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इस बार चल रहा है विश्व पर्यावरण सप्ताह

लोकेश त्रिपाठी अमेठी-

वैसे तो विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया जाता है लेकिन इसके लिए कोई एक दिन निश्चित नहीं होना चाहिए यह साल के 365 दिन हमें पर्यावरण के प्रति सजग एवं लोगों को जागरूक करते रहना चाहिए इसी के साथ कम से कम इसको 1 सप्ताह मनाना चाहिए और कहीं-कहीं पर यह पर्यावरण सप्ताह मनाया भी जाता है ऐसे में विश्व पर्यावरण दिवस के दिन जहां पर विद्या भारती काशी प्रदेश के मंत्री व अटल ग्रामीण विकास संस्थान के सदस्य अनुग्रह नारायण ने समाज के अग्रणी भूमिका निभाने वाले विभिन्न किरदारों से मिलकर पौधों का वितरण किया और समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का संकल्प भी 5 महानुभावों को दिलवाया अनुग्रह नारायण ने अमेठी जनपद में निवास कर रहे एडवोकेट संतोष शर्मा, एडवोकेट व अध्य्क्ष सरस्वती विद्या मंदिर ग्राम भारती उमा शंकर पांडेय , अध्यक्ष सरस्वती शिक्षा मंदिर ग्राम भारती गोविंद सिंह चौहान, प्रबन्धक सरस्वती शिक्षा मंदिर ग्राम भारती ओंकारनाथ शुक्ल अध्यक्ष सरस्वती विद्या मंदिर फ़त्तेपुर तिलोई धर्मेश मिश्रा को पौधे वितरित कर पर्यावरण दिवस के संकल्प को समाज में और फैलाने के लिए आवाहन किया और संकल्प दिलवाया की आप लोग भी कम से कम 5 लोगों को पर्यावरण सुरक्षित रखने का संकल्प दिलवाएं।

अनुग्रह नारायण ने बताया कि आज को कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में पूरे विश्व में लॉक डाउन लॉक डाउन चलने के कारण पर्यावरण को अत्यंत लाभ मिला है जो कि शायद शायद प्रकृति ने अपने आप ही विश्व से छीन कर कर प्रकृति को ठीक करने का फैसला किया। जिससे आज के समय का पर्यावरण बेशक से कुछ दिनों के लिए ही सही किंतु वह स्वच्छ और स्वस्थ हवा हम सभी के जीवन को मुहैया करा रहा है।

मानव जीवन प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित है। हजारों वर्षों से हम प्रकृति पर आश्रित है पर पिछले कुछ दशकों से हमने आवश्यकता से अधिक प्राकृतिक सम्पदा का दोहन शुरू कर दिया।बड़े पैमाने में औद्योगीकरण और शहरीकरण किया गया। जिसके परिणामस्वरूप इस पृथ्वी के वातावरण में अनेक परिवर्तन हुए, जैसे तापमान में बढोत्तरी, ओजोन परत में छेद होने के साथ ही बाढ़ और सूखे जैसी समस्याओं का बढ़ना है. Nature अर्थात प्रकृति के बिना मानव जीवन संभव नहीं है। ऐसे में हमें इस प्रकृति का  संरक्षण करना चाहिए। प्रकृति के इसी महत्त्व को देखते  हुए हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है जिसके माध्यम से प्रकृति के प्रति लोगों को जागरुक करने का प्रयास किया जाता है। किंतु इस बार से 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस नहीं बल्कि 5 जून से विश्व पर्यावरण सप्ताह मनाए जाने की शुरुआत मेरे द्वारा की गई है।

हर साल पर्यावरण दिवस को मनाने के लिए एक थीम रखी जाती है। इस वर्ष पर्यावरण सप्ताह की थीम है – टाइम फॉर नेचर’ अर्थात प्रकृति के लिए समय और बायोडायवर्सिटी। इसके माध्यम से जीवन के लिए जैव विविधताओं के महत्व पर ध्यान केंद्रित करना है । हमारे  लगातार दोहन से प्रकृति की स्थिति लगातार ख़राब हुई है। ऐसे में हमें कुछ ऐसे तरीके अपनाने चाहिए, जिससे हम पर्यावरण की रक्षा में योगदान दे सकें। हम आज कुछ तरीके बताएँगे कि आप कैसे पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं।

प्लास्टिक का प्रयोग न करें – 

आज के समय में प्लास्टिक सबसे अधिक पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है। प्लास्टिक की वजह से कितने ही जीव आज विलुप्त होने की कगार में है। समुद्री जीवों को भी प्लास्टिक ने बहुत अधिक नुकसान पहुँचाया है। कछुए, मछली, सीबर्ड और अन्य जीव जन्तुओं को इसका सामना करना पड़ रहा  है।

बारिश के पानी का संग्रह – 

आज के समय में मनुष्यों के लिए सबसे बढ़ी समस्या पानी है। लगातार पानी की कमी हो रही है। कई देशों में तो पानी न के बराबर रह गया है। ऐसे में बारिश के पानी का संरक्षण करना चाहिए।

कोयले की जगह अन्य एनर्जी सोर्स से बनायें बिजली – 

कोयले से बिजली बनाने में कार्बन डाईऑक्साइड और निट्रस ऑक्साइड गैस प्रकृति में मिल जाती है। इसलिए हमें कोशिश करना चाहिए कि हम बिजली बनाने में सौर्य ऊर्जा, पवन चक्की और अन्य सोर्स की मदद लें। 

अधिक से  अधिक पौधें लगाना – 

पौधे प्रकृति के लिए  बहुत जरुरी है । यह पर्यावरण की हवा को शुद्ध करने के साथ ही तापमान को भी स्थिर रखने में मदद करते हैं। साथ ही ओक्सीजन का सोर्स भी है। जिसके बिना मनुष्य जिन्दा नहीं रह सकता है। यदि हम इन छोटी-छोटी बातों को भी ध्यान में रखें तो हम अपने समाज को अपने देश को और सुंदर विश्व को एक बहुत ही स्वच्छ स्वस्थ एवं समृद्ध पर्यावरण प्रेमी विश्व का निर्माण कर सकते हैं।

Lokesh Tripathi

पूरा नाम - लोकेश कुमार त्रिपाठी शिक्षा - एम०ए०, बी०एड० पत्रकारिता अनुभव - 6 वर्ष जिला संवाददाता - लाइव टुडे न्यूज़ चैनल एवं हिंदी दैनिक समाचारपत्र "कर्मक्षेत्र इंडिया" उद्देश्य - लोगों को सदमार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना। "पत्रकारिता सिर्फ़ एक शौक" इच्छा - "ख़बरी अड्डा" के माध्यम से "कलम का सच्चा सिपाही" बनना।

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