
मृत्युंजय दीक्षित
कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में इंडी गठबंधन चुनाव आयोग पर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर आक्रामक है। एसआईआर को वोट चोरी का माध्यम बताकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। धरना प्रदर्शन चल रहा है। एक दिन तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी व प्रियंका गांधी जबरन आकाशवाणी भवन में घुसने का प्रयास करने लगे, अब तो ये लोग हर दिन संविधान की किताब हाथ लेकर कही न कहीं जबरन धरना देने का प्रयास कर रहे हैं। इन धरना प्रदर्शनों की तस्वीरें अत्यंत दुर्भाग्यूपर्ण हैं जिनमें राहुल गाँधी महिला पुलिस अधिकारी को आपत्तिजनक तरीके से पकड़ रहे हैं और प्रियंका गाँधी दूसरी महिला पुलिस अधिकारी को कोहनी मार रही हैं। स्थान स्थान पर महिला पुलिस के साथ अभद्र व आपत्तिजनक व्यवहार किया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस में दस हजार से अधिक महिलाएं हैं। अधिकतर महिलाएं ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं। यूपी, बिहार, उत्तराखंड व झारखंड जैसे राज्यों से यह महिलाएं आती हैं। यह महिलाएं अपना कर्तव्य निभा रही हैं और संविधान के दायरे में काम कर रही हैं। इन महिला पुलिसकर्मियों के साथ कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता अभद्र हरकतें कर रहे हैं। ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस पर 25 आपत्तिजनक प्रहार किये गये हैं। यही नहीं ईवीएम की प्रशंसा करने पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जम्मू कश्मीर के युवक की पिटाई कर दी। यही कांग्रेस का असली चरित्र है- अराजकता। कांग्रेस अपने इंडी गठबंधन के साथ मिलकर देश में अराजकता का वातावरण बनाकर चुनाव जीतना चाहती है। चुनाव आयुक्त व एसआईआर के विरुद्ध कांग्रेस के पास कोई तथ्य अथवा प्रमाण नहीं है।
राहुल गांधी तथा इंडी गठबंधन बिहार विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक तीन बार मतदाता गहन परीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ आंदोलन कर चुका है और हर बार उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा है। बिहार की जनता ने इस मुद्दे को पूरी तरह से नकार दिया था। देश के कई राज्यों में एसआईआर का काम पूर्ण हो चुका है। एसआईआर प्रक्रिया में चुनाव आयोग के द्वारा नियुक्त अधिकारियों सहित सभी राजनैतिक दलों के बूथ एजेंट आदि ने अत्यंत सक्रियता के साथ इस कार्य में भागीदारी की। आश्चर्यजनक रूप से अभी तक राहुल गांधी के बूथ अध्यक्ष व बीएलए आदि को यह नहीं पता चला था कि चुनाव आयुक्त ने फार्म -6 में कोई बदलाव कर दिया है।
कांग्रेस व उसके सहयोगी दलों का वर्तमान आंदोलन दोहरे मापदंडों पर आधारित है क्योंकि एसआईआर के काम में सभी दलों ने चुनाव आयेाग का सहयेाग किया है और बढ़-चढ़ कर भागीदारी की है। चुनाव आयोग ने अब सभी बीएलओ को घर -घर जाकर फिर से नये मतदाताओं का फार्म भरवाने का अभियान प्रारंभ किया है और उसमें भी सभी राजनैतिक दल सहयेाग कर रहे हैं। चुनाव आयेग ने उन सभी पात्र मतदाताओं को अपना नाम फिर से जुड़वाने का अवसर दिया है जिनका नाम एसआईआर प्रक्रिया में किसी कारणवश छूट गया है । इन सभी सुधारों के बाद भी राहुल गांधी सड़क पर अराजकता मचाने पर उतारू हैं, यह दोहरा मापदंड नहीं तो और क्या है?
वास्तविकता यह है कि राहुल गाँधी की भारत की संवैधानिक संस्थाओं कोई आस्था ही नहीं है। यही कारण है कि भारतीय लोकतंत्र को वैश्विक स्तर पर बदनाम करने के लिए लोकतंत्र की प्रहरी संस्था चुनाव आयोग पर ही हमला कर रहे हैं। राहुल गांधी, अपने आंदोलन के माध्यम से अराजकता फैलाकर भारत को बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसी स्थितियों में पहुंचकर सत्ता प्राप्त करना चाहते हैं।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण का विरोध एक षड्यंत्र के अंतर्गत किया जा रहा है। कई राज्यों में मतदाता सूची में फर्जी नामों के सहारे फर्जी मतदान करवाने की घटनाएं सामने आती रहती थीं। विपक्षी दल केवल बांग्लादेशी घुसपैठियों व रोहिंग्या के के नाम मतदाता सूचियों में रखवाने के लिए लड़ रहे है। यह दल अच्छी तरह से समझते हैं कि मतदाता सूची में उन लोगों का नाम तो हटता ही है जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है और उन मतदाताओं का भी हटता है जो अपने मूल निवास स्थान से अन्यत्र स्थानांतरित हो जाते हैं। नए मतदाता जोड़ने का अभियान चलता ही रहता है फिर इसमें आखिर समस्या कहाँ है? क्या जो लोग विरोध कर रहे हैं वह यह चाहते हैं कि उनके स्वर्गीय माता -पिता व बंधु ऊपर से धरती पर आकर वोट डालें और उन्हें चुनाव जिताकर वापस चले जाएं?
कांग्रेस व विरोधी दलों का यह आंदोलन इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुआ है जिसका न कोई आधार है और न ही तथ्य। अब तो चुनाव आयोग ने भी स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव आयोग में सभी फैसले सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं और यही बात वह सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहने जा रहा है।
कांग्रेस वोट चोरी का अभियान का एक उद्देश्य अपने ध्वस्त हो चुके संगठन को खड़ा करना भी है। यह पार्टी अब अपने बलबूते त्रिपुरा में मतपत्रों के माध्यम से हुए ग्राम सभाओं के चुनाव व असम में नगर नकाय चुनाव जीतने तक की हैसियत खो चुकी है। आन्दोलन के दौरान आए 5 विधानसभा व असम की एक लोकसभा का उपचुनाव भी कांग्रेस बुरी तरह से हार गई है। वर्ष 2027 में यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा सहित बाद में गुजरात आदि राज्यों में विधानसभा चुनाव संभावित हैं इन सभी राज्यों में कांग्रेस का बुरा हाल होने जा रहा है।
कांग्रेस चुनाव आयुक्त के इस्तीफे सहित पुरानी वोटर लिस्ट से चुनाव कराने की मांग कर रही है जो पूरी तरह से तर्कहीन है। अगर पुरानी मतदाता सूची से चुनाव करा भी दिये जाएं तो क्या मरे हुए लोग वोट डालने आ जायेंगे ? सच तो यह है कि कांग्रेस पार्टी उससे भी चुनाव नहीं जीतेगी क्योंकि 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव पुरानी मतदाता सूची से ही कराए गए थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में वोट चोरी का आरोप तो पूरी तरह से गलत है क्योंकि तब ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त थे ही नहीं।
इंडी दलों विरोध प्रदर्शन के बीच एक सकारात्मक बात यह हुई कि चुनाव आयोग को 42 पूर्व न्यायाधीशों और सेवानिवृत्त अधिकारियों का समर्थन प्राप्त हो गया है। सभी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की वैधानिकता को अपने तर्कों से पुष्ट करते हुए संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार हमलों पर चिंता जताई है। इन महानुभावों द्वारा देशवासियों के नाम खुले पत्र के माध्यम से हर भारतीय से इन संस्थानों के समर्थन व बचाव में आगे आने का आह्वान किया गया है। वैसे भी जब चुनाव आयुक्त की नियुक्ति सहित सभी मामले सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है तब गांधी परिवार व कॉकरोच जनता पार्टी का यह आंदोलन पूरी तरह से असंवैधानिक और दुर्भाग्यपूर्ण है।





