उत्तर प्रदेशलखनऊ

फेंसेडिल सिरप की तस्करी करने वाले दो भाई समेत चार गिरफ्तार, एसटीएफ ने सहारनपुर से पकड़ा

नशे में इस्तेमाल के लिए फेंसेडिल कफ सिरप व कोडीन युक्त दवाओं का भंडारण कर तस्करी करने वाले चार आरोपियों को यूपी एसटीएफ ने सहारनपुर से बुधवार सुबह गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों में दो-दो सगे भाई हैं। आरोपियों के पास से दो पिस्टल, दस कारतूस, चार मोबाइल व भारी मात्रा में इलेक्ट्राॅनिक व भौतिक दस्तावेज बरामद हुए हैं।

आरोपी करीब डेढ़ साल से लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दर्ज मामले में फरार चल रहे थे। आरोपियों ने फेंसेडिल सिरप की तस्करी से करीब 200 करोड़ की संपति बनायी थी। जिसका ब्योरा एसटीएफ जुटा रही है। ट्रांजिट रिमांड पर लेकर एसटीएफ चारों को लखनऊ लेकर पहुंची और सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दाखिल कर दिया।

8 अप्रैल 2024 को यूपी एसटीएफ और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने सुशांत गोल्फ सिटी के अहिमामऊ से ट्रक चालक धर्मेंद्र कुमार निवासी मौरावां उन्नाव को गिरफ्तार किया था। ट्रक से 52 पेटी सिरप और अन्य सामान बरामद किया गया था। बरामद माल पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा था।

एसटीएफ की जांच में कुछ और नाम सामने आए। जिसके बाद डीएसपी एसटीएफ लाल प्रताप सिंह ने विभोर राणा, उसके भाई विशाल सिंह निवासी शास्त्रीनगर सदर बाजार सहारनपुर को नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया, लेकिन वे नहीं आए। जिसके बाद एसटीएफ ने सहारनपुर में छापेमारी कर विभोर राणा, विशाल सिंह, बिट्टू कुमार और उसके भाई सचिन कुमार निवासी अनमोल विहार कॉलोनी सहारनपुर हालपता अब्दुल्ला नगर देवबंद को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी विभोर राणा व विशाल सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 में अपनी फर्म जीआर ट्रेडिंग सहारनपुर के नाम पर एबॉट कंपनी से सुपर डिस्ट्रीब्यूशनशिप लिया। एबॉट कंपनी की दवा फेंसेडिल कफ सिरप को बांग्लादेश में नशे के रूप में काफी प्रयोग किया जाता है, जिससे तस्करी करने वालों में काफी मांग रहती है। लालच में आरोपियों ने परिचितों के नाम पर ड्रग लाइसेंस बनवाकर और उस पर फर्जी फर्म बनाकर कागजों में ही फेंसेडिल की खरीद फरोख्त दिखाकर दवा को असली रिटेलर को न देकर नशे के लिए बांग्लादेश तस्करी करने वाले गिरोह को दे देते थे।

एबॉट कंपनी अधिकारी से सेटिंग कर कर्मी व सहयोगी के नाम लिया था ड्रग लाइसेंस

आरोपियों ने बताया कि वर्ष 2021 में जौनपुर, वाराणसी और मालदा में कई जगह एसटीएफ और एनसीबी की कार्रवाई में उनकी फर्म जीआर ट्रेडिंग और कर्मचारी बिट्टू कुमार के नाम पर बनी फर्जी फर्म सचिन मेडिकोस का नाम सामने आया। वर्ष 2022 में एनसीबी पश्चिम बंगाल ने विभोर राणा को गिरफ्तार भी किया गया था। जमानत पर आने के बाद जीआर ट्रेडिंग बंद कर अपने कर्मी सचिन कुमार के नाम पर ड्रग लाइसेंस बनवाकर एबॉट कंपनी के अधिकारियों से मिलकर मारुति मेडिकोज को हरिद्वार उत्तराखंड की सुपर डिस्ट्रीब्यूशनशिप दिला दी।

इसके एवज में सचिन और बिट्टू कुमार को मुनाफे का लालच दिया। करीब 6 महीने तक काम करने के बाद अप्रैल 2024 में एसटीएफ ने लखनऊ में माल पकड़ लिया। उसके बाद सहयोगी अभिषेक शर्मा के नाम से दिल्ली में एबी फार्मास्यूटिकल्स फर्म बनाकर एबॉट कंपनी के अधिकारी से सेटिंग कर सुपर डिस्ट्रीब्यूशनशिप ली और दोबारा फेंसेडिल की तस्करी का काम करने लगे।

एबॉट कंपनी की मदद से रांची की फर्म को दिया था 100 करोड़ के सिरप

आरोपी ने बताया कि रांची का सुपर डिस्ट्रीब्यूटर शैली ट्रैडर भी फेंसेडिल की तस्करी में संलिप्त था। एसटीएफ के हाथ में जांच आने के बाद आरोपी के यूपी व उत्तराखंड के ग्राहक ने सप्लाई लेने से इंकार कर दिया। इसपर एबॉट कंपनी ने आरोपी के पास बचे फेन्सेडिल के भारी स्टॉक को वापस मंगाकर शैली ट्रैडर को करीब 100 करोड़ का दिया था। दिसंबर 2024 में जांच के कारण एबॉट ने फेंसेडिल बनाना भी बंद कर दिया। एबी फार्मास्यूटिकल्स का माल करीब एक सप्ताह पहले सौरभ त्यागी के पास से गाजियाबाद में पकड़ा गया है।

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