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शबनम के बेटे की पहचान सार्वजनिक करना गलत: राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग

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लखनऊ: रामपुर की जेल में बंद बामन खेड़ा में 7 हत्याओं के आरोपी शबनम को कोर्ट के द्वारा मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है. पिछले दिनों उसके 12 वर्षीय बेटी से रामपुर जेल में मुलाकात हुई तो फिर बेटे ने भी अपनी मां की माफी के लिए एक अपील की थी. हालांकि मीडिया चैनलों और अखबारों ने भी बेटे की पहचान को सार्वजनिक किया था. जिस पर राज्य बाल संरक्षण आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है. इस मामले को लेकर अब राज्य बाल संरक्षण आयोग के तरफ से ऐसा करने वाले लोगों को नसीहत दी गई है.
बता दें जब शबनम मुरादाबाद जेल में थी तभी 2008 में बेटा पैदा हुआ और 6 साल तक उसके साथ रहा, लेकिन बाद में चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी की तरफ से बेटे को शबनम के नजदीकी को सौंप दिया गया. अब बेटा 12 साल का हो चुका है, लेकिन इस तरह के मामलों में बेटे की पहचान उजागर करना पूर्णतया गलत है.

बेटे की पहचान को सार्वजनिक करना गलत है

रामपुर की जेल में बंद बामन खेड़ी कांड की आरोपी है. अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर शबनम ने परिवार के साथ हत्याओं को अंजाम दिया था. जिसके बाद उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई गई. शबनम कोर्स मथुरा जेल में फांसी दी जाएगी. अभी पिछले दिनों शबनम की 12 वर्ष की बेटी ने रामपुर जेल में उनसे मुलाकात की थी और फिर सोशल मीडिया के माध्यम से एक अपील भी की थी. बेटे ने अपने हाथों में एक तख्ती लेकर मां को माफ करने के लिए राज्यपाल और राष्ट्रपति से गुहार भी लगाई, लेकिन इस मामले की खबर को समाचार पत्रों और चैनलों में भी बेटे की तस्वीर के साथ सार्वजनिक किया था. जिस पर राज्य बाल संरक्षण आयोग ने नाराजगी जताई है. आयोग की अध्यक्ष डॉ. विशेष गुप्ता ने बताया कि ऐसा करना गलत है क्योंकि शबनम को सजा हो चुकी है और उससे उसकी बेटे जोड़कर पहचान सार्वजनिक करना पूर्णतया गलत है.

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