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होटल इंडस्ट्री को राहत पैकेज की दरकार

लखनऊ। कोरोना के चलते हुए अब तक चल रहे लॉकडाउन से राजधानी लखनऊ में टूरिज्म इंडस्ट्री एकदम ठप्प सी पड़ गई है जिसकी वजह से होटल इंडस्ट्री को भी भारी नुकसान पहुंचा है। यह कहना है कि प्रदेश की राजधानी स्थित प्रमुख छोटे-बडेÞ होटल संचालकों का। उनके मुताबिक कोरोना के शुरूआती दौर से ही पूरे शहर में 18 मार्च से बंद डेढ़ सौ से ज्यादा होटल अचानक इनकम बंद होने से बर्बादी की कगार पर आकर खड़े हो गए हैं। ऐसे में होटल संचालकों ने सरकार से राहत पैकेज की मांग की है।

होटल संचालकों का कहना है कि, अगर सरकार ने इन विषम परिस्थिति में उनका साथ नहीं दिया तो, होटल इंडस्ट्री दम तोड़ देगी। सरकार ने जीएसटी और बिजली बिलों में कोई कटौती नहीं की है। एक अनुमान के मुताबिक राजधानी लखनऊ में ठीक-ठाक स्थिति वाले डेढ़ सौ से ज्यादा होटल हैं। यहां हर महीने 15 से 20 करोड़ का कारोबार होता था, लेकिन कोरोना काल के चलते सब बंद पड़े है। हालात ये हो गए हैं कि, होटल का मिनिमम मेंटिनेंस जैसे बिजली बिल और कर्मचारियों को पगार देना ही पड़ रहा है जिसके कारण होटल संचालकों को भारी नुकसान हो रहा है।

वहीं गोमतीनगर और चारबाग इलाके के होटल संचालकों की मानें तो लघु और मध्यम वर्ग के उद्योगों को सरकार ने राहत देने की घोषणा की है। लेकिन होटल इंडस्ट्री के बारे में सरकार ने अपना रुख साफ नहीं किया है। वहीं होटल इंडस्ट्री की देन दारियों पर कोई रियायत देने की घोषणा नहीं की गई है। होटा संचालकों ने सरकार से यह अपेक्षा की है कि राहत की कड़ी में ज्यादा कुछ नहीं तो कम से कम नगर निगम टैक्स व बिजली बिल में तो जायज कटौती की जा सकती है। राजधानी के कई होटल संचालकों का कहना है कि, अगर यही हाल रहा तो होटल इंडस्ट्री बंद हो जाएगी और हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

Saurabh Bhatt

सौरभ भट्ट पिछले दस सालों से मीडिया से जुड़े हैं। यहां से पहले टेलीग्राफ में कार्यरत थे। इन्हें कई छोटे-बड़े न्यूज़ पेपर, न्यूज़ चैनल और वेब पोर्टल में रिपोर्टिंग और डेस्क पर काम करने का अनुभव है। इनकी हिन्दी और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छी पकड़ है। साथ ही पॉलिटिकल मुद्दों, प्रशासन और क्राइम की खबरों की अच्छी समझ रखते हैं।

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