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रिक्शे पर लगाया हनुमान जी की तस्वीर और गर्भवती पत्नी व डेढ़ साल की बेटी को गुड़गांव से बिठाकर अमेठी पहुंचा सूरज ।

लोकेश त्रिपाठी अमेठी-

चिलचिलाती धूप में रिक्शा चालक सूरज पत्नी अनीता और डेढ़ साल की बेटी रिया को गुड़गांव से रिक्शे पर बिठाकर अमेठी पहुंचा। पत्नी चार माह के गर्भ से है। खुद सूरज और पत्नी को आधे से अधिक सफर भूखे पेट गुजारना पड़ा। लेकिन मासूम बच्ची भूख से ना तड़पे इसका सूरज ने प्रबंध कर रखा था। रास्ते में जहां बेटी को भूख लगती, पिता सूरज दूध की बोतल में दूध बना कर पिलाता फिर आगे बढ़ता।

रिक्शे पर लगाया हनुमान जी की तस्वीर और गर्भवती पत्नी व डेढ़ साल की बेटी को गुड़गांव से बिठाकर अमेठी पहुंचा सूरज ।

सूरज जिस रिक्शे पर परिवार को लेकर गुड़गांव से अमेठी पहुंचा है उस पर हनुमान जी की तस्वीर लगी हुई है। सूरज बताता है कि वर्ष 2007 से वो गुड़गांव में लक्ष्मण बिहार के गली नंबर 18 में रह रहा था और वहां रिक्शा चलाता था। लॉक डाउन के लगातार बढ़ने की वजह से भुखमरी की कगार पर आ पहुंचा। बेरोजगारी में पेट की आग बुझाने के लिए उसने परिवार संग अपने घर का सफर उसी रिक्शे से शुरू किया जिससे कल तक सवारी ढोकर जीविका चलाता था। वो बताता है कि सरकारी मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर पर भी कॉल की लेकिन कहीं से भी सही जवाब नही मिला।

रिक्शे पर लगाया हनुमान जी की तस्वीर और गर्भवती पत्नी व डेढ़ साल की बेटी को गुड़गांव से बिठाकर अमेठी पहुंचा सूरज ।
थक हार कर 15 मई को उसने सफर शुरू किया। यूपी के बार्डर पर पहुंच कर एक ट्रक वाले से बात की उसने कानपुर तक के लिए 3500 भाड़ा मांगा। गरीबी में दे पाना मुश्किल था इसलिए रिक्शे से ही सफर को जारी रखा। सूरज मंजिल पर पहुंचने से पहले कई थपेड़ों का शिकार हुआ। रास्ते में कुछ जगह तो उसे ऐसी मिली जहां पीने का पानी तक उसे नसीब नहीं हुआ। लेकिन गर्भवती पत्नी को इस भीषण गर्मी में लेकर चलना उसके लिए मील के पत्थर के समान था। दुःख की बात ये कि रास्ते में लोगों को उसकी मासूम सी बच्ची पर भी तरस नही आया। ऐसे में बच्ची रास्ते में जब भूख से बेहाल होती तो कड़ी धूप में रिक्शा किनारे लगाकर वो दूध की बोतल में दूध बनाकर बच्ची को पिलाता।

रिक्शे पर लगाया हनुमान जी की तस्वीर और गर्भवती पत्नी व डेढ़ साल की बेटी को गुड़गांव से बिठाकर अमेठी पहुंचा सूरज ।

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