ओपिनियनताज़ा ख़बरसंपादक की पसंद

प्रख्यात क्रांतिकारी, लेखक तथा  संपादक – पंडित वचनेश त्रिपाठी 

मृत्युंजय दीक्षित 


वर्ष 1920 में उत्तर प्रदेश के जनपद हरदोई के संडीला मे जन्मे वचनेश त्रिपाठी न केवल एक महान क्रांतिकारी थे अपितु एक लेखक व संपादक भी थे। वचनेश जी ने अपने लेखन व संपादन के माध्यम से क्रांतिकारियों  के विषय में जो ठोस जानकारी उपलब्ध कराई है। ऐतिहासिक काकोरी घटनाक्रम पर उनके द्वारा सम्पादित  पुस्तक  “काकोरी कांड के दिलजले“में काकोरी कांड से संबद्ध सर्वश्री पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अश्फाक उल्ला खां,  राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह, यतीन्द्रनाथ दास,  चंद्रशेखर आजाद,  शचींद्र नाथ सान्याल, योगेशचद्र चटर्जी, गोविंद चरणकर, शचीन्द्रनाथ बख्शी,  मुकुन्दी लाल गुप्त,  मन्मनथ गुप्त,  सुरेशचद्र भट्टाचार्य, विष्णु शरण दुब्लिश, रामकृष्ण खत्री,  राजकुमार सिन्हा , भूपेन्द्र नाथ सान्याल,  प्रेमकृष्ण खन्ना ,  रामदुलारे त्रिवेदी तथा रामनाथ पांडेय  सरीखे 20 क्रांतिवीरो का जीवन  परिचय है।

पंडित जी मात्र 15 वर्ष की आयु में ही मैनपुरी केस में फरार क्रांतिकारी देवनारायण भारतीय के संपर्क में आए और स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय होने का संकल्प लिया। रामप्रसाद बिस्मिल के साथ काम करते हुए उन्होंने चिंगारी नामक समाचार पत्र निकाला। बालामऊ जंक्शन पुलिस चौकी लूटने के आरोप में उन्हें जेल भ्रेजा गया और यहाँ से  उनका जेल जाने का सिलसिला आरंभ हो गया।

वचनेश जी को आजादी के महासमर में  कूदने की प्रेरणा उन्हें  एक बालिका के बलिदान की कथा से मिली। वो आजादी की एक मासूम सिपाही थी जिसे अंग्रेजों ने  जलाकर मार डाला था। यह बालिका मैना थी जिसके पिता नानासाहेब धुंधूपंत अंग्रेजों से टक्कर  ले रहे थे । वचनेश जी ने  मैना के बलिदान पर उपन्यास लिखने की योजना बनाई। जब  उपन्यास “विद्रोही की कन्या“ प्रकाशित होकर बाजार में आया  तो उसकी धूम मच गई। बाद में उनकी लिखी वे आजाद थे,  शहीद मुक्त प्राण,  अग्निपथ  के  राही,  सुकरात का प्याला, गोदावरी की खोज,  सूरज के बेटे, जरा याद करो कुर्बानी ,इतिहास के झरोखे से , यह पुण्य प्रवाह हमारा आदि श्रृंखला की पुस्तकें बहुत लोकप्रिय हुईं। उन्होंने बच्चों के लिए प्रेरक अनमोल कहानियां भी लिखीं ।

क्रांतिकारी इतिहास के अध्येता वचनेश त्रिपाठी भाषण कला में भी अत्यंत निपुण थे। उनके भाषण का विषय में क्रांतिकारी भगत सिंह आजाद बिस्मिल और सुभाष के उदहारण आ ही जाते थे । स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात जब अटल बिहारी बाजपेयी संघ विस्तारक होकर संडीला पहुंचे तब वह वचनेश जी के घर पर ही रहे और दोनो की प्रगाढ़ मित्रता हो गई।

लखनऊ से जब मासिक राष्ट्रधर्म, साप्ताहिक पांचजन्य  और दैनिक स्वदेश का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ तो अटल जी ने वचनेश जी की लेखन प्रतिभा के कारण उन्हें लखनऊ बुला लिया। 1960 में वे तरूण भारत के संपादक बने ।1967 से 73 तथा 1975 से 84 तक वे राष्ट्र धर्म के तथा 1973 से 75 तक वे पांचजन्य के संपादक रहे।क्रांतिकारी इतिहास में अत्यधिक रुचि होने के कारण वे जिस पत्र में रहे उसके कई क्रांतिकारी विशेषांक निकाले जो अत्यंत लोकप्रिय हुए ।

वचनेश जी ने कहानी, कविता, संस्मरण, उपन्यास, इतिहास, निबंध, वैचारिक लेख जैसी लेखन की सभी विधाओं में प्रचुर कार्य किया। 1984 में  संपादन कार्य से विरत होने के बाद भी वे लगातार लिखते रहे। पांचजन्य, राष्ट्रधर्म आदि में उनके लेख अनवरत प्रकाशित होते रहे। वह विचार आते ही उसे लिख डालने के लिए इतने तत्पर रहते थे कि साथ में पुस्तिका न होने पर किसी भी उपलब्ध वस्तु पर जिस पर कलम चल जाए लिख कर रख लेते थे । पत्रकारिता व साहित्य लेखन में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें 2001 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

खबरी अड्डा

Khabri Adda Media Group has been known for its unbiased, fearless and responsible Hindi journalism since 2019. The proud journey since 3 years has been full of challenges, success, milestones, and love of readers. Above all, we are honored to be the voice of society from several years. Because of our firm belief in integrity and honesty, along with people oriented journalism, it has been possible to serve news & views almost every day since 2019.

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button