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मनरेगा में हर रोज एक करोड़ को काम: मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 जून से महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारण्टी योजना (MNREGA) के जरिये हर रोज एक करोड़ मानव दिवस सृजित किए जाने के लक्ष्य को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी (DMs) अपने-अपने जिलों में मनरेगा के जरिये रोजगार उपलब्ध कराने की निरन्तर समीक्षा करें। प्रेषित प्रस्तावों की औपचारिकताओं को पूर्ण करते हुए तीन दिन के भीतर इन कार्यों की सूची शासन को उपलब्ध कराएं। सभी मण्डलायुक्तों को सम्बन्धित जिलों का भ्रमण करने के निर्देश देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करें कि लाकडाउन से पहले चल रही विकास योजनाएं पूरी गति से शुरू हो जायें।

CM Yogi बुधवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों व मण्डलायुक्तों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विभागीय कन्वर्जेन्स के माध्यम से अधिक श्रमिकों का नियोजन हो सकेगा। मनरेगा के लिए अधिक कार्य स्थलों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। विभागों के समन्वय से परिसम्पत्तियों के सृजन में गुणवत्ता आएगी। CM Yogi कहा कि मनरेगा के साथ-साथ केन्द्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं के जरिये भी अधिकाधिक रोजगार के अवसर पैदा किये जाये। उन्होंने जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में रोजगार उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में कार्य योजना प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए कहा कि मनरेगा के माध्यम से उपलब्ध सभी प्रस्तावों को स्वीकृत करते हुए जरूरतमन्दों व श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के कारण लगभग 35 लाख श्रमिक विभिन्न राज्यों से प्रदेश में वापस आए हैं। प्रदेश में पहले से भी बड़ी संख्या में श्रमिक उपलब्ध हैं। ऐसे में, प्रदेश की सुदृढ़ अर्थव्यवस्था के लिए व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन किया जाना है। बड़े उद्योगों, एमएसएमई के अलावा, मनरेगा के माध्यम से भी रोजगार सृजन किया जा सकता है। उन्होने कहा कि वर्तमान में मनरेगा के माध्यम से 42 लाख मानव दिवस सृजित किए गए हैं, जिससे लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ है। विगत दिवसों में मनरेगा के माध्यम से अच्छा कार्य किया गया है, लेकिन इसे और अधिक गति प्रदान की जाए।

Ramanuj Bhatt

रामअनुज भट्ट तकरीबन 15 सालों से पत्रकारिता में हैं। इस दौरान आपने दैनिक जागरण, जनसंदेश, अमर उजाला, श्री न्यूज़, चैनल वन, रिपोर्टर 24X7 न्यूज़, लाइव टुडे जैसे सरीखे संस्थानों में छोटी-बड़ी जिम्मेदारियों के साथ ख़बरों को समझने/ कहने का सलीका सीखा।

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