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शिकायती तहरीर पर कार्रवाई के बदले दोनों पक्षों से रुपए लेकर मामला रफा-दफा करने का पीड़ित ने पुलिस पर लगाया आरोप

पिहानी/हरदोई। कोतवाली पिहानी के हल्का नम्बर 02 ग्राम मझिया से जुड़ा एक ऐसा हैरत अंगेज़ मामला प्रकाश में आया है जिसका सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो ईमानदार पुलिस की छवि को भी शर्मसार कर रहा है। ज्ञात हो कि कोतवाली पिहानी के हल्का नम्बर 02 ग्राम मझिया निवासी एक पीड़ित युवक प्रमोद कुमार पुत्र बहोरन लाल ने कोतवाली पिहानी की तत्कालीन हल्काई पुलिस दरोगा वीर प्रताप सिंह, गिरजा शंकर और शुभम् सिपाहियों पर ये आरोप लगाया है कि जब 21अप्रैल 2020 को रात्रि समय गांव के ही चार व्यक्तियों ने उसे मारा पीटा था तो वह 22 अप्रैल को कोतवाली पिहानी में रिपोर्ट लिखाने गया था।

वहाँ लिखित शिकायती प्रार्थना-पत्र देते ही हल्का सिपाही गिरजा शंकर को बुलाकर मामले की तफ्तीश हेतु पीड़ित की तहरीर दे दी गई।तहरीर मिलते ही उपरोक्त सिपाही व शुभम् सिपाही और दरोगा वीर प्रताप सिंह ने पीड़ित का मुकदमा पंजीकृत कराने के नाम पर उससे तीन हजार 3000/ रुपए माँगे।पीड़ित का कहना है जब व्यवस्था हो पाई तो पुलिस के उपरोक्त तीनों लोकसेवकों को उसने तीन हजार रुपए दिए। आरोप ये भी है कि जब रुपए दिए दो दिन गुजर गए और पीड़ित की शिकायत पर कोई सुनवाई या अग्रिम कार्रवाई नहीं हुई तो वह परिवार सहित कोतवाली प्रभारी सूर्य प्रकाश शुक्ला से मिला और अपना दर्द बयान किया। तो उन्होंने दरोगा वीर प्रताप सिंह को बुलाकर मामले की शिकायत पर कार्रवाई करने को कहा उनके सामने उक्त हल्काई दरोगा ने “जी सर कहकर” मामला पुनः अपने अधीन कर लिया।

कोतवाली प्रभारी के कहने पर भी विपक्षी गणों पर दरोगा वीर प्रताप सिंह ने कोई कार्रवाई नहीं की बल्कि उल्टा उस पीड़ित पर ही सुलह समझौता करने का दबाव बनाया गया। तब एक दिन मझिया गाँव के प्रधान ने पीड़ित को दूराभाष पर बताया कि विपक्षी गणों से भी हल्काई पुलिस उपरोक्त सिपाहियों व दरोगा ने रुपए ले लिए हैं इसलिए अब आपके मामले में कार्रवाई होना मुश्किल है। जिसके बाद हल्का सिपाही गिरजा शंकर ने दूरभाष पर पीड़ित को बताया कि दरोगा (वीर प्रताप सिह) मुकदमा लिखने को तैयार नहीं हुए रुपए उन्हीं के पास हैं जब कोतवाली आना वापस दिला देंगे।

अगले ही दिन जब पीड़ित अपने सिर में लगी चोट का डाॅक्टरी परीक्षण कराने हेतु घर से निकला तो सिपाही से दूराभाष पर कोतवाली आकर रुपए वापसी लेने के बावत पूछा तो सिपाही गिरजा शंकर ने कहा कि रुपए दरोगा जी के पास हैं वो कुल्हावर गाँव गए हैं आप आ जाओ दरोगा जी से मिल लो। इस तरह पीड़ित का कहना है कि हमने कई चक्कर लगाए मगर सिपाही दरोगा के बीच फँसे तीन हजार रुपए उसे वापस नहीं मिले।

पीड़ित को मलाल इस बात का है कि शिकायती तहरीर पर न ही न्यायोचित कार्रवाई हुई और न हीं कोई एफआईआर या एनसीआर वगैरा लिखी गई।बल्कि हल्का पुलिस के उप निरीक्षक दरोगा-सिपाहियों ने मिलकर मुकदमा लिखने के नाम पर उल्टा उससे से ही रुपए लेकर मानो जले पर नमक छिड़ककर उसकी पीड़ा को दुगुना कर दिया। इस बात से आहत होकर उसने 30 अप्रैल 2020 को मुख्यमंत्री पोर्टल पर और उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर अपनी पीड़ा पर फरियाद सुनाई और दुष्ट पुलिस लोकसेवकों की भृष्ट कार्यशैली की शिकायत की।मगर कार्रवाई आज तक लम्बित पड़ी है। ये कैसी विडम्बना है जहाँ पीड़ित त्रस्त है और आरोपी मस्त हैं। अब तो बंद हो।

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