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पेट्रोल, गैस व घरेलू उत्पादों में वृद्धि ने मध्यम वर्गीय परिवारों का बिगड़ा बजट

  • बिगड़े बजट को लेकर गृहणी महिलाओं ने जताई चिंता, सरकार से रोकथाम की मांग

देश में लगातार बढ़ रही महंगाई से आम आदमी की जेब पर असर पड़ रहा है। एक माह के अंदर डीजल, पेट्रोल व घरेलू ईंधन के साथ ही खाद्य पदार्थों में हुई बढ़ोतरी से आने वाले त्योहार पर भी इसका असर दिख रहा है। इस महंगाई के चलते लगातार विपक्ष भी सरकार को घेरने का में जुटी हुई है।

हाल के दिनों में महंगाई की रफ्तार इस कदर बढ़ी है कि इसका असर पर नीचले व मध्यम परिवारों में दिखने लगा है। आम आदमी का सब्जियों में लगी आग से उन्हें लेना मुश्किल हो रहा है। गैस सिलेंडर लेने के लिए लोगों को सोचना पड़ रहा है। प्राइवेट नौकरी पेशा वालों की हालत तो महंगाई ने बद से बदतर कर दी है। नौकरी करने वालों की कमाई तो नहीं बढ़ी है अलबत्ता उनका घर चलाना दूभर हो गया है। महंगाई का दर्द अब राह चलते लोगों के चेहरे पर साफ दिखने लगा है। वाहन सवार अब गाड़ी चलाने से परहेज करने लगे हैं।

कानपुर में हिन्दुस्थान समाचार की टीम ने महंगाई पर गृहणी व आम लोगों का हाल जाना। इस दौरान सबसे ज्यादा परेशान गृहणियां देखी। उनकी माने तो अगर आलम यहीं रहे तो आने वाले दिनों में त्योहार मनाना तो दूर की बात है बच्चों को खिलाने व पढ़ाने के भी लाले पड़ जाएंगे। इसको लेकर महिलाएं केन्द्र व राज्य सरकार से ठोस रणनीति के साथ रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने की बात कह रहीं हैं। हरबंश मोहाल निवासी वंदना राठौर ने बताया कि कोरोना काल में पहले से ही नौकरी पेशा करने वालों की जेब में गहरा असर हुआ है तो वहीं लगातार एक माह के अंदर घरेलू गैस व खाद्य सामग्री में आई इस महंगाई से त्योहार पर बनने वाले व्यंजनों को थाली से गायब किया है।

बिरहाना रोड निवासी डॉली तिवारी का कहना है कि अब तक की इस महंगाई से घर की गृहस्थी चलाना एक टेढ़ी खीर की तरह हो गयी है। क्योंकि पहले जो सरसों का तेल 70 से 80 रुपये मिल जाता था। आज वो 190 रुपये की कीमत का हो गया है। इसी तरह कई ऐसे खाद्य पदार्थ व सामग्री है जिसमें काफी बढ़ोतरी हो गई है। जिसकी वजह आम आदमी की गृहस्थी चलाना मुश्किल हो गया है। सिरकी मोहाल निवासी सोनी दुबे का कहना है कि इस बार त्योहार आने से पहले आई महंगाई ने गृहस्थी का बजट बिगाड़ दिया है। जिसकी वजह से अब लगता है कि दीपावली में आने वाले अथिति के सामने पहले की तरह व्यंजन परोस पाएंगे कि नहीं। क्योंकि इस महंगाई ने जबरदस्त तरीके से गृहस्थी में आग लगाने का कार्य किया है।

हरबंश मोहाल निवासी रवि का कहना है कि वो पेशे समाज सेवी है और अपने जेब खर्च से लोगों की मदद किया करते थे। लेकिन इस एकाएक बढ़ रही महंगाई के चलते उनके हाथों को जकड़ दिया है। जिसकी वजह से वह अब लोगों को खाने पीने का सामान पहले की तरह बांटने में असमर्थता जता रहे है। उनका कहना है कि पेट्रोल कीमतों में लगातार हुई इस वृद्धि से मध्यम वर्गीय परिवार की जेब में डाका डालने का कार्य किया है। सिविल लाइन में रहने वाली गृहणी पूजा ने बताया कि लगातार महंगाई बढ़ती जा रही है। गैस सिलेंडर के साथ ही सब्जियों, खाने वाले तेल आदि में बेतहाशा मूल्य वृद्धि से रसोई का बजट बिगड़ गया है। खाने-पीने की वस्तुओं में इतनी बढ़ोत्तरी कभी नहीं देखी है। सरकार को इस पर नियंत्रण करना चाहिए, नहीं तो आम लोगों की आर्थिक हालत और बदतर हो जाएंगे।

रावतपुर गांव में रहने वाली विमला देवी ने बताया कि उनके पति प्राइवेट नौकरी करते हैं और यहां पर किराए का कमरा लेकर रहते हैं। वर्तमान में सब्जी, सरसो का तेल, गैस सिलेंडर सहित खाद्य पदार्थों के दाम आसमान छू रहे हैं। गृहस्थी का पूरा बजट खराब हो गया है। पति का वेतन उतना ही है और महंगाई के चलते बिगड़े गृहस्थी के बजट से बच्चों की फीस आदि भी देना भारी पड़ने लगा है। आने वाले दिनों में त्योहार लगातार हैं। महंगाई ऐसी ही बनी रही तो मध्यम वर्गीय परिवारों का हाल बेहाल हो जाएगा। सरकार को महंगाई की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

मीरा गैस एजेंसी की निदेशक मीरा रानी सिंह ने बताया कि बीते माह 14.200 किलो के सिलेंडर पर दो बार मूल्य वृद्धि हुई थी। इस माह की शुरूआत में 15 रूपये दाम की वृद्धि के साथ अब 914 रूपये 50 पैसे कीमत हो गई है। हर्षनगर पेट्रोल पम्प के मैनेजर पंकज कुमार ने बताया कि पेट्रोलियम कम्पनी की ओर पेट्रोल-डीजल के दामों में कुछ वृद्धि की गई है। शनिवार को 15 पैसे की बढ़ोत्तरी के साथ सादा पेट्रोल 102 रूपये 18 पैसे प्रति लीटर के दाम हो गए हैं। वहीं, डीजल 94 रूपये 16 पैसे प्रति लीटर के दर जनपद में है।

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