‘स्थानांतरण न सही, अटैचमेंट ही सही’: उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा विभाग में मुख्यमंत्री की रोक के बाद भी बैक-डोर से जारी हो रहे आदेश, छात्रों का भविष्य अंधकार में

- ईमानदार छवि के प्रमुख सचिव को गुमराह करते विभागीय अधिकारी
अनिल तिवारी, बेबाक पत्रकार
उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा विभाग में अटैचमेंट सिंडिकेट और भ्रष्टाचार का खेल इस कदर बेकाबू हो चुका है कि अब विभागीय अधिकारी मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों और शासनादेशों को ठेंगा दिखाने से भी नहीं चूक रहे हैं। प्राविधिक शिक्षा में ग्रेजुएट मंत्री का यह कमाल का प्राविधिक विभाग है, जहाँ स्थानांतरण के बाद भी सम्बद्धीकरण जारी रहता है और स्थानांतरण न होने पर भी सम्बद्धीकरण का खेल निर्बाध चलता रहता है।
ताजा और बेहद गंभीर मामला बीते 11 सितंबर 2026 को सामने आया, जब निदेशक प्राविधिक शिक्षा ने एक ऐसा आदेश जारी किया जो सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के प्राथमिक आदेशों की खुली अवहेलना है।
मुख्यमंत्री द्वारा निरस्त फाइल के बाद अच्छी बोली लगते ही बैक-डोर से जारी हुआ आदेश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विजय कुमार गुप्ता (व्याख्याता आईटी, बाबू पारस मौर्य राजकीय पॉलीटेक्निक, औराई) को सहायक प्राचार्य, बीटीईयूपी कार्यालय के पद में सम्बद्ध करने का यह विवादित आदेश 11 सितंबर को जारी किया गया। जबकि उत्तर प्रदेश सरकार का यह कड़ा और स्पष्ट शासनादेश है कि किसी भी स्थिति में राजपत्रित अधिकारियों का सम्बद्धीकरण न किया जाए।
मामले से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने खुलासा किया है कि इस पद पर स्थानांतरण हेतु पहले किसी अन्य अधिकारी का नाम मंत्री द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा गया था। परंतु, प्रकरण में भारी भ्रष्टाचार और अनियमितता की बू मिलने पर मुख्यमंत्री ने इस स्थानांतरण को पूर्णतः औचित्यहीन करार देते हुए फाइल पर तत्काल रोक लगा दी थी।
परंतु, सिंडिकेट की हठधर्मिता के आगे मुख्यमंत्री के आदेश भी बौने साबित हो रहे हैं। जैसे ही इस पद के लिए पुनः अच्छी बोली लगी, सिंडिकेट सक्रिय हुआ और बैक-डोर से ट्रांसफर-अटैचमेंट का खेल करते हुए निदेशक के माध्यम से 11 सितंबर का यह अवैध आदेश जारी करा लिया गया। अब पूरे विभाग में यह चर्चा का विषय है कि क्या निदेशक प्राविधिक शिक्षा या मंत्री उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी ऊपर हो गए हैं जो उनके मना करने के बावजूद ऐसा आदेश जारी कर दिया गया?
स्थानांतरण के बाद भी बीटीईयूपी में ही डटे हैं मनेन्द्र कन्नौजिया
विभाग में नियमों की धज्जियाँ उड़ने का एक और बड़ा उदाहरण बीटीईयूपी (BTEUP) बोर्ड में देखने को मिल रहा है। बीटीईयूपी में उप सचिव पद पर नियमित अधिकारी की तैनाती होने के बावजूद, पूर्व उप सचिव मनेन्द्र कन्नौजिया आज भी बीटीईयूपी कार्यालय में ही बैठते हैं। गौरतलब है कि इनका स्थानांतरण भारी अनियमितताओं और शिकायतों के कारण राजकीय पॉलिटेक्निक लखनऊ किया गया था। लेकिन सिंडिकेट की मेहरबानी से वे अपनी मूल संस्था में जाकर पठन-पाठन जैसे कार्यों में समय देने के बजाय बोर्ड कार्यालय में ही जमकर अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं।
प्रमुख सचिव को भी अंधेरे में रखा, सिंडिकेट के मुख्य सूत्रधार हावी
नाम न छापने की शर्त पर विभाग के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि यह पूरा खेल बेहद गुपचुप तरीके से रचा गया और शासन के प्रमुख सचिव को भी इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई। उन्होंने बताया कि विभागीय मंत्री के आने के बाद से विभाग में यह खेल वर्षों से निर्बाध रूप से चल रहा है।
हमारे समाचार पत्र ने इस अटैचमेंट सिंडिकेट का खुलासा पहले ही कर रखा है, जिसके मुख्य सूत्रधार निम्नलिखित हैं:
आत्म प्रकाश सिंह: उपनिदेशक (निदेशालय कानपुर), जो सदैव लखनऊ और कानपुर के बीच बने रहते हैं और जिनके लिए नियमों को तोड़ना-मरोड़ना बेहद आसान काम है।
अवधेश पटेल: विभागाध्यक्ष एवं दिखावे के लिए मंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी)।
विकल्प कुमार सिंह: विभागाध्यक्ष कंप्यूटर (राजकीय महिला पॉलीटेक्निक प्रयागराज जहाँ यह ब्रांच चलती ही नहीं है), जो गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के बावजूद बीटीईयूपी बोर्ड में जमे हुए हैं।
कमल कुमार: पूर्व में यूराइज पोर्टल के नाम पर सम्बद्ध।
औराई पॉलिटेक्निक: सिंडिकेट के लिए अटैचमेंट का स्वर्ग
राजकीय पॉलिटेक्निक औराई हमेशा से अटैचमेंट के लिए अनुकूल रही है, क्योंकि वहां के प्रधानाचार्य कभी इसका विरोध नहीं करते:
रोहित कटियार (व्याख्याता आईटी): वर्ष 2015 में सेवा में आने के बाद 11 वर्षों तक कागजों पर तो औराई में रहे, लेकिन वास्तव में संयुक्त निदेशक कार्यालय (मध्य क्षेत्र) में सम्बद्ध रहे। इस वर्ष कानपुर स्थानांतरण होने पर ही उन्होंने अटैचमेंट छोड़ा। अब बड़ा प्रश्न यह है कि उनके पिछले 11 वर्षों का सेवा रिकॉर्ड औराई गिना जाएगा या लखनऊ?
जितेन्द्र यादव (व्याख्याता ईई): ये भी वर्ष 2015 से मूल संस्था औराई छोड़कर संयुक्त निदेशक कार्यालय में ही डटे रहे।
यूराइज के नाम पर फर्जी अटैचमेंट और प्रतिमाह करोड़ों की बर्बादी
वर्ष 2021 में यूराइज पोर्टल के नाम पर सम्बद्ध किए गए व्याख्याता—पूजा सक्सेना, विजय यादव और राजेश राही—प्रतिमाह लगभग 1.5 लाख रुपये का भारी-भरकम वेतन तो उठा रहे हैं, लेकिन पढ़ाना छोड़कर केवल लिपिकीय काम देख रहे हैं।
यदि हिसाब लगाया जाए तो अकेले बीटीईयूपी और संयुक्त प्रवेश परीक्षा कार्यालय में 20 से भी अधिक राजपत्रित अधिकारी और कर्मचारी अवैध रूप से सम्बद्ध हैं। इसका सीधा मतलब है कि हर महीने सरकार और जनता के करोड़ों रुपयों की खुलेआम बर्बादी की जा रही है।
इसके अतिरिक्त बोर्ड व निदेशालय में संजीव सिंह, प्रवीन कुमार, मुरलीधर पांडे, आलोक कुमार, कुलदीप श्रीवास्तव, अतुल राज, सुजीत कुमार, राहुल सिंह, विवेकानंद, अमित कुमार और हरि नाम जैसे दर्जनों अधिकारी वर्षों से सम्बद्ध होकर अनुचित लाभ उठा रहे हैं।
पठन-पाठन ठप, छात्रों का भविष्य अंधकार में
एक तरफ जहां प्रदेश के राजकीय व महिला पॉलिटेक्निक संस्थानों (बदायूं, गौतम बुद्ध नगर, शामली, बलिया, अमेठी आदि) में शिक्षकों की भारी कमी के कारण शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह चौपट है और छात्र-छात्राएं पढ़ाई से वंचित होकर अंधकारमय भविष्य की ओर ढकेले जा रहे हैं; वहीं दूसरी तरफ सिंडिकेट अपनी जेबें भरने और सम्बद्धीकरण के इस फलते-फूलते कारोबार में व्यस्त है।
अब निर्णय मुख्यमंत्री के पाले में है कि वे प्रदेश के युवाओं, बेटियों और शिक्षा व्यवस्था का विकास चाहते हैं या फिर मंत्री और उनके इस बेलगाम सिंडिकेट की मनमानी जारी रहने देंगे।
एआईसीटीई (AICTE) के नियम स्पष्ट करते हैं कि अवसंरचनात्मक सुविधाओं जैसे कि लैब्स, लाइब्रेरी, कंप्यूटर सेंटर और खेल के मैदानों का साझाकरण संस्थागत संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग (Optimal Utilization) के लिए पूरी तरह स्वीकृत है, बशर्ते वे संस्थान एक ही ट्रस्ट/सोसाइटी या नजदीकी परिसर के अंतर्गत संचालित हों।
हालाँकि, संकाय (Faculty) साझाकरण के संबंध में नियम काफी सख्त हैं:
पृथक कोर संकाय (Core Faculty): संसाधनों के साझाकरण के बावजूद, प्रत्येक संस्थान या पाठ्यक्रम को अपने लिए निर्धारित एआईसीटीई मानदंडों के अनुसार न्यूनतम आवश्यक स्थायी और मुख्य शिक्षकों (Core Faculty) की अलग से तैनाती करनी होगी।
संकाय की दोहरी गणना नहीं: किसी एक संस्थान में पूर्णकालिक/मुख्य शिक्षक के रूप में नामांकित संकाय सदस्य को दूसरे संस्थान में मुख्य संकाय के रूप में नहीं गिना जा सकता।
विस्तृत और अद्यतन विवरण के लिए एआईसीटीई के Approval Process Handbook (APH) या उनके आधिकारिक पोर्टल पर जारी सर्कुलर्स का अवलोकन किया जा सकता है।





