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लखीमपुर खीरी हिंसा: बढ़ाई बीजेपी की चुनौती, हो सकता है सियासी नुकसान

सरकार के खिलाफ विपक्ष की मोर्चाबंदी: कांग्रेस, सपा और बसपा पर क्या होगा असर

यूपी में विधानसभा चुनाव काफी नजदीक हैं. बीजेपी यूपी फतह करने के लिए रणनीति बनाने में जुटी हुई है. लेकिन लखीमपुर खीरी की हिंसा के बाद सरकार की काफी फजीहत हो रही है. इस घटना के बाद विपक्ष भी सरकार पर हमलावर है. वहीं जनता के मन से चुनाव तक इस हिंसा की कसक निकाल पाना भी बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है. चुनाव पास आते ही बीजेपी (BJP) जोर-शोर से प्रचार की शुरुआत कर रही थी, लेकिन लखीमपुर की हिंसा ने उस रफ्तार पर कहीं न कहीं ब्रेक लगा दिया है.

किसान आंदोलन के बाद पश्चिमी यूपी के किसानों में सरकार के प्रति पहले से ही नाराजगी देखी जा रही थी. हालांकि पूर्वांचल के किसानों ने आंदोलन से दूरी बना रखी थी. लेकिन लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद पूर्वांचल के किसान भी अब सरकार से नाराज दिख रहे हैं. किसान राकेश टिकैत के साथ नजर आए. हिंसा के बाद ही सरकार ने बड़े पुलिस फोर्स को वहां पर भेज दिया था लेकिन यह इस परेशानी का परमानेंट सॉल्यूशन नहीं था. वहीं पुलिस की सुस्ती की वजह से सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं.

बीजेपी के चुनावी एजेंडे को हो सकता है नुकसान

घटना के काफी दिन बीतने के बाद आशीष मिश्रा पर हत्या का केस दर्ज जरूर हुआ लेकिन उसकी गिरफ्तारी से पुलिस बचती नजर आई. इससे सरकारा की मंशा पर सवाल खड़े होने लगे. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार ने मुस्तैदी दिखाई. तब जाकर आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी हो सकी. उन्नाव, हाथरस रेप कांड के बाद गोरखपुर कांड से सरकार को काफी फजीहत झेलनी पड़ी थी, लेकिन उस समय रणनीतिकारों ने जैसे-तैसे बात को संभाल लिया था. लेकिन चार किसानों की मौत के बाद विपक्ष भी सरकार पर पूरी तरह से हमलावर है. इसे बीजेपी के चुनावी एजेंडे को काफी नुकसान हो सकता है.

लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद सरकार की फजीहत

लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद से सरकार को काफी सियासी नुकसान उठाना पड़ सकता है. इस घटना के बाद से विपक्ष को सरकार के खिलाफ ब्रह्मास्त्र मिल गया है. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी पूरी तरह से सरकार पर हमलावर हैं. उन्होंने लगातार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है. प्रियंका लगातार मंत्री अजय मिश्रा के इस्तीफे की मांग पर अड़ी हुई है. वहीं अखिलेश यादव भी इस मुद्दे पर सरकार पर हमलावर है. विपक्ष चुनाव से पहले इस मुद्दे को जोर-शोर से भुनाने में जुटा हुआ है.

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Saurabh Bhatt

सौरभ भट्ट पिछले दस सालों से मीडिया से जुड़े हैं। यहां से पहले टेलीग्राफ में कार्यरत थे। इन्हें कई छोटे-बड़े न्यूज़ पेपर, न्यूज़ चैनल और वेब पोर्टल में रिपोर्टिंग और डेस्क पर काम करने का अनुभव है। इनकी हिन्दी और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छी पकड़ है। साथ ही पॉलिटिकल मुद्दों, प्रशासन और क्राइम की खबरों की अच्छी समझ रखते हैं।

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