उत्तर प्रदेशकासगंज

भू-माफियाओं के कब्जे से छुड़वाई जमीन पर बना दिया हरित क्षेत्र, डीएम की अनोखी पहल

कासगंज के जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह की एक अनोखी पहल की चर्चाएं जिले भर में ही नहीं देश और प्रदेश भर में बनी हुई हैं. एक गंगातटवर्ती इलाके में ग्राम सभा की 12 सौ बीघा भूमि को एन्टी भू माफिया अभियान के तहत ग्रामीणों के अवैध कब्जे से मुक्त करा कर गंगा वन की स्थापना की है. गंगा वन में तकरीबन एक करोड़ की लागात से एक लाख एक हजार पौधे लगातार गंगा वन को तैयार किया है. जिसे देखने के लिए प्रदेश भर के लोग यहां आते हैं. यह गंगावन लोगों के देखने के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

ऐसे हुई गंगावन की स्थापना 

कासगंज जिला मुख्यालय के सोरों सूकर क्षेत्र भगवान वराह की नगरी है. भगवान वराह ने हरिणायक्ष का वध करके हरपदीय गंगाकुंड में अपने शरीर का त्याग कर दिया था, तबसे यहां पापों से मुक्ति का दरिया बहता है, मोक्ष की प्राप्ति होती, कष्टों का विनाश होता है. यहां एक नहीं अनेकों विशेषताए हैं, इसी पुण्य की दरिया को और बेहतर करने वाले कासगंज जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने इस इस क्षेत्र को और विकसित, विख्यात करने के लिए यहां से आठ किलोमीटर दूर गंगा के निकट एक गंगावन की स्थापना नौ अगस्त  2019 को की थी. जिसका शुभारंभ प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने पौधा लगाकर किया. बाद में  उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव कल्पना अवस्थी वन एवं वन्य जीव विभाग, राज्यमंत्री सुरेश पासी, नमामि गंगे भारत सरकार के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा, सासंद राजवीर ने पौधारोपण कर अपनी नेम प्लेट लगवाई, ताकि गंगावन में उनका नाम हमेशा हमेशा के लिए बना रहे.

एक लाख पौधे लगाये गये थे

इस गंगा वन को बेहतर और खुशहाल बनाने के नौ अक्टूबर 2019 को एक साथ एक लाख पौधे रोपित किये. अब यह गंगावन जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह की अनोखी पहल से खुशहाल और हरा भरा बना हुआ है. इस गंगा वन को खुशहाल बनाने के चार योजनाओं की मद से तकरीबन एक करोड रुपये का खर्च हुआ है. इस खर्चे से 51 प्रजाति के पौधे रोपित किये गये हैं. जिसमें हरी शंकर वाटिका, नक्षत्र वाटिका, नवग्रह वाटिका, महादेव उपवन सहित 15 वाटिकाए हैं, जोकि आज गंगा वन की खुशबू को फैलाने में काफी है.

दूर दूर से लोग आते हैं 

यहां की देखभाल कर रहे नाथूराम बताते हैं कि, यहां बहुत दूर-दूर से गाडियों से लोग आते हैं और यहां की सुंदरता देखते हैं. यहां अधिकारी भी आते हैं और बढ़िया व्यवस्था बताते हैं, यह घूमते भी हैं. हम लोग यहां काम करते हैं. यहां कदम के पेड हैं, अमरूद के पेड हैं, बरगद, पीपल, शीशम के पेड़ हैं और तमाम औषधियों के अलावा क्या-क्या नाम है, उनके नाम भी नहीं आते हैं, हमें, 51 प्रजाति के पौधे गंगा वन में लगाए गये हैं.

भागीरथ बने जिलाधिकारी 

भागीरथ बनकर अनोखी पहल कर रहे जिला अधिकारी कासगंज चंद्रप्रकाश सिंह बताते हैं कि, 9 अक्टूबर 2019 को प्रदेश की महामहिम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के द्वारा पौधारोपण कर स्थापना की गई थी. उस वक्त 1 लाख 1000 पौधे रोपित किए गए थे, जिसमें आध्यात्मिक दृष्टि से औषधि दृष्टि से पौराणिक दृष्टि से व्यवसाय दृष्टि से 51 प्रजाति के पौधे लगाये गये थे. उद्देश्य केवल यह है कि गंगा की धारा अविरल रहे, स्वच्छ रहे, पावन रहे, जो गंगा मां है मोक्षदायिनी हैं, हमारी भाग्य रेखा है, उनका सदैव हम पर और जनपद वासियों पर आशीर्वाद प्राप्त हो सके, इसी सोच के साथ पर्यावरण का विकास हो.

स्थानीय लोगों को रोजगार का मिले, जैसा कि हम जानते हैं. हमारे सोरों सोरों शूकर क्षेत्र एक तीर्थ स्थल है. यहां मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र से राजस्थान गुजरात  से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आते हैं. हजारों लोग यहां सुबह आते हैं और शाम को चले जाते हैं. उनको कोई घूमने के लिए वैकल्पिक स्थान नहीं था तो 8 किलोमीटर दूर दतलाना गांव स्थित गंगा के निकट भागीरथ वन की स्थापना की. आज सभी जानते है दो लाख पौधे एक वृक्ष का स्वरुप ले चुके हैं और गूगल पर भी हमारा गंगा वन आया हुआ है. यहां लोग आए और उन्हें घूमने के लिए एक वैकल्पिक अच्छी जगह मिले सके.

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