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मार्च में की गई, देश में तालाबंदी क्या वैध थी?

नरेश दीक्षित-समर विचार


24 मार्च 2020 को देश में तालाबंदी घोषित करना मोदी सरकार का हडबड़ी में उठाया गया कदम था जो नाकाम रहा। अब सरकार देश की अर्थव्यवस्था को चौपट करने के बाद तीन चरणों में तालाबंदी खोल दी है पहले ही चरण लगभग पुरा देश ताला मुक्त हो गया है । अन्य दो चरणों में भी अब स्कूल, कालेज, मेट्रो, अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाएं तथा ग्रामीण भारत की रीढ़ कहीं जाने वाली पैसेंजर ट्रेनों को भी खोल दिया जायेगा। देश के लाखों प्रवासी मजदूरों एवं जन सामान्य को अपने घर वापसी के समय भारी यंत्रणाओ का सामना करना पड़ा, बहुत से मजदूरों ने रास्तों में ही दम तोड़ दिया था। छोटे-छोटे कारोबारी तीन माह की तालाबंदी में बर्बाद हो गए, देश के अधिकांश कल कारखाने बंद हो गए। देश की जनता सरकार के आदेशों का पालन करती रही।

हमारे देश में में विश्व के अन्य कई देशों की भांति सरकार के खिलाफ न तो प्रदर्शन हुए न ही कोई आक्रोश फैला। देश के विरोधी दलों के नेता भी इस दौरान सिर्फ सरकार को टीयूट करने तक सीमित रहे उनकी आलोचनाओं पर सरकार ने कोई ध्यान ही नहीं दिया और यहाँ तक उनके अच्छे सुझावों को भी दरकिनार करती रही। देखने से महसूस होता है कि केंद्र एवं राज्य सरकारें कोरोना महामारी से लड़ने का प्रयास कर रही हैं लेकिन कोई सुधार नहीं हो रहा है। धीरे-धीरे इस महामारी की गिरफ्त में पूरा देश आता जा रहा है। आज देश में कोरोना महामारी के चपेट में दो लाख तिरानवें हजार से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं और हम विश्व के संक्रमित देशों की संख्या में चौथे स्थान पर पहुँच चुकें हैं, यह स्थित तब है जब देश में कोरोना टेस्टिंग जनसंख्या के अनुसार बहुत कम हो रही हैं साधनों की भारी कमी है।

वहीँ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि भारत में यदि सभी व्यक्तियों की कोरोना की जांच हो जाएं तो यह संख्या अमेरिका से अधिक भारत में निकलेंगी। तालाबंदी के कारण देश की अर्थव्यवस्था इतनी गिर गई है उसे रफ्तार पकड़ने में कभी समय लगेगा। इस समय सरकार को यह करना चाहिए कि देश के करोड़ों गरीबों, किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों, लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों और देश के मध्यम वर्ग के लोगों को गुजारे के लिए सरकार को तुरंत नगद पैसा देना चाहिए ताकि वे फिर कार्य करने के लायक हो सकें और बाजार में भी खुशहाली आ सकें। कोरोना महामारी मानवीय त्रासदी है। अपनी नाकामियों को सही साबित करने के लिए देश का सत्ता दल और तमाम विरोधी राजनैतिक पार्टियां अपने-अपने ढंग से अपनी राजनैतिक विसात कोरोना महामारी में बिछा रहे हैं और यह बिहार,बंगाल में शुरू हो गया है और देश की जनता पर सरकार, ‘आत्म निर्भर’ होने का नया मुल्लमा चढ़ा रही हैं ताकि देश की लाकबंदी की टीस को जनता भुला सके?

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