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जन. रावत व कल्याण, खेमका व अत्रे को पद्मविभूषण, गुलाम नबी आजाद समेत 17 को पद्मभूषण

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुत्व के ‘पोस्टर बॉय’ दिवंगत कल्याण सिंह और हाल ही में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हुए भारत के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत व गीता प्रेस गोरखपुर के अध्यक्ष दिवंगत राधेश्याम खेमका को मरणोपरांत पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। महाराष्ट्र से शास्त्रीय गायिका प्रभा अत्रे को भी पद्म विभूषण से नवाजा गया है। जबकि कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

कोविड-19 रोधी टीका ‘कोविशील्ड’ विकसित करने वाले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साइरस पूनावाला और स्वदेशी कोरोना वायरस टीके ‘कोवैक्सिन’ का उत्पादन करने वाली कंपनी भारत बायोटेक के कृष्णा इल्ला और सुचित्रा इल्ला को भी पद्म भूषण पुरस्कार दिया गया। माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। दिवंगत पंजाबी लोक गायक गुरमीत बावा, अभिनेता विक्टर बनर्जी और पूर्व केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है।

ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा और गायक सोनू निगम को पद्म श्री से सम्मानित किया गया। गृह मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति ने इस वर्ष दो दोहरे मामलों सहित 128 पद्म पुरस्कारों को प्रदान करने की मंजूरी दी। दोहरे मामले में, पुरस्कार की गणना एक के रूप में की जाती है। इस सूची में चार पद्म विभूषण, 17 पद्म भूषण और 107 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। पुरस्कार पाने वालों में 34 महिलाएं हैं।

पद्म भूषण से अलंकृत हुई अन्य हस्तियों में नटराजन चंद्रशेखरन (उद्योग), मधुर जाफरी (पाककला, अमेरिका), देवेन्द्र झांझरिया (खेल), राशिद खान (कला), संजय राजाराम (मरणोपरांत, विज्ञान, इंजीनियरिंग, मैक्सिको), प्रतिभा रे (साहित्य), स्वामी सच्चिदानंद (शिक्षा एवं साहित्य) और वशिष्ठ त्रिपाठी (शिक्षा एवं साहित्य) शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह को मरणोपरांत पद्म विभूषण पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। उत्तर प्रदेश के 2 बार मुख्यमंत्री एवं राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे कल्याण सिंह का निधन खराब स्वास्थ्य की वजह से 21 अगस्त 2021 को हुआ था। उत्तर प्रदेश में ‘बाबूजी’ के नाम से प्रसिद्ध कल्याण सिंह राम मंदिर आंदोलन के बड़े चेहरे और भाजपा में सोशल इंजीनियरिंग की नींव रखने वाले बड़े नेता माने जाते थे। ब्राह्मण,ठाकुर और बनियों की पार्टी कही जाने वाली भाजपा के साथ पिछड़ी जातियों को जोड़ कर कल्याण सिंह ने राज्य में भाजपा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी।

जनसंघ से अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत करने वाले कल्याण सिंह के करिश्मे और पिछड़ी जातियों में उनकी लोकप्रियता की वजह से ही भाजपा को 1991 के विधानसभा चुनाव में पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ। कल्याण सिंह के करिश्मे को स्वीकार करते हुए भाजपा ने उन्हें अपना मुख्यमंत्री बनाया। उन्ही के कार्यकाल में 6 दिसंबर 1992 को विवादित बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद केंद्र की तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार ने उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया। इसके बाद वो राम मंदिर आंदोलन के एक बड़े नेता बन गए।

भाजपा आलाकमान के साथ मतभेद के कारण उन्हें आगे चलकर पार्टी भी छोड़ना पड़ा, लेकिन बाद में राज्य में उनके जनाधार और उनकी लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा उन्हें वापस पार्टी में लेकर आई। कल्याण सिंह को राज्यपाल बनाया, उनके बेटे राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया को लोकसभा का सांसद बनाया और पोते संदीप सिंह को विधानसभा चुनाव में जीत दिलवा कर योगी सरकार में मंत्री बनवाया। हिंदुत्व के बड़े चेहरे और राम मंदिर के लिए अपनी सरकार की कुर्बानी देने के कारण आज भी कल्याण सिंह की लोकप्रीयता उत्तर प्रदेश की जनता में बरकरार है।

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