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काली पट्टी बांध भाकपा कार्यकर्ताओं ने जताया विरोध, उठाई मजदूरों के हक में आवाज

गोंडा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला कौंसिल द्वारा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के आवाहन पर राष्ट्रीय विरोध दिवस पर लाकडाउन की व्यवस्थाओं का अनुशासन कर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कार्यालय पर एक दिवसीय धरना के माध्यम से विभिन्न मांगों पर निष्पक्ष विचार कर समुचित निर्णय मेहनतकश आम आवाम के हित में लेने का अनुरोध किया गया। ई-मेल द्वारा मांग पत्र महामहिम राष्ट्रपति भारत सरकार, महामहिम राज्यपाल उततर प्रदेश सरकार को भेजा गया।

मांग पत्र में कहा गया है कि प्रवासी मजदूरों को घरों तक पहुंचाने के लिए और अधिक ट्रेन और बसें चलायी जायें जिनमें उन्हें खाना और पानी की सुविधा दी जाये। पहले से ही घरों को निकल पड़े मजदूरों को रोकने के बजाय उन्हें सम्मानपूर्वक वाहनों में बैठा कर घर पहुंचाया जाये। उन पर किसी भी तरह का अत्याचार ना किया जाये। सभी मजदूरों को 10 हजार रुपये बतौर खर्च यात्रा खर्च दिये जायें।

अवसाद से आत्म हत्याओं अथवा दुर्घटनाओं में हो रही मौतौं पर 20 लाख रुपए की मदद और घायलों को 5 लाख दिये जायें।  मनरेगा को कमजोर नहीं किया जाये। हर व्यक्ति को पूर्ण रोजगार देना सुनिश्चित किया जाये। मनरेगा के तहत काम के दिन बढ़ाए जायें और प्रत्येक परिवार के सभी वयस्क सदस्यों को काम और समय पर भुगतान दिया जाये। शहरी क्षेत्रों में रोजगार और आवास की गारंटी की जाये।

राशन देने के लिये किसी भी तरह की शर्त ना रखी जाये। हर एक परिवार को हर माह 35 किलो खाद्यान्न निशुल्क देना सुनिश्चित किया जाये। श्रम कानून के साथ कोई छेड़छाड़ ना की जाये। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 3 सालों के लिये श्रम क़ानूनों को रद्द करने के फैसले को रद्द किया जाये। सभी संगठित और असंगठित, सरकारी और गैर सरकारी विभागों, उद्योगों में संविदा अथवा गैर संविदा कर्मियों व अन्य के बकाया वेतनों का भुगतान सुनिश्चित किया जाये।

ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और छोटे किसानों के मुद्दों का उचित निवारण किया जाये। मौसम और लाक डाउन की मार से प्रभावित किसानों के अनाज, फल, सब्जी और दूध को उचित कीमतों पर खरीदना सुनिश्चित किया जाये। किसानों को 12 हजार रुपये की तत्काल एकमुश्त सहायता दी जाये।

इसी प्रकार बुजुर्गों, विधवाओं और शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिये पेंशन और दूसरी सामाजिक सुरक्षायें सुनिश्चित की जायें और बढ़ाई जायें। कैंसर, टीवी, हार्ट, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की फौरन व्यवस्था की जाये। गर्भवती महिलाओं के लिये घरों पर कंसल्टेशन और प्रसूति की व्यवस्था की जाये। सभी की कोरोना जांच और इलाज मुफ्त कराये जायें।

नोडल सेंटर, कोरोंटाइन केन्द्र, आइसोलेशन केन्द्र एवं अस्पतालों में अव्यवस्थाएं दूर कर ताजा और ससमय भोजन, पानी, दवाई और सफाई आदि की व्यवस्था की जाये। आर्थिक राहत पैकेज आसमान में ही लटक कर रह गया है। इसमें जरूरतमंदों के लिये कुछ नहीं है। लोगों को सीधे राहत दी जाये। आत्मनिर्भरता के नाम पर सार्वजनिक क्षेत्र को बेचना बंद किया जाये।

लाक डाउन के अनुपालन के नाम पर लोगों की प्रताड़ना, पिटाई, जबरिया बसूली, चालान और जेल भेजना बन्द किया जाये। दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और अन्य कमजोर तबकों पर जुल्म बढ़ गये हैं। उनकी सुरक्षा की जाये। कानून व्यवस्था ठीक की जाये।  विश्व बाज़ार में कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद केन्द्र और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने पेट्रौल डीजल के दामों में भारी व्रद्धि कर दी है जिससे महंगाई और मंदी बढ़ेगी। उन्हें फौरन वापस लिया जाये।

कोरोना की महाविपत्ति के दौर में भी केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार न केवल राजनीति कर रही हैं, अपितु सांप्रदायिक विद्वेष भी फैला रही हैं। इससे कोरोना के खिलाफ जंग कमजोर हो रही है। इन पर फौरन लगाम लगायी जाये। इस मौके पर  कामरेड सत्य नारायण त्रिपाठी, राम किशोर सुरेश त्रिपाठी, सूर्य प्रकाश मिश्र, केके दुबे, ओम प्रकाश ईश्वर शरण, अजय, शिवम अंकुर, मयंकर सुरेश कनौजिया, कलामुद्दीन, सुनील आदि लोग उपस्थित रहे।

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