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मैं जीवन की अंतिम सांस तक समाज की प्राणवायु ‘शिक्षा’ के विकास व प्रचार – प्रसार के लिए समर्पित रहूँगा – ज्ञानेंद्र मनीषी

आज के नवनिर्वाचित प्रबंधक ज्ञानेंद्र मनीषी।

लोकेश त्रिपाठी – आज दिनांक 7 फरवरी 2021 दिन रविवार को पूर्वान्ह 11:00 बजे महर्षि शांडिल्य प्रशिक्षण संस्थान गौरीगंज की संचालक सोसायटी “श्री मनीषी शैक्षिक एवं सामाजिक कल्याण समिति” की प्रबंध समिति के लिए साधारण सभा की चुनावी बैठक गौरीगंज शहर स्थित इंदिरा गांधी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज के सेमिनार हाल में संपन्न हुई । जिसमें डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय द्वारा नामित पर्यवेक्षक प्रोफेसर अजय प्रताप सिंह की उपस्थिति में और चुनाव अधिकारी एडवोकेट – अनिल प्रकाश श्रीवास्तव की देखरेख में आज का यह चुनाव संपन्न हुआ। आज के इस चुनाव में पूर्व में कार्य कर रही प्रबंध समिति के कार्यों से संतोष व्यक्त करते हुए सभी उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से फिर से उसी प्रबंध समिति को कार्य करने का मौका देते हुए श्री ज्ञानेंद्र मनीषी को पुनः प्रबंधक निर्वाचित किया । वर्तमान प्रबंध कारिणी में श्री रमापति शुक्ल ‘अध्यक्ष’ श्री शोभनाथ यादव ‘उपाध्यक्ष’ श्री योगेंद्र शुक्ला ‘उप-प्रबंधक’ श्री रमेश तिवारी ‘कोषाध्यक्ष’ श्री विजय किशोर तिवारी, श्री प्रमोद कुमार शुक्ल तथा श्री राकेश मणि तिवारी सदस्य के रूप में चुने गए । उक्त अवसर पर उपस्थित कई संस्थाओं के संस्थापक एवं प्रख्यात शिक्षाविद श्री जगदंबा प्रसाद त्रिपाठी “मनीषी” ने अपने संबोधन में “शिक्षा को मानव सभ्यता के विकास का मेरु दंड बताते हुए कहा कि “राष्ट्रीय से लेकर स्थानीय स्तर तक की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना प्राथमिक आवश्यकता है और इसके लिए शिक्षा पहली जरूरत है” । बैठक के समापन में सब के प्रति आभार व्यक्त करते हुए ज्ञानेंद्र मनीषी जी ने अपना संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि – साधारण सभा लोकतांत्रिक पद्धति से प्रबंधक का चुनाव करती है इसी के साथ हुआ यह अपेक्षा करती है कि जैसे प्रधानमंत्री देश को चलाते हैं और देश को विकास के पथ पर आगे ले जाते हैं ठीक वैसे ही शिक्षा के क्षेत्र में प्रबंधक संस्था को आगे लेकर चले मुझे इस बात की खुशी है की साधारण सभा के सभी सदस्यों ने एक बार पुनः मुझ पर विश्वास जताया है इसलिए मैं पूरी कोशिश करूंगा कि मैं उस की कसौटी पर खरा उतरूं। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि “मैं जीवन की अंतिम सांस तक समाज की प्राणवायु ‘शिक्षा’ के विकास व प्रचार – प्रसार के लिए समर्पित रहूँगा”।

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