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सुलतानपर: जयसिंहपुर में धूमधाम से मनाया गया हरितालिका तीज का त्योहार

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भूपेंद्र सिंह


  • सुहागिन महिलाएं दिन भर रही उपवास,पति के लंबी उम्र की मांगी दुआएं

सुलतानपर। कोरोना वैश्विक महामारी में भी जिले में हरितालिका तीज का त्योहार हर्षोल्लास एवं धूमधाम पूर्वक मनाया गया। जिले के जयसिंहपुर, कूरेभार, नगरीय, कुड़वार, लम्भुआ, जयसिंहपुर कस्बे, गोपालपुर, मिश्रौली, सेमरी, मोतिगरपुर, कूरेभार, निजामपट्टी समेत स्थानों पर घरों एवं मंदिरों में देर रात तक व्रती महिलाओं ने एकत्र होकर विधिवत बिधि विधान पूर्वक पूजन अर्चन किया।

हिंदू धर्म मान्यता में हरितालिका तीज का अपने आप मे बड़ा ही महत्व माना गया है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत धारण करती है। यह त्यौहार मां पार्वती को समर्पित है। हरितालिका तीज के दिन गौरी-शंकर की पूजा की जाती है। इस दिन गौरी-शंकर की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर विधिवत पूजा का विधान है। वैसे तो साल भर में तीन तीज का त्योहार मनाया जाता है- हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज है।

हरितालिका तीज का है विशेष महत्व

मां पार्वती को सुहाग का सारा सामान भी अर्पित किया जाता है, इसके अलावा रात में जगह -2महिलाओं ने एकत्र होकर भजन-कीर्तन भी किया गया। इसके साथ ही जागरण कर तीन बार आरती की जाती है। हरितालिका तीज के दिन हरे रंग का विशेष महत्व होता है, इस दिन महिलाएं हरी चूड़ियां और साड़ी पहनती हैं। यह व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है।

हिन्दू मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने सर्वप्रथम यह व्रत रखा था और भगवान शिव को प्राप्त किया था। दरअसल शिवजी का रहन-सहन और उनकी वेशभूषा राजा हिमाचल को बिल्कुल भी पसंद नहीं था. राजा हिमाचल ने इस बात की चर्चा नारद जी से की। इस पर उन्होंने उमा का विवाह भगवान विष्णु से करने की सलाह दी. वहीं, माता पार्वती भगवान शिव को पहले ही अपने मन में अपना पति मान लिया था।

ऐसे में उन्होंने विष्णु जी से विवाह करने से इंकार कर दिया। फिर माता पार्वती की सखियों ने इस विवाह को रोकने की योजना बनाई। माता पार्वती की सखियां उनका अपहरण करते जंगल ले गईं जिससे उनका विवाह विष्णुजी से न हो पाए। सखियों के माता पार्वती का हरण करने पर ही इस व्रत का हरतालिका तीज पड़ गया।

शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने जंगल में तप किया और फिर शिवजी ने उन्हें दर्शन दिए और माता पार्वती को उन्होंने पत्नी के रूप में अपना लिया। शास्त्रों के अनुसार हरतालिका तीज का यह व्रत भाग्य में वृद्धि करने वाला व्रत माना गया है। इस व्रत को रखने से घर में सुख शांति और समृद्धि आती है। जिस स्त्री के दांपत्य जीवन में कोई बाधा आ रही है तो यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है। हरतालिका तीज का व्रत जीवन में ऊर्जा लाता है और नकारात्मक विचारों का नाश करता है।

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