उत्तर प्रदेशलखनऊ

देश के कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं, साइबर ठगों से सावधान रहने की CM योगी ने की अपील

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि देश के किसी भी कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने अपनी पाती के माध्यम से प्रदेशवासियों से साइबर अपराधियों और ठगों से सतर्क रहने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल, व्हाट्सएप या सोशल मीडिया के जरिए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती और न ही इस माध्यम से पैसे की मांग करती है।

मुख्यमंत्री से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोगों को सावधान कर चुके हैं, फिर भी लोग साइबर ठगों के जाल में आए दिन फंसते रहते हैं। अब योगी ने अपनी पाती का संदेश मीडिया के जरिए जन-जन तक पहुंचाते हुए कहा कि साइबर ठग भय और भ्रम फैलाने के लिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे झूठे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।

उन्होंने प्रदेशवासियों से जागरूक रहने और दूसरों को भी जागरूक करने की अपील की है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर यूपी पुलिस द्वारा डिजिटल अरेस्ट को लेकर जारी की गई नाना पाटेकर अभिनीत जागरूकता लघु फिल्म को महज चार दिनों में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 17 लाख 30 हजार से अधिक लोगों ने देखा और सराहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 से पहले प्रदेश में केवल दो साइबर क्राइम थाने थे, जबकि अब सभी 75 जनपदों में साइबर क्राइम थाने और साइबर हेल्प डेस्क क्रियाशील हैं। किसी भी स्थिति में अपनी व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी साझा न करें। यदि साइबर अपराध होता है तो तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक करने का आह्वान किया।

सबसे बड़ा हथियार सतर्कता और जागरूकता

साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा हथियार सतर्कता और जागरूकता है। खुद जागरूक बनें, परिवार और विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को समझाएं। साइबर अपराधी अक्सर सोशल मीडिया से पीड़ित की निजी जानकारी जुटाते हैं, जैसे फोटो, वीडियो, लोकेशन, रिश्तेदारों की जानकारी और उसी के आधार पर डर का माहौल बनाते हैं।

क्या करें

संदिग्ध कॉल/वीडियो कॉल पर तुरंत काटें
1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज करें
बैंक/यूपीआई अकाउंट फौरन ब्लॉक कराएं
परिवार, खासकर वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक करें
सबूत (स्क्रीनशॉट/नंबर) सुरक्षित रखें

क्या न करें

वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ की बात न मानें
किसी को पैसे ट्रांसफर न करें, ओटीपी, पिन, सीवीवी साझा न करें
सोशल मीडिया पर लोकेशन/निजी जानकारी सार्वजनिक न करें
धमकी से घबराएं नहीं, शांत रहें

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