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लोगों के जेहन में अटल थे, अटल हैं और अटल रहेंगे

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लोकेश त्रिपाठी-अमेठी-

अंशुमान निकेतन अमेठी में आज युग पुरुष भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री पण्डित अटल बिहारी बाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर रवीन्द्र सिंह- क्षेत्रीय सह संयोजक भाजपा काशी क्षेत्र उत्तर प्रदेश सुधांशु शुक्ल-जिलामहामंत्री बीजेपी अजय तिवारी मण्डल अध्यक्ष अमेठी मो इमरान अभिषेक तिवारी अंकित सिंह सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने दिया विनम्र श्रद्धांजलि श्रद्धा सुमन अर्पित किया। भारतीय जनता पार्टी के जिलामहामंत्री सुधांशु शुक्ल ने अटल जी के पद चिन्हों पर चलने की बात कही इसी के साथ रवीन्द्र सिंह- क्षेत्रीय सह संयोजक भाजपा काशी क्षेत्र उत्तर प्रदेश ने अटल जी के जीवन से सरलता समरसता व धैर्यपूर्वक जीवन पथ पर अग्रसर होते रहने को बताया कर्तव्य भी सच्ची श्रद्धांजलि भी अजय तिवारी मण्डल अध्यक्ष ने उपस्थित लोगों को आभार प्रकट किया इसी के साथ लोगों ने उन्हें नम आंखों से याद किया।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन अद्भुत अकल्पनीय था उन्होंने राजनीतिक जीवन की एक लंबी पारी खेली थी । जिसमें कुल मिलाकर 47 साल तक संसद के सदस्य रहे। वह 10 बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के लिए चुने गए। एकमात्र बार वह 1984 में लोकसभा चुनाव हारे थे जब कांग्रेस के माधवराव सिंधिया ने ग्वालियर में उन्हें करीब दो लाख वोटों से शिकस्त दी थी।
वाजपेयी ने 10वीं, 11वीं, 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा में 1991 से 2009 तक लखनऊ का प्रतिनिधित्व किया।
दूसरी और चौथी लोकसभा के दौरान उन्होंने बलरामपुर का नेतृत्व किया, पांचवीं लोकसभा के लिए वह ग्वालियर से चुने गए जबकि छठीं और सातवीं लोकसभा में उन्होंने नयी दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया।


वाजपेयी 1962 और 1986 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। मुंबई में पार्टी की एक सभा में दिसंबर 2005 में वाजपेयी ने चुनावी राजनीति से अपने को अलग करने की घोषणा की।
वह करीब 47 सालों तक सांसद रहे। वाजपेयी जी 1996 से 2004 के बीच तीन बार प्रधानमंत्री भी रहे। पहली बार 13 दिन के लिए, फिर 1998 और 1999 के बीच 13 महीनों के लिए और फिर 1999 से 2004 तक। सालों से अटल बिहारी वाजपयी जी खामोश थे। वो डिमेंशिया बिमारी से पीड़ित थे। लगभग 14 सालों से वाजपेयी बीमार चल रहे थे। पब्लिक में आखिरी बार उनकी झलक 2015 में दिखी जब तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया। प्रणब मुख़र्जी प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए खुद उनके घर सम्मान देने के लिए पहुंचे थे।


हिंदी भाषा में अहम योगदान – अगर हिंदी को अंतररष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित और प्रसारित करने में किसी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है तो वह थे अटल बिहारी वाजपेयी। 1977 में जनता सरकार में विदेश मंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी का संयुक्त राष्ट्रसंघ में हिंदी में दिया भाषण काफी लोकप्रिय हुआ था। यह पहला मौका था जब संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे बड़े अतंराष्ट्रीय मंच पर हिंदी की गूंज सुनने को मिली थी। खुद वाजपेयी जी के अनुसार यह उनके लिए सर्वाधिक प्रसन्नता वाला क्षण था।

परमाणु परीक्षण से कर दिया था दुनिया को हैरान वाजपेयी का कवि हृदय कोमल नहीं था। भारत को परमाणु राष्ट्र बनाने वाले वाजपेयी ही थे। 11 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में सफल परीक्षण के साथ भारत न्यूक्लियर स्टेट बन गया था। भारत ने शक्ति नामक परमाणु परिक्षण कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था।

 

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