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यूपी में डेंगू का कहर जारी, राजधानी में मिले 10 नए मरीज

लखनऊ: प्रदेश डेंगू का कहर तेजी से बढ़ रहा है. बड़ी संख्या में लोग बुखार व डेंगू की चपेट में आ रहे हैं. बुधवार को 10 लोगों में डेंगू  की पुष्टि हुई है. इन मरीजों की जांच कार्ड तकनीक से हुई है. एलाइजा जांच के लिए नमूने स्वास्थ्य विभाग की स्टेट लैब में भेजे गए हैं. डॉक्टरों ने गुरुवार को रिपोर्ट आने की उम्मीद जाहिर की है.

अब तक 80 से ज्यादा लोगों में एलाइजा के माध्यम से डेंगू की पुष्टि हो चुकी है. बुखार पीड़ित व डेंगू मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. बुधवार को लोकबंधु अस्पताल की ओपीडी में 30 से ज्यादा बुखार पीड़ित पहुंचे. लक्षण के आधार पर 10 लोगों की डेंगू कार्ड तकनीक से जांच कराई गई. इसमें पांच में डेंगू की पुष्टि हुई है. इसी तरह बलरामपुर और सिविल में दो-दो मरीज कार्ड जांच में डेंगू पॉजिटिव पाए गए हैं. महानगर भाऊराव देवरस और रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल की ओपीडी में भी 50 से अधिक बुखार पीड़ित पहुंचे. एक मरीज कार्ड जांच में पॉजिटिव पाया गया है. अब इनके नमूने एलाइजा जांच के लिए स्टेट लैब में भेजा जाएगा.

लोकबंधु अस्पताल में नौ डेंगू के मरीज भर्ती किए गए हैं. इनमें पांच बच्चे हैं. चार बड़े लोग हैं. अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी के मुताबिक अब तक 10 बेड का डेंगू वार्ड बनाया गया था. मरीजों की संख्या के मद्देनजर बेड की संख्या बढ़ा दी गई है. अब 22 बेड पर डेंगू वार्ड कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि सभी भर्ती मरीजों की एलाइजा जांच कराई जा रही है. सभी मरीजों की तबीयत खतरे से बाहर है. सिविल में कार्ड जांच के बाद पॉजिटिव आए एक मरीज को भर्ती किया गया है. बलरामपुर में दो मरीज भर्ती किए गए. इन सभी की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव है.

डेंगू के प्रभावी नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार घरों में जाकर जांच करा रही है. डिप्टी सीएमओ डॉ. केपी त्रिपाठी के मुताबिक विकासनगर-2 का भ्रमण किया गया. 1102 घरों की जांच की गई. इसमें 37 घरों में डेंगू मच्छर के लार्वा मिले हैं. इन सभी को नोटिस जारी की गई है. विकासनगर-2 के वीमार्ट की पार्किग में मच्छरजनित स्थितियां पाये जाने पर नोटिस जारी किया गया.

‘आउटसोर्स महिला कर्मचारियों को मिलना चाहिए प्रसूति अवकाश’

पीजीआई में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को प्रसूति अवकाश के बाद लौटने पर नौकरी ज्वॉइन नहीं कराया जा रहा है. इससे महिला कर्मचारियों में खासी नाराजगी है. आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि अधिकारी उत्पीड़न कर रहे हैं. पीजीआई में सैकड़ों की संख्या में आउटसोर्सिंग महिला कर्मचारी हैं. इसमें नर्सिंग, टेक्नीशियन, वार्ड आया समेत दूसरे पदों पर महिला कर्मचारी तैनात हैं. नियमानुसार महिला कर्मचारी को प्रसूति अवकाश मिलना चाहिए, लेकिन पीजीआई में नियमों की अनदेखी की जा रही है. प्रसूति अवकाश के बाद लौटी महिला कर्मचारियों को नौकरी ज्वॉइन कराने में अफसर आनाकानी कर रहे हैं. कई नर्सेज का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है.

नर्सेज का कहना है कि मातृत्व के अवकाश देना एक वैधानिक प्रक्रिया है. हम लोग आउटसोर्स कर्मी हैं. बेहद कम वेतन पर काम कर रहे हैं. अफसर हमारी मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं. ड्यूटी ज्वाइन कराने के बजाए दौड़ाया जा रह है. आउटसोर्स नर्सेज की मलखान साधना सहित तमाम आउटसोर्स कर्मचारियों का आरोप है कि ड्यूटी न मिलने से नवजात का पालन पोषण का संकट खड़ा हो गया है. प्रसूति अवकाश पर रहने के कारण वेतन भी नहीं मिला. ऐसे में रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. नर्सेज एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा शुक्ला का कहना है कि पूराने आउटसोर्स महिला कर्मचारियों को प्रसूति अवकाश मिलना चाहिए. छुट्टी से लौटने के बाद उन्हें नौकरी ज्वाइन कराई जाए. नए लोगों को रखना कोई विकल्प नहीं है.

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