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एक दशक में 70 प्रतिशत बढ़ा समुद्री उत्पादों का निर्यात, अगले 5 वर्षों में 30 अरब डॉलर के लक्ष्य पर नजर: पीयूष गोयल

भारत का समुद्री उत्पाद (सीफूड) निर्यात पिछले दस वर्षों में करीब 70 प्रतिशत बढ़ा है और अब सरकार अगले पांच वर्षों में इसे 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यह बात विशाखापट्टनम में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समुद्री उत्पाद निर्यात कार्यशाला के दौरान कही।

मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने मत्स्य पालन विभाग और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सहयोग से 5-6 जून 2026 को इस कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य मूल्य संवर्धन, टिकाऊ उत्पादन, बेहतर बाजार पहुंच, नवाचार और आधुनिक बुनियादी ढांचे के जरिए भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत वर्तमान में वैश्विक सीफूड व्यापार में लगभग 4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। उन्होंने उद्योग जगत, निर्यातकों और किसानों से मिलकर काम करने का आह्वान किया ताकि अगले पांच वर्षों में समुद्री उत्पादों का निर्यात 30 अरब डॉलर तक पहुंचाया जा सके।

उन्होंने कहा कि रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक जैसे वैल्यू एडेड उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही हाल के वर्षों में भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से खुले नए बाजारों का लाभ उठाकर निर्यात बढ़ाने पर भी जोर दिया।

वहीं, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र है और भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात में उसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नवाचार, ब्रांडिंग, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों के सहयोग के जरिए आंध्र प्रदेश को वैश्विक समुद्री उत्पाद निर्यात हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

इसके साथ ही, केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि देश में मछली उत्पादन 2012-13 के 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में लगभग 198 लाख टन तक पहुंच गया है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात करीब 73,890 करोड़ रुपए (8.46 अरब डॉलर) तक पहुंच गया है।

उन्होंने बताया कि फ्रोजन झींगा अभी भी भारत का सबसे बड़ा समुद्री निर्यात उत्पाद बना हुआ है। सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) और पीएमकेएसएसवाई 2.0 जैसी योजनाओं के माध्यम से निर्यातोन्मुखी बुनियादी ढांचे, ट्रेसबिलिटी और टिकाऊ एक्वाकल्चर को बढ़ावा दे रही है।

केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू ने कहा कि उच्च मूल्य वाले समुद्री उत्पादों के निर्यात के लिए मजबूत एयर कार्गो और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बेहद जरूरी है। सरकार कार्गो इंफ्रास्ट्रक्चर और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर काम कर रही है।

बयान में आगे कहा गया कि कार्यशाला में समुद्री उत्पाद उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों, निर्यातकों, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और किसानों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इनमें बीमारियों का प्रबंधन, उत्पादन लागत में वृद्धि, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, कोल्ड चेन नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स, प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन शामिल रहा।

प्रतिभागियों ने स्टार्टअप्स और एमएसएमई को प्रोत्साहन देने, नए निर्यात बाजार तलाशने और टिकाऊ मत्स्य पालन पद्धतियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

कार्यशाला के दूसरे दिन ट्रेसबिलिटी सिस्टम, टिकाऊ प्रमाणन, निर्यात प्रोत्साहन, गहरे समुद्र में मत्स्य पालन, वैल्यू एडिशन और संभावित पीएलआई (पीएलआई) योजना जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।

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