उत्तर प्रदेशलखनऊ

भारत-नेपाल सीमा पर 20 साल में मदरसे-मस्जिदों की चार गुना बढ़ी संख्या, खुफिया एजेंसियां हुई अलर्ट

भारत को अब नेपाल सीमा पर भी ज्यादा चौकसी बरतनी पड़ रही है. क्योंकि भारत-नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर जिले पर पिछले बीस साल में मदरसों और मदरसे की संख्या में चार गुना इजाफा हुआ है. इसमें से ज्यादा मदरसे भारत नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में खुले हैं, जो देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चौंकाने वाली खबर है. जानकारी के मुताबिक सिद्धार्थनगर जिले में 597 मदरसे हैं और इसमें से 452 मदरसे पंजीकृत हैं और 145 मदरसों का कोई रिकॉर्ड नहीं है. लिहाजा अब खुफिया एजेंसियां अलर्ट हैं. क्योंकि नेपाल से भारत में कई आतंकी आ चुके हैं.

फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस बात पर नजर रख रही हैं कि जिले में जो मदरसे चले रहे हैं, उनका सरकारी रिकॉर्ड क्यों नहीं हैं और इनको संचालित करने में पैसा कहां से आ रहा है. देश की सुरक्षा एजेंसियां कई बार खुलासा कर चुकी हैं कि भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए खा़ड़ी के देशों से फंडिंग आ रही है और ये फंडिंग अवैध मदरसों को दी जा रही है. पिछले दिनों ही यूपी एटीएस ने जिस धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़ किया था. उसके पास भी फंडिंग विदेशों से आ रही थी और धर्मांतरण के खेल में बड़े मदरसे भी शामिल थे. जिसके बाद जांच एजेंसिंयों ने अपने जांच का दायरा बढ़ा दिया था और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया था.

जिले में तीस साल पहले थे 16 मदरसे

जानकारी के मुताबिक जिले में चल रहे मदरसों के लिए दुबई और खाड़ी देशों फंडि़ंग आ रही है और जिसके बाद स्थानीय स्तर पर मदरसे खुल रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1990में जिले में कुल 16 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हो रहे थे. लेकिन पिछले साल तक इन मदरसों की संख्या बढ़कर 147 हो गई.

जानें क्या कहते हैं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अफसर

जिले के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तन्मय कुमार का कहना है कि कोई भी व्यक्ति मदरसा खोल सकता है. लेकिन सरकारी अनुदान केवल मान्यता प्राप्त मदरसों को दी जाती है. वहीं एसएसबी 43वींवाहिनी के डिप्टी कमांडेंट मनोज कुमार का कहना है कि सीमावर्ती इलाके में जिन मदरसों के रिकॉर्ड नहीं हैं, उन पर नजर रखी जा रही है. फिलहाल जिले में मदरसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं.

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