उत्तर प्रदेशलखनऊ

2025 तक हर घर पर लगेगा बिजली का प्रीपेड मीटर, 28 लाख उपभोक्‍ताओं से होने जा रही शुरुआत

बत्ती गुल और भार जंपिंग की शिकायतों के बाद राज्य में बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने पर लगी रोक को हटाते हुए पावर कारपोरेशन ने एनर्जी एफिशियंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) को कुछ शर्तों के साथ प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की अनुमति दे दी है। अनुमति के साथ यह हिदायत दी गई है कि सरकार के निर्णयों के तहत फोर-जी तकनीक के स्मार्ट मीटर ही लगाएं। फिलहाल यह आदेश करीब 28 लाख उपभोक्ताओं के घर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने के लिए है।

प्रबंध निदेशक पावर कारपोरेशन पंकज कुमार ने सभी संबंधित कंपनियों व अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। पंकज कुमार के मुताबिक अब सभी उपभोक्ताओं के घर प्रीपेड स्मार्ट मीटर ही लगेंगे। पावर कारपोरेशन ने पूर्व में ईईएसएल को राज्य में 40 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का काम दिया था। जिसके बाद ईईएसएल ने राज्य में करीब 12 लाख स्मार्ट मीटर लगाए। टू-जी और थ्री-जी तकनीक के कम गुणवत्ता वाले मीटर लगाए जाने से पिछले साल स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बेवजह परेशान होना पड़ा था। स्मार्ट मीटर से भार जंपिंग और बत्ती गुल होने से महकमे में बवाल मचा। इस मामले की तीन विभागीय जांचों के बाद शासन ने यह जांच एसटीएफ को सौंप दी थी। जिसके साथ ही स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगा दी गई थी।

पावर कारपोरेशन के चेयरमैन एम. देवराज का कहना है कि स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता पर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। अच्छी से अच्छी गुणवत्ता के मीटर राज्य में लगेंगे। अभियंता संघ के महासचिव प्रभात सिंह का कहना है कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं और कारपोरेशन दोनों के हित में है। उपभोक्ताओं को एकदम सही रीडिंग मिलेगी। मीटर रीडिंग के नाम पर होने वाले खेल और मीटर से छेड़छाड़ के आरोपों से उपभोक्ता बच सकेंगे। पावर कारपोरेशन को समय से बिल का भुगतान मिलता रहेगा। फोर-जी तकनीक के स्मार्ट मीटर लगने पर भार जंपिंग और कम्युनिकेशन में गड़बड़ी जैसी दिक्कतें नहीं आएंगी।

सबके घर लगेंगे

पावर कारपोरेशन के चेयरमैन एम. देवराज का कहना है कि भारत सरकार के दिशा निर्देशों के तहत 2025 तक सभी कनेक्शन को प्रीपेड स्मार्ट मीटर से लैस किया जाना है। जैसे-जैसे आगे आदेश मिलेंगे उसके मुताबिक इस अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा।

उ.प्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सवाल उठाया है कि पहले जिन 12 लाख उपभोक्ताओं के घरों पर पुरानी तकनीक के स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं उन्हें कब बदला जाएगा। पुरानी तकनीक के स्मार्ट मीटरों के कारण भार जंपिंग और बत्ती गुल मामले में दोषी एजेंसी, मीटर निर्माता कंपनी और अभियंताओं पर कार्रवाई कब होगी। संबंधित कंपनियों को ब्लैकलिस्टेड क्यों नहीं किया गया? उपभोक्ता परिषद के इस सवाल पर पावर कारपोरेशन के अधिकारी कुछ भी बोलने से मना कर रहे हैं।

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