दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके अतिरिक्त प्राथमिक विद्यालयों की उपस्थिति 2018 में 57.6 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 71.4 प्रतिशत हो गई है। उच्च प्राथमिक विद्यार्थियों की उपस्थिति में 2018 में 59.5 प्रतिशत से बढ़कर 69.1 प्रतिशत हो गई है। शिक्षकों की उपस्थिति भी 2024 में 85.5 प्रतिशत दर्ज की गई है। स्कूल पेयरिंग के बाद शिक्षा के स्तर में और भी वृद्धि की संभावना है।

इसलिए आवश्यक है स्कूल पेयरिंग
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसार, छोटे और कम संसाधनों वाले विद्यालयों को आसपास के बड़े और बेहतर सुविधाओं वाले विद्यालयों के साथ एकीकृत (समेकित) करने की सिफारिश की गई है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के 5 जून 2024 के पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि 50 से कम नामांकन वाले कई छोटे स्कूलों में बच्चों और संसाधनों को अगर एक जगह जोड़ा जाए, तो बच्चों को बेहतर शिक्षण वातावरण मिलेगा और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार होगा। नीति यह भी कहती है कि छोटे, सीमित उपयोग वाले स्कूलों को बड़े, ज्यादा प्रभावी स्कूलों में मिलाकर शिक्षा को मजबूत बनाया जाए। इसी क्रम में 23 अक्टूबर 2024 को स्कूल शिक्षा महानिदेशक की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी जिलों को निर्देश दिए गए कि कम नामांकन वाले स्कूलों की समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर उन्हें नजदीकी स्कूलों में मिलाया जाए, ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर संसाधनों का लाभ अधिक से अधिक बच्चों को मिल सके।

Khabri Adda

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