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अनामिका शुक्ला के नाम से नौकरी करने वाली सुप्रिया से होगी वेतन रिकवरी

कासगंज। यूपी में चर्चित अनामिका शुक्ला के नाम से नौकरी करने वाली महिला टीचर से सैलरी की धनराशि साढ़े चार लाख रुपये की रिकवरी होगी। इसे लेकर बेसिक शिक्षा विभाग में मंथन चल रहा है। जनपद स्तर पर विभाग की ओर से गठित तीन सदस्यीय समिति इस पर जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी। जबकि यहां अनामिका के बैंक खाते में महज 17 हजार रुपये ही बताए हैं।

अनामिका शुक्ला के नाम से 25 जिलों में नौकरी शिक्षिका की नौकरी का फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बाद शासन ने वेतन रिकवरी के आदेश दिए हैं। शासन के आदेश के बाद बीएसए अंजली अग्रवाल ने इसके लिए एबीएसए के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी। समिति इस मामले में जांच करने में लगी है। इस मामले में बीएसए की ओर से अनामिका शुक्ला के नाम से ही रिपोर्ट दर्ज कराई है। जबकि पुलिस की पकड़ में आई महिला अनामिका शुक्ला ना होकर सुप्रिया सिंह निकली। बैंक से अनामिका शुक्ला बनकर उसके  नाम से वेतन सुप्रिया सिंह निकालती रही है। ऐसे में विभाग को वेतन की रिकवरी को लेकर मंथन चल रहा है।

बैंक खाते पर बीएसए ने रोक लगाई

बीएसए ने लेखाधिकारी के माध्यम से बैंक के सैलरी खाते पर रोक लगवा दी है। उसके लेन देन का ब्यौरा भी निकलवाया जा रहा है, जिससे वेतन की धनराशि का पता लग सकेगा। इससे पहले सुप्रिया सिंह ने अनामिका बनकर एक चेक से 17 हजार रुपये निकालने की कोशिश की थी, जो नाकाम रही।

अंजली अग्रवाल, बीएसए ने बताया कि अनामिका शुक्ला के नाम से बैंक खाता है जिसमें वेतन डलता रहा और धनराशि निकाली गई है, अभी तक अनामिका शुक्ला के बारे में कुछ पता नहीं चला है, जबकि नौकरी करती हुई सुप्रिया सिंह पकड़ी गई है, वेतन रिकवरी को लेकर शासन से आदेश जारी हुए हैं, इस दिशा में जांच चल रही है, वेतन रिकवरी को लेकर रास्ता निकाला जाएगा।

संविदा बर्खास्तगी की पत्रावली की होगी जांच

कासगंज में नौकरी करने वाली फर्जी शिक्षिका की संविदा समाप्त की पेश की गई पत्रावली की भी जांच होगी। डीएम ने इस पर निर्देश जारी कर दिये हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी अंजली अग्रवाल की ओर से अनामिका शुक्ला की संविदा समाप्त करने संबंधी पत्रावली डीएम चन्द्रप्रकाश सिंह के समक्ष पेश की गई। जिस पर जिलाधिकारी ने पत्रावली की जांच कराने के लिए दिशा निर्देश जारी किये हैं। दरअसल, मामला प्रदेश में चर्चित है। ऐसे में जिला प्रशासन इस मामले में कदम फूंक फूंककर रख रहा है।

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