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शिक्षक दिवस विशेष।

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शिक्षक दिवस के अवसर पर पर्यावरणविद एवं शिक्षक डॉ अर्जुन प्रसाद पांडेय बताते हैं कि शिक्षकों के प्रतिमान रहे भारत रत्न महान शिक्षाविद्, दार्शनिक डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के आदर्श व्यक्तित्व, सादगी, उत्तम विचार, अटूट देश प्रेम के साथ नैतिकता की याद दिलाता है। आज शिक्षकों को उनके दिखाये हुये रास्ते पर चलने की आवश्यककता है। वर्तमान में शिक्षा के व्यवसायीकरण द्वारा गुरू एवं शिष्य की अवधारण में गिरावट आयी है। शिक्षा के निजीकरण द्वारा शिक्षकों का अवमूल्यन हो चुका है। नयी शिक्षा नीति देश एवं समाज को किस दिशा की ओर ले जायेगी यह कहना मुश्किल है। शिक्षक सुन्दर समाज के निर्माण के लिये जिम्मेदार है। शिक्षकों की उपेक्षा तेजी के साथ बढी है। गुरू की परम्पंरा लगभग समाप्त हो चकी है। आज हमें रामायण काल के गुरू वशिष्ठ एंव महाभारत काल के गुरू द्रोण की भूमिका को समझने की जरूरत है। शिक्षक वह दर्पण है जो अपने शिष्यों के साथ समाज का यथार्थ स्वरूप के माध्यम से राष्ट्र के उन्नयन का मार्ग प्रसस्त करता है। उद्यमं भोगवाद का सीधा प्रभाव शिक्षा पर परिलक्षित है। इससे बचने के लिये भारतीय दर्शन को अपनाने की जरूरत है। शिक्षक दिवस की प्रासंगिकता शिक्षा, शिक्षक, छात्र एवं अभिभावकों को एक कड़ी में समाहित है। अतएव इन सबकी भूमिका को समझना आवश्यक है।

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