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कछौना में धड़ल्ले से संचालित अवैध अस्पतालों की मनमानी, मरीजों की जेब पर खुलेआम डाल रहे डाका

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रिपोर्ट: एस.बी.सिंह सेंगऱ


कछौना (हरदोई)। कोरोना संक्रमण व डेंगू के बढ़ते प्रकोप के बीच नगर में स्वास्थ्य विभाग की लेनदेन रीति व खाऊकमाऊ नीति के चलते धड़ल्ले से संचालित मानकविहीन व अवैध अस्पतालों, क्लीनिक, पैथोलॉजी/डायग्नोस्टिक सेंटरों और झोलाछाप डाक्टरों की अंधेरगर्दी चरम सीमा पर पहुंच रही है। नगर में लखनऊ-हरदोई राजमार्ग, गौसगंज रोड, स्टेशन रोड, गाजू रोड, हथौड़ा रोड व सुठेना रोड सहित आवासीय भवनों व ग्रामीण क्षेत्रों में नियमों को ताकपर रखकर कुकुरमुत्ते की तरह उगे दर्जनों अवैध/गैर पंजीकृत/मानकविहीन अस्पताल, नर्सिंग होम, मैटरनिटी सेंटर, पैथोलॉजी/डायग्नोस्टिक लैब, क्लीनिक संचालित हैं। जोकि कई लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हुए उन्हें मौत की नींद सुला चुके हैं।

इन कथित अस्पतालों में ना तो कोई एमबीबीएस डाक्टर मौजूद रहता है और ना ही जैव अपशिष्ट/प्रदूषण प्रबंधन की कोई ठोस व्यवस्था होती है। इन प्राइवेट अस्पतालों के संचालक मरीजों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालते हुए उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते हैं।मोटी रकम वसूलने की चाहत में अस्पतालों के संचालक मानकों को ताकपर रखकर मरीजों को कई दिनों तक बेवजह एडमिट रखते हुए ईलाज करते हैं जिससे क्षेत्र के कई लोग अपनी जान से हाथ धो चुके हैं। इन अस्पतालों व नर्सिंग होम क्लीनिक के संचालक गांव/कस्बे में अपने एजेंट लगाकर मरीजों को अपने यहां एडमिट कराने का कार्य करते हैं, साथ ही स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशा बहुओं का सहारा लेकर उन्हें अच्छा खासा कमीशन देते हुए मरीजों को बेहतर ईलाज का लॉलीपॉप देकर अस्पताल में भर्ती कराते हैं।

मरीज के अस्पताल में भर्ती होने के बाद आशा बहुएं व एजेंट अपना कमीशन लेकर चलते बनते हैं फिर उन्हें ना तो मरीज के साथ कोई हमदर्दी होती है और ना ही कोई सरोकार। अस्पतालों व पैथोलॉजी लैब में ईलाज/जांच से संबंधित रेट डिस्प्ले ना होने की वजह से ये संचालक मरीज से मनमाफिक वसूली करने के साथ साथ अपनी मनमानी पर भी उतारू रहते हैं वहीं मरीज भी अपने अधिकारों की जानकारी के अभाव में संचालकों के हाथों लुटता रहता है। इन अस्पतालों में मरीज के ऊपर अपने यहां संचालित या किसी खाश दुकान से दवा लेने व किसी विशेष पैथोलॉजी से ही जांच कराने का भी दबाव बनाया जाता है जिसमें संचालकों का मोटा मुनाफा बनता है।मरीज को डिस्चार्ज करते समय ईलाज से संबंधित रिपोर्ट, बिल आदि देने में भी आनाकानी करते हैं। पूर्व में कई बार पीड़ितों द्वारा संबंधित विभाग व अधिकारियों को शिकायतें की गई लेकिन इन संचालकों के रसूख व पहुंच के चलते महज खानापूर्ति कर शिकायत को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

ताजा मामला कछौना नगर में लखनऊ हरदोई राजमार्ग पर एफसीआई गोदाम के पास संचालित एन.बी.हॉस्पिटल से जुड़ा हुआ है जो पूर्व में उपरोक्त कई मामलों को संलिप्त रहने के साथ एक बार फिर चर्चा में है। जहां दिनांक 30 अक्टूबर को कछौना के इमलीपुर निवासी शरद मिश्रा ने अपने चाचा हरिशरण मिश्रा को तेज बुखार व उल्टी की शिकायत पर ईलाज हेतु उक्त अस्पताल में भर्ती कराया। शरद के कथनानुसार एनबी हास्पिटल में अप्रशिक्षित/झोलाछाप डाक्टरों द्वारा ईलाज किया गया। डेंगू की जांच के लिए ब्लड का सैंपल लेकर नगर में संचालित एक प्राइवेट पैथोलॉजी भेजा गया। तत्पश्चात जांच में डेंगू दर्शाकर पांच से छह दिन तक ईलाज किया गया। जिसके लिए तीन बार में कुल मिलाकर 47370 रूपये भी जमा कराए गए।

अस्पताल द्वारा कथित बेहतरीन ट्रीटमेंट करने के बाद भी पेशेंट की हालत में कोई सुधार ना होने के कारण शरद द्वारा पूछने पर अस्पताल प्रबंधन ने ईलाज आदि का विवरण देने से साफ मना कर दिया।शरद ने जब पेशेंट को डिस्चार्ज कराने के साथ बिल की मांग की तो अस्पताल के संचालक/प्रबंधक गुंडागर्दी पर उतारू हो गए। शरद से अभद्रतापूर्ण व्यवहार करते हुए पेशेंट को डिस्चार्ज करने से मना कर दिया। मामले में कुछ स्थानीय लोगों द्वारा हस्तक्षेप करने पर उक्त अस्पताल द्वारा सिर्फ 17370 रूपये का बिल थमाकर गालीगलौज करते हुए भगा दिया गया।शरद ने अस्पताल प्रबंधन पर अवैध वसूली, गुंडई, गालीगलौज करने समेत अन्य कई आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री व जिलाधिकारी हरदोई को अपनी शिकायत प्रेषित कर अस्पताल के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्यवाई करने की मांग की है। शरद का कहना है कि संबंधित विभाग द्वारा दोषियों पर उचित कार्यवाई ना करने की दशा में वो न्यायालय की भी शरण लेंगे जिससे ऐसे अस्पताल प्रबंधन की मनमानी पर अंकुश लग सके। वहीं इस संबंध में जिले के सीएमओ व स्थानीय सीएचसी अधीक्षक का कहना है कि शिकायत व जांच में दोषी पाए जाने पर उक्त अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध कठोर कार्यवाई की जाएगी।

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