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संघ और रॉ पर प्रतिबंध की मांग: भारत विरोधी डीप स्टेट की नई साजिश

मृत्युंजय दीक्षित


युद्ध के वैश्विक वातावरण के मध्य अमेरिका में भारत विरोधी डीप स्टेट की गतिविधियां भी चल रही हैं। विभिन्न अवरोधों व वैश्विक उथल- पुथल के बाद भी भारत तीव्रता के आगे बढ़ रहा है। विश्व भर के निवेशकों की दृष्टि भारत पर है और यह बात भारत विरोधी शक्तियों को पसंद नहीं आ रही है। अमेरिका के अंतररष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में अमेरिकी प्रशासन से, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारत की खुफिया एजेंसी रॉ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। अमेरिकी आयोग की यह रिपोर्ट भारत के खिलाफ गहरी सुनियोजित साजिश के अंतर्गत तैयार की गई रिपोर्ट है जो भारत की सम्प्रुभता पर तीखा परोक्ष हमला है । भारत के मुख्य विरोधी दल कांग्रेस ने अपनी परंपरा के अनुरूप विदेशी आयोग की इस भारत विरोधी मांग का समर्थन किया है।

अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में संघ और रॉ के कामकाज पर सवाल खड़े करते हुए ट्रम्प प्रशासन से इन दोनों पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। आयोग का कहना है कि संघ लोगों की धार्मिक आजादी के लिए खतरनाक है। ये धर्म के आधर पर भेदभाव बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि आयोग की रिपोर्ट में संघ पर तुरंत प्रतिबंध लगाने, संपत्ति को जब्त करने और संघ के लोगों के अमेरिका मे प्रवेश को प्रतिबंधित करने की मांग की गई है। कांग्रेस ने अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट से आगे जाकर कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद सरदार पटेल ने संघ को भारत में प्रतिबंधित किया। संघ मनुस्मृति से देश को चलाने की वकालत करता है, संघ संविधान विरोधी है, देश की एकता और भाईचारे के लिए जहर है।

अमेरिका का धार्मिक स्वतंत्रता आयोग वर्ष 1998 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा बनाया गया एक स्वतंत्र आयोग है। यह विश्व भर में धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करता है और अमेरिकी सरकार को केवल सुझाव देता है। अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट और कांग्रेस द्वारा उसका समर्थन करने पर किसी भी राष्ट्रभक्त नागरिक को हैरानी नहीं हुई है क्योकि कांग्रेस पार्टी लम्बे समय से भारत विरोधी टूलकिट क्रियान्वित कर रही है। कांग्रेस का वर्तमान नेतृत्व गुलामी की मानसिकता से ग्रस्त है। कांग्रेस का दिल पाकिस्तान के लिए ही धड़कता है। कांग्रेस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे कुख्यात आतंकी संगठन से कर चुकी है। कांग्रेस को पता होना चाहिए कि जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हर विपरीत परिस्थिति में राष्ट्र व समाज की सेवा करता है वैसे ही भारत की खुफिया एजेंसी रॉ भारत की सेवा करते हुए भारत को अनेकानेक आंतरिक और वाह्य खतरों से बचाती है।

आश्चर्य की बात है कि जब बांग्लादेश में हिंदुओं का निर्मम नरसंहार हो रहा था, हिंदू महिलाओं पर बर्बर अत्याचार, बलात्कार व हत्याएं हो रही थीं, 700 से अधिक मंदिरों का विध्वंस कर दिया गया तब इस तथाकथित धार्मिक आयोग की घिग्घी बंध गई थी । तब भारत व संपूर्ण विश्व में हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए किसी ने आवाज उठाई थी तो वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या उससे जुड़े समवैचारिक संगठन ही थे। आज पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान के हिंदू “गायब“ हो चुके है अर्थात अल्पसंख्यक से भी बहुत कम हो गए हैं, यह आयोग इन देशों में हिन्दुओं के धार्मिक अधिकारों के लिए क्यों नहीं बोलता?

भारत ने अमेरिकी धार्मिक अयोग की रिपोर्ट सिरे से खारिज करते हुए कहा कि, अमेरिकी आयोग के लिए यह बेहतर होगा कि वह अमेरिका में हिंदू मंदिरो पर तोड़फोड़ और हमलों की परेशान करने वाली घटनाओं, भारत को निशाना बनाने, वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के प्रति बढ़ती असिहष्णुता और उन्हें डराने- धमकाने के मामलो पर विचार करें। अमेरिकी आयोग पूर्वाग्रह से ग्रसित है और यह उसका एक सुनियोजित एजेंडा है। अमेरिका तथा वहां के तथाकथित आयोग को यह बात अच्छी तरह से पता होनी चाहिए कि भारत की 140 करोड़ से अधिक की आबादी में हर धर्म के अनुयायी रहते हैं। भारत सह अस्तित्व मे भरोसा करता है।

भारत के कांग्रेस व वामपंथी दलों की राजनीतिक दुकान विदेशी आयोगों की झूठ पर आधारित रिपोर्टों के सहारे ही चलती है। राहुल गांधी ऐसे नेता प्रतिपक्ष हैं जो विदेशों में जाकर भारत के संविधान, संसद व न्यायपालिका तक की आलोचना करते हैं । भारत जब पाकिस्तान पर स्ट्राइक करता है तो वे सेना व सरकार से सबूत मांगने निकल पड़ते हैं। आज वो एक विदेशी आयोग की झूठी रिपोर्ट के समर्थन में खड़े हैं। ऑपरेशन सिंदूर के समय भी कांग्रेस ने संसद में सरकार का साथ नहीं दिया। राहुल कांग्रेस ने अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट का समर्थन करके अपनी मंशा को स्पष्ट कर दिया है कि वह भारत को कमजोर करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एकमात्र संगठन है जो विश्व भर में हिन्दुओं के साथ होने वाली अप्रिय घटनाओं पर आवाज उठाता है। संघ ही है जो हिंदू समाज की सेवा कर रहा है। आज मजहबी ताकतें धन -बल और पशु -बल द्वारा भारी संख्या में हिन्दुओं का मतांतरण करा रही हैं अगर उसकी कोई रोकथाम कर रहा है तो वह संघ ही है। यही कारण है कि संघ पर प्रतिबंध की मांग फिर से उठाई गई है। संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ ने करोड़ों घरों में संपर्क किया और एक नई हिन्दू चेतना का संचार हुआ। भारी संख्या में जेन -जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व समवैचारिक संगठनों के साथ जुड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के साथ लोग जुड़ नहीं रहे अपितु दूर भाग रहे हैं। संभवतः संघ से ईर्ष्या के वशीभूत होकर भी कांग्रेस ने अमेरिकी आयोग की भारत विरोधी रिपोर्ट का समर्थन किया हो।

अमेरिकी आयोग को संघ व भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के विषय में अनर्गल टिप्पणियां करने से पूर्व अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग में भारत विरोधी व पाक परस्त लोगों का प्रभुत्व है राहुल गांधी इनकी प्रोपेगंडा मशीनरी का हिस्सा बन गए हैं। भारत के विपक्षी दलों को समझना चाहिए कि वे सरकार के प्रतिपक्षी हैं न कि भारत देश के।

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