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मुफलिसी बनी अभिशाप: एक मजबूर पिता की दुख भरी दास्तां

सवायजपुर (हरदोई)। कैंसर पीड़ित पत्नी के इलाज में पूरी तरह से बर्बाद हो चुके छन्नूलाल को क्या पता था परिवार का खेवनहार इकलौता चिराग अमित छत से गिरकर इलाज के अभाव में एक दिव्यांग की जिंदगी जीने को मजबूर हो जाएगा।

पाली थाना क्षेत्र के खनिकलाजहानपुर गाँव निवासी छन्नूलाल मिश्रा 3 बीघा जमीन के सहारे किसी तरह मेहनत मजदूरी कर अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ खुश थे न जाने किस मनहूस की नजर इनके परिवार को लगी की इनकी पत्नी को कैंसर जैसी घातक बीमारी से ग्रसित हो गई।

जो भी कुछ जमा पूंजी थी वह पत्नी के इलाज पर खर्च हो गए। बीते 1 वर्ष पूर्व उनकी मौत के बाद छन्नूलाल को लगा कि अब उनके दिन भरने वाले हैं लेकिन कुदरत ने उनके नसीब में दुखों की एक लंबी दास्तान लिखी थी बीती 2 मई को परिवार का खेवनहार इकलौता चिराग 20 वर्षीय अमित राम मे छत पर सो रहा था अर्थ चेतना मेवा लघुशंका के लिए उठा और छत के नीचे गिर गया।

पत्नी के इलाज में अपनी जमा पूंजी गंवा चुके छन्नूलाल के सामने अमित के इलाज की सबसे बड़ी समस्या थी, सरकारी एंबुलेंस हरदोई जिला अस्पताल ले गए जहां से अमित की नाजुक हालत को देखते हुए ट्रामा सेंटर लखनऊ के लिए रेफर कर दिया गया।कोरोना संकट कमजोर आर्थिक स्थिति की वजह से मजबूर होकर उसे घर वापस लौटना पड़ा।

अमित घर पर ही अब जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने को मजबूर है। अमित के मजबूर पिता छन्नूलाल ने बताया कि परिवार का यही इकलौता पालनहार है या मथुरा की सब्जी मंडी मे पल्लेदारी व मेहनत मजदूरी करता था, जिसके सहारे ही परिवार का भरण-पोषण होता था। अमित के अलावा उसकी दो बहनें हैं जिसमें एक की शादी हो चुकी है।

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