उत्तर प्रदेशलखनऊ

अब पढ़ाया जाएगा देश का संशोधित इतिहासः संजय

  • वीर सावरकर के काले पानी मुक्ति के 100 वर्ष पूरे होने पर सावरकर विचार मंच ने की गोष्ठी

लखनऊ। अब समय आ गया है कि देश को संशोधित इतिहास पढ़ाने का। अभी तक मुगलकालीन इतिहास को ज्यादा पढ़ाया गया है। अपने देश के चोल, पल्लव राजवंशों की वीरता भरे इतिहास को पढ़ाने से पहले हमने आक्रमणकारियों को ज्यादा तवज्जो दी। पहले हमारे पाठ्यक्रम में देश के पूर्वजों जैसे गार्गी, शिवाजी, राणा प्रताप के बारे में जानकारियां मिला करती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं दिखता। यह बातें इतिहास पुनर्लेखन योजना के राष्ट्रीय सह संयोजक संजय जी ने सोमवार को सावरकर विचार मंच उ.प्र की ओर से आयोजित सावरकर के काले पानी मुक्ति के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित गोष्ठी में कही। गोष्ठी के मध्य में जानकारी दी गई कि 28 मई को वीर क्रांतिकारी सावरकर जी की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उपस्थित रहने की भी संभावना है। इससे पहले सभी अतिथियों ने सावकर जी के चित्र पर माल्यार्पण कर अपनी श्रद्धा अर्पित की।

लखनऊ के जियामऊ स्थित विश्व संवाद केंद्र में आयोजित गोष्ठी में संजय जी ने वीर अमर क्रांतिकारी सावरकर की जिंदगी के बारे में विस्तृत से चर्चा की। उन्होंने सावरकर जी के बचपन से लेकर उनके पढ़ाई के जीवन और कैसे वह देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराने के संघर्ष करते रहे, काफी विस्तृत रूप से बताया। उन्होंने बताया कि सावरकर को दो बार आजीवन कारावास हुआ। सावरकर भागे नहीं, वह जानते थे कि अब हम गिरफ्तार हो जाएंगे। उनको सेलुलर जेल में घोर शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गई। जिसको सुनकार आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बैरक के सामने रोज एक क्रांतिकारी को फांसी दी जाती थी। अंत में उन्होंने कहा कि आजादी अहिंसा से नहीं मिली है। सुभाष बाबू, चंद्रशेखर जैसे अमर क्रांतिकारियों के ससैन्य ताकत के चलते मिली है। ये एक साजिश के तहत इन क्रांतिकारियों के कार्यो को सामने नहीं आने दिया गया। संजय जी ने सावरकर और आजादी की लड़ाई से जुड़ी बहुत सी बाते साझा की।

लखनऊ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति सुधीर कुमार सक्सेना ने बच्चों के संस्कार पर बहुत जोर दिया। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को संस्कारित करें। उन्हें देश के पूर्वजों के बारे में बताएं। इस अवसर पर मंच पर उपस्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रम सिंह को सम्मानित किया गया। उन्होंने हिन्दुत्व की परिभाषा को अपने तरीके से परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि आज जरूरी है कि बच्चे सावरकर और अपने देश के पूर्वजों के बारे में जानें। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत मेजर जनरल अजय कुमार चतुर्वेदी भी सेलुलर जेल और आजादी के आंदोलन के बारे में बहुत से वो जानकारियां दीं जो अमूमन किताबों में नहीं पढाई जाती है। वह सेलुलर जेल में तैनात भी रह चुके हैं।

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