उत्तर प्रदेशप्रयागराज

अखाड़ा परिषद को मिला नया अध्यक्ष, जानिये कौन हैं महंत रवींद्र पुरी

महंत रवींद्र पुरी को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का नया अध्यक्ष चुन लिया गया है। प्रयागराज में सोमवार को दारागंज निरंजनी अखाड़े में हुई बैठक में महंत रवींद्र पुरी को मान्यता प्राप्त 13 अखाड़ों में से सात ने बहुमत से फैसला लेते हुए नया अध्यक्ष चुना।  अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद साधु संतों की सबसे बड़ी संस्था अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का पद रिक्त चल रहा था। इसके लिए काफी दिनों से जोड़तोड़ चल रही थी और अखाड़ों को अपने पक्ष में करने की जोरआजमाइश की जा रही थी। अखाड़ा परिषद के संरक्षक महंत हरि गिरि की ओर से निर्मल अखाड़ा प्रयागराज में परिषद की बैठक बुलाई गई थी।बताया जा रहा है कि 7 अखाड़ों की मौजूदगी व निर्मोही अनी अखाड़े की लिखित सहमति से रवींद्र पुरी महाराज को अखाड़े का नया अध्यक्ष चुना गया है।

कनखल मंदिर के पीठाधीश्वर भी हैं महंत रवींद्र पुरी

महंत रवि‍न्‍द्रपुरी हरिद्वार के कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर महंत रविंद्र पुरी महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव हैं। 35 साल पहले संन्यास लेकर वे महानिर्वाणी अखाड़े में शामिल हुए थे। रविंद्र पुरी 1998 के कुंभ मेले के बाद अखाड़े की कार्यकारिणी में शामिल हुए। 2007 में उन्हें अखाड़े का सचिव बनाया गया था। बताया जाता है कि महंत नरेन्‍द्र गिरि ने सभी अखाड़ों में व्‍यवस्‍था के लिए एक करोड़ रुपए अखाड़ों को दिलवाए थे लेकिन महंत रविन्‍द्र पुरी ने महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से सरकार का एक करोड़ रुपए का ऑफर ठुकरा दिया था।

संतों में विवाद भी

हरिद्वार में संतों के एक धड़े ने परिषद का चुनाव कराकर नई कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया है। जबकि परिषद महामंत्री महंत हरिगिरि ने पहले ही प्रयागराज में 25 अक्तूबर को बैठक का ऐलान किया था। हरिद्वार बैठक में सात अखाड़े एक साथ आए थे। इस वक्त 13 अखाड़ों में सात एक ओर हैं, जबकि छह अखाड़े एक साथ हैं। बताया जा रहा है कि सत्ता में रसूख रखने वाले निर्मल अखाड़े के संत व नेता लगातार प्रयागराज में होने वाली बैठक का समर्थन कर रहे हैं।

क्यों महंत रविन्‍द्रपुरी बने

अखाड़े की परंपरा के अनुसार जिस अखाड़े के संत का निधन होता है और वह परिषद में पदाधिकारी होता है तो उस अखाड़े से जो नाम दिया जाता है उसे ही उस पद पर कार्यकाल पूरा होने तक बैठाया जाता है। इसके अनुसार ही अध्यक्ष पद पर निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्रपुरी का नाम सबसे ऊपर था।  जूना अखाड़े के सभापति महंत प्रेम गिरि भी जूना अखाड़े से अध्यक्ष बनाने की बात कह चुके थे। हालांकि उन्होंने यह उस स्थिति में कहा था जब पूरा परिषद भंग हो जाए। पुरानी कार्यकारिणी चलने की दशा में नहीं।

ये अखाड़े रहे चुनाव में शामिल

पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी, आवाहन अखाड़ा, अग्नि अखाड़ा, नया उदासीन अखाड़ा, पंचायती अखाड़ा निर्मल, पंचायती अखाड़ा आनंद, निर्मोही अनी अखाड़ा, जूना अखाड़ा शामिल रहा। इनमें से निर्मोही अनी अखाड़े ने रवींद्र पुरी के नाम पर लिखित समर्थन भेजा है। उसका कोई भी संत बैठक में शामिल नहीं रहा है। कहा जा रहा है कि निर्मल अखाड़े से रेशम जी महराज को कोर्ट ने मान्यता दी है। ऐसे में वो सोमवार को प्रयागराज पहुंचे और रवींद्र पुरी को अपना समर्थन दिया है। निर्मल अखाड़े का दूसरा धड़ा इस बैठक में शामिल नहीं रहा।

कुंभ में सेतु का काम करती है अखाड़ा परिषद

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद साधु-संतों और सरकार के बीच महाकुंभ में सेतु का काम करती है। साधु-संतों की समस्याएं सरकार और प्रशासन के सामने रखती है और उनका निराकरण कराने की कोशिश करती है। साधु-संतों की प्रतिनिधि संस्था होने के कारण सरकार भी अध्यक्ष का कहना मानती है। इसके अलावा महाकुंभ में देश-दुनिया से आई मीडिया के केंद्र बिंदु में रहता है। राजनीति में भी अखाड़ा परिषद अध्यक्ष का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप रहता है। सभी अखाड़ों का प्रतिनिधि होने के कारण उसका दबदबा रहता है। यही कारण है कि नरेंद्र गिरि जैसे प्रभावशाली संत के संदिग्ध दशा में मौत के बाद अध्यक्ष पद को लेकर परिषद दो फाड़ हो गई है और घमासान मचा है।

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