शासन से निदेशालय तक संघ प्रमुख विवेक कुमार श्रीवास्तव का प्रभाव आर.बी. सिंह ने लगाया नियमों को दरकिनार कर अयोग्य शिक्षकों की पदोन्नतियां कराने का आरोप

अनिल तिवारी, बेबाक लेखक
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा विभाग (डिप्लोमा सेक्टर) में इन दिनों प्राविधिक शिक्षा सेवा संघ के अध्यक्ष श्री विवेक कुमार श्रीवास्तव के प्रशासनिक प्रभाव और विभागीय निर्णयों में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा बनी हुई है।
इसी क्रम में संघ के पूर्व महामंत्री डॉ. आर.बी. सिंह ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) में एक याचिका व शिकायत दर्ज कराई है। डॉ. सिंह का आरोप है कि नियमों और शासनादेशों को दरकिनार करते हुए विभाग में विभागाध्यक्ष (Head of Department) के पदों पर अयोग्य लोगो की पदोन्नतियां कराई गई हैं।
मंत्री जी की अनदेखी और सजातीय अधिकारियों का प्रभाव
सूत्रों एवं प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में माननीय मंत्री जी ने भी डॉ. आर.बी. सिंह की न्यायसंगत बातों और चेतावनियों को अनसुना कर दिया। बताया जाता है कि इसका मुख्य कारण मंत्री जी के इर्द-गिर्द मौजूद कुछ सजातीय अधिकारी हैं, जिन पर पूर्व में भी अनैतिक गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप लगते रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से अवधेश पटेल और कमल कुमार का नाम सामने आता है, जबकि पर्दे के पीछे से विकल्प कुमार सिंह और आत्म प्रकाश सिंह की मुख्य भूमिका बताई जा रही है।
इन आरोपों और दावों की पुष्टि स्वयं डॉ. आर.बी. सिंह के बयानों तथा उपरोक्त सभी अधिकारियों की वर्तमान तैनाती (पोस्टिंग) के विश्लेषण से की जा सकती है। जहाँ एक तरफ डॉ. सिंह ग्रामीण अंचल की सुविधाविहीन संस्था में रहकर शिक्षण कार्य कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ये अन्य अधिकारी महानगरों में बिना किसी शैक्षणिक या विभागीय कार्यभार के आराम फरमा रहे हैं।
आरोपों के मुताबिक, अवधेश पटेल वर्षों से केवल मंत्री जी के साथ घूमते रहे हैं और उनका संस्थाओं या छात्रों की पढ़ाई-लिखाई से कोई लेना-देना नहीं रहा है। यही स्थिति कमल कुमार और विकल्प कुमार की भी बताई जाती है। वहीं आत्म प्रकाश सिंह, माननीय के बेहद चहेते अधिकारी माने जाते हैं, जिनके लिए विभागीय नियमों को मरोड़ने का काम जोर-शोर से चलने की चर्चाएँ पूर्व में भी मीडिया में उजागर होती रही हैं।
सिद्धांतों के लिए विशेष कार्य अधिकारी (OSD) का पद त्यागा
माननीय मंत्री जी के इस अनुचित व्यवहार और विभागीय अनियमितताओं के विरोध स्वरूप ही डॉ. आर.बी. सिंह ने विशेष कार्य अधिकारी (OSD) जैसे प्रभावशाली पद को त्याग दिया था। वे चाहते तो उच्च स्तर पर बने रहकर मंत्री जी के सानिध्य में सुविधाओं का लाभ उठा सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया और अन्याय के आगे झुकने के बजाय दूर-दराज के ग्रामीण अंचल की संस्था में जाकर गरीब छात्राओं की सेवा करना स्वीकार किया।
डॉ. सिंह आज भी अपने सिद्धांतों की रक्षा के लिए अकेले ही संघर्ष की राह पर डटे हुए हैं। यद्यपि समय के साथ उनके कुछ सहयोगी, संघों के पदाधिकारी, प्रधानाचार्य, विभागाध्यक्ष और व्याख्याता अपने छोटे-मोटे व्यक्तिगत लाभों के चक्कर में उनसे अलग होते गए, फिर भी डॉ. सिंह अपने पथ से विमुख नहीं हुए हैं। वे लगातार मीडिया से लेकर उच्च न्यायालय तक न्याय की गुहार लगा रहे हैं और अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं।
AICTE और शासन में पत्राचार
डॉ. आर.बी. सिंह द्वारा AICTE को भेजे गए पत्रों में उल्लेख किया गया है कि राजकीय पॉलीटेक्निकों में AICTE विनियम-2019 के नियमानुसार विभागाध्यक्ष के पदों को लोक सेवा आयोग (UPPSC) की सीधी भर्ती से भरा जाना चाहिए था। उनका कहना है कि इस प्रकार पुरानी नियमावली से की गई पदोन्नतियों (DPC) से राज्य सरकार के राजकोष पर भारी वित्तीय भार पड़ रहा है।
फिलहाल, जहाँ एक ओर विभागीय पदोन्नतियों व चहेते अधिकारियों की तैनाती को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और मामला उच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है, वहीं दूसरी ओर डॉ. आर.बी. सिंह का यह एकाकी संघर्ष प्राविधिक शिक्षा विभाग में गूँज रहा है।





