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इलाहाबाद विश्वविद्यालय तीसरी बार देश के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों की सूची से बाहर, खराब रैंकिंग पर रखा गया का मौन

शिक्षा मंत्रालय की रैंकिंग में इलाहाबाद विश्वविद्यालय इस साल तीसरी बार देश के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों की सूची से बाहर हुआ है। हर बार कुलपति इस पर चिंता जताते हुए आगे और बेहतर करने का बयान देकर इतिश्री कर लेते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने इसे चुनौती के तौर पर लेते हुए अभी से रैंकिंग सुधारने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। एक कुशल टीम लीडर के तौर पर खुद को आगे रखते हुए शुक्रवार को उन्होंने सीनेट हाल में शिक्षकों और कर्मचारियों की सभा बुलाई। सभा में इविवि की खराब रैंकिंग का जिक्र करते हुए सभी को पांच मिनट मौन रख इस बात पर मनन करने को कहा कि जिस डूबती कश्ती पर हम सवार हैं उसे उबारने के लिए क्या करना होगा?

उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है, अगर अब भी हम नहीं चेते तो कश्ती डूब जाएगी। कुलपति ने कहा कि इविवि शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में नहीं है इससे ज्यादा दुख की बात यह है कि लखनऊ विश्वविद्यालय, जो की एक राज्य विवि है, वह देश के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में है। बताया कि जब वह मंत्रालय में गई थीं तो वहां एक ही बात हुई थी कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय और बीएचयू में कास्ट लाइन पर काम होता है और यही सबसे बड़े दुख की बात है। प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि वह कोशिश करती हैं कि सभी लोग एक बराबर से एकजुट होकर काम करें लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है।

प्राचीन काल के होते हुए हम प्राचीन हो गए

कुलपति ने कहा कि यह सच है कि इविवि में तीन साल से शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई, विभागों में दो या तीन फैकेल्टी बची है लेकिन रैंकिंग बेहतर न होने का सिर्फ यही एक कारण नहीं है, और भी कई वजह है। वो क्यों नहीं हो रहा है ? उन्होंने सभी से बेहतरी के लिए सुझाव देने को कहा। बताया कि वह जिस शहर में जाती हैं, वहां के विश्वविद्यालय को जरूर देखती हैं। इविवि जैसा नाम, इसके जैसा आर्किटेक्चर और कैंपस कई विश्वविद्यालयों के पास नहीं है। हम प्राचीन काल के होते हुए एकदम से प्राचीन हो गए हैं।

कुलपति ने मर्म बयां किया

कुलपति ने दुखी मन से कहा कि शिक्षकों की कैंपस में उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जब उन्होंने हाजिरी की व्यवस्था की तो कुछ शिक्षकों ने कहा कि हमको कर्मचारी समझा जा रहा है। कुलपति ने कहा कि वह 11-12 देशों का भ्रमण कर चुकी हैं। लोग सुबह साढ़े छह बजे से उठकर काम करते हैं, अपनी कॉफी घर में नहीं कार में पीते हैं। हम 10 बजे आकर 5 बजे तक इविवि में रहने के लिए कह रहे हैं तो लोगों को तकलीफ हो रही है। बताया कि वह सुबह 10 बजे इविवि आ जाती हैं और शाम सात बजे घर जाती हैं लेकिन एक अकेले से नहीं होगा। सबको अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। कुलपति ने इविवि में अभी तक पेटेंट सेल न होने पर चिंता जताई और कहा कि पेटेंट सेल जल्द स्थापित किया जाए।

कुलपति ने शुक्रवार को इविवि के सभी शिक्षकों एवं शिक्षणेतर कर्मचारियों के साथ एनआईआरएफ रैंकिंग के विषय में चिंतन और मनन करने के लिए बैठक की। ऐसे ही प्रयासों को आगे बढ़ा कर एक सार्थक दिशा देने की जरूरत है, जिससे आगे आने वाले समय में इविवि की रैंकिंग में सुधार हो सके।

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