उत्तर प्रदेशताज़ा ख़बरसुलतानपुर

सुलतानपुर: KNIPSS में एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का हुआ आयोजन

भूपेंद्र सिंह


  • वैश्विक महामारी कोरोना के संदर्भ में साहित्य एवं समाज की भूमिका विषय पर हुई संगोष्ठी
  • हिंदी विभाग द्वारा कराया गया आयोजन
  • नार्वे से मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम श्री सुरेश चंद्र शर्मा ने संकट की घड़ी में आत्मनिर्भर बनने पर दिया जोर

सुलतानपुर। कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान सुलतानपुर में शनिवार को प्रातः 10 बजे हिंदी विभाग द्वारा “वैश्विक महामारी कोरोना के सन्दर्भ में साहित्य एवं समाज की भूमिका” विषय पर एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। संगोष्ठी का प्रारम्भ स्वागत एवं परिचय के साथ विभागीय, हिन्दी विभाग डा.प्रतिमा सिंह ने किया। बीज वक्तव्य के रूप में प्राचार्य डा. राधेश्याम सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि साहित्य वेदना और पीड़ा से जन्मने वाला एक सांस्कृतिक व्यापार है। इसका मूल कर्म प्रतिरोध है। वह साहित्य के माध्यम से मानसिक तंतुओं को प्रभावित करने वाला एक रसायन है।

नार्वे से मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित भारतीय-नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम, नार्वे के अध्यक्ष श्री सुरेशचन्द्र शुक्ल ने इस संकट की घड़ी में व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता बताया। हिन्दी अथवा मातृभाषा के प्रति हीनभावना को त्याग कर हमें प्रवीण बनना होगा। विशिष्ट वक्ता के रूप में आलोचक प्रो. सूरज बहादुर थापा , लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ ने कहा कि कोरोनाकाल साहित्य का आनंदकाल नहीं है। यह चिन्तनकाल है। जहाँ हमें लोकतांत्रिक यात्रा और विकास के नये माँडल को समझना होगा।

अतिथि वक्ता के रूप में संस्थान के पूर्व प्राचार्य प्रो. यशवंत सिंह ने कहा समय के इस जटिल दौर में हमें नये सिरे से चुनौतियों का सामना करने के लिए सजग और आत्मचिन्तन के लिए तैयार रहना चाहिए। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक प्रो. विजय बहादुर सिंह ने कहा कि साहित्य मनुष्य की संवेदनात्मक सृष्टि है। साहित्य को अपनी अस्मिता, चेतना और सच को बचाये रखने की कोशिश करना है, ताकि करूणा, संवेदना और मानवीयता बची रहे।

संस्थान के उप प्राचार्य डा. सुशील कुमार सिंह ने अतिथि वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि कोरोना संकट ने जो नकारात्मकता समाज में उत्पन्न की है , उसमे साहित्य और साहित्यकार की भूमिका महत्त्वपूर्ण होगी। राष्ट्रगान के साथ संगोष्ठी के समापन की औपचारिक घोषणा की गयी। कार्यक्रम में डा. रंजना सिंह, डा. वन्दना सिंह, डा. किरन सिंह पवन कुमार रावत, डा. प्रिया श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button