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श्रीराम एयरपोर्ट भूमि अधिग्रहण: मुआवजे पर किसानों ने जताया असंतोष, दी इच्छामृत्यु की चेतावनी

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अयोध्या: रामनगरी में श्रीराम एयरपोर्ट के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों ने स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. किसानों का कहना है कि एसडीएम सदर द्वारा उन्हें जबरदस्ती जमीन अधिग्रहित करने की चेतावनी दी जा रही है. किसानों ने उचित मुआवजा न मिलने पर अपनी जमीन श्रीराम एयरपोर्ट के लिए ना देने की बात कही.

ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन उनके साथ जबरदस्ती करेगा तो वह इच्छा मृत्यु की मांग करेंगे. किसानों के विरोध का समाजवादी पार्टी ने भी समर्थन किया है. पूर्व वन राज्यमंत्री तेज नारायण पांडे ने कहा है कि अगर ग्रामीणों और किसानों के साथ भूमि अधिग्रहण को लेकर किसी भी तरीके की जबरदस्ती की जाती है तो सपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतर कर इसका विरोध करेंगे.

सर्किल रेट में भारी अंतर होने के कारण ग्रामीणों ने जमीन देने से किया इनकार

श्रीराम एयरपोर्ट के विस्तार को लेकर जिला प्रशासन की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं. श्रीराम एयरपोर्ट के आसपास के गांव जनौरा, नंदापुर और धर्मपुर के किसानों की जमीन का अधिग्रहण शुरू हो गया है. लेकिन धर्मपुर गांव के किसानों ने सर्किल रेट में भारी अंतर होने के कारण जमीन देने से इनकार कर दिया है. इसे लेकर गांव वालों का कहना है कि एयरपोर्ट बनना चाहिए. इसके लिए सरकार जमीन भी ले ले लेकिन पड़ोसी गांव जनौरा, नंदापुर के समानांतर का सर्किल रेट दिया जाए. किसानों का कहना है कि समान कार्य के लिए समान मुआवजा दिया जाए.

समाजवादी पार्टी ने किया समर्थन

इन सारी समस्याओं को लेकर धर्मपुर के 10 से अधिक किसान बुधवार को समाजवादी पार्टी कार्यालय पहुंचे. किसानों ने कहा कि अगर जिला प्रशासन जबरदस्ती जमीन अधिग्रहित करता है तो वह आत्मदाह कर लेंगे. वहीं पूर्व राज्यमंत्री और सपा नेता तेज नारायण पाण्डेय ने कहा कि धर्मपुर के किसानों की लड़ाई अब समाजवादी पार्टी लड़ेगी. सपा धर्मपुर गांव के किसानों को न्याय दिलाएगी. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर पड़ोसी गांव जनौरा और नंदापुर में किसानों को 80 लाख मिल रहा है तो बगल के ही गांव धर्मपुर में उसके समानांतर 8 लाख क्यों?

सर्किल रेट में है अंतर

बता दें कि अयोध्या के जनौरा और नंदापुर गांव में सर्किल रेट अधिक है, जिसके चलते वहां के किसानों को अधिक मुआवजा मिल रहा है. वहीं जनौरा के समानांतर धर्मपुर गांव के सर्किल रेट में भारी अंतर है. किसानों की मांग है कि धर्मपुर और जनौरा गांव के बीच अधिक अंतर नहीं है जबकि मुआवजे की राशि में लगभग 50% का अंतर हो रहा है. इसके चलते धर्मपुर के किसान कम कीमत पर अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं.

क्या कहते हैं किसान

धरमपुर गांव के निवासी किसान रामलौट तिवारी ने कहा कि उनके गांव के किसानों को भूमि अधिग्रहण का उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है. एसडीएम सदर द्वारा शासन के निर्देशों पर सहमत ना होने पर जबरन किसानों से जमीन लेने की बात कही जाती है. रामलौट ने बताया कि वह श्रीराम एयरपोर्ट बनाने के विरोध में नहीं है लेकिन अपनी जमीन का उचित मुआवजा चाहते हैं. अगर उनके साथ जबरदस्ती की जाती है तो वह इच्छा मृत्यु की मांग करेंगे.

वहीं ग्रामीण वीरेंद्र कुमार तिवारी का कहना है कि उन्हें पास की जमीन से सर्किल रेट से 8 गुना कम मुआवजा दिया जा रहा है. वह एयरपोर्ट के विकास के विरोध में नहीं हैं लेकिन इस तरह का नुकसान उनमें सहन करने की क्षमता नहीं है. गांव में छोटे छोटे किसान हैं, उनकी जमीन जाने पर उन्हें दोबारा खेती की व्यवस्था के लिए जमीन लेनी पड़ेगी. ऐसे में कम मुआवजा मिलने से वह दोबारा खेती के लिए जमीन की व्यवस्था नहीं कर पाएंगे.

धरमपुर गांव निशा निवासी राम बक्श का कहना है कि जनौरा में जिस जमीन का 75 लाख रुपये मुआवजा मिल रहा है धर्मपुर गांव में उतनी ही जमीन का महज 8 लाख रुपये दिया जा रहा है. गांव के छोटे काश्तकार यहां की जमीन जाने से विस्थापित हो जाएंगे. ऐसे में शासन को उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की राशि पर निर्णय लेना चाहिए.

मैं अयोध्या में श्रीराम एयरपोर्ट के विकास के पक्ष में हूं, लेकिन किसान और मजदूरों का नुकसान नहीं होना चाहिए. शासन को इस बात का ध्यान रखना चाहिए. अगर किसानों के साथ जबरदस्ती होगी तो समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर कर इसका विरोध करेंगे.
-तेज नारायण पांडेय, पूर्व वन राज्यमंत्री

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