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पीजीआई शिफ्ट किये गये गायत्री प्रजापति, HC में केजीएमयू की रिपोर्ट के बाद फैसला

लखनऊ। रेप के मामले में जेल में बंद और बीमारी के कारण केजीएमयू में इलाज करा रहे पूर्व मंत्री गायत्री प्रज्ञापति की कोराना संक्रमण की आशंका से अस्पताल बदलने की अर्जी हाईकोर्ट ने स्वीकार कर ली है। इस पर सुनवाई के दौरान केजीएमयू प्रशासन ने हाईकोर्ट में अपने यहां कोरोना संक्रमण के ख़तरे से इंकार नहीं किया था। केजीएमयू की रिपोर्ट के बाद गायत्री प्रजापति को एसजीपीजीआई शिफ्ट कर दिया गया है।

बता दें कि पूर्व मंत्री की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जमानत अर्जी दी गई है। इसमें दलील दी गई है कि वे जिस वार्ड में भर्ती हैं, वहां से कोरोना वार्ड की दूरी ज्यादा नहीं है। लिहाजा उनको कोरोना इंफेक्शन का खतरा है। इसको देखते हुए उन्हें बाहर बेहतर इलाज करवाने के लिए जमानत दी जाए।

इस मामले में हाईकोर्ट ने केजीएमयू से पूछा था कि क्या गायत्री को केजीएमयू में कोरोना इंफेक्शन होने का ख़तरा है? इस पर हाईकोर्ट में केजीएमयू की ओर से दी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्‍पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज होता है। इसलिए यहां भर्ती या आने जाने वाले किसी भी मरीज को कोरोना संक्रमण का खतरा अधिक है।

केजीएमयू की इस रिपोर्ट पर जस्टिस अनिल कुमार ने सरकारी वकील से 4 जून तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है.बता दें रेप के मामले में मार्च 2017 से गायत्री प्रजापति जेल में बंद हैं। यहां से वह इलाज के लिए जेल से केजीएमयू में भर्ती थे। केजीएमयू की इस रिपोर्ट पर जस्टिस अनिल कुमार ने सरकारी वकील से 4 जून तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।

अब गायत्री को पीजीआई शिफ्ट कर दिया गया है। बता दें कि पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की एक जमानत अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है। अब उनकी ओर से कोरोना के ख़तरे को लेकर दूसरी ज़मानत अर्ज़ी दाखिल की गई है। पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति मार्च 2017 से रेप के मामले में जेल में बंद हैं।

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