उत्तर प्रदेशताज़ा ख़बरलखनऊ

परिषद ने खर्च कम करने और दक्षता परीक्षण पर उठाए सवाल

पहले सरकार विभागों एवं निगमों की जमीनी हकीकत को समझे तब उठाए कोई कदम : इं. हरिकिशोर तिवारी

लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी ने सरकार द्वारा दक्षता परीक्षण और खर्चो को कम किए जाने के लिए बनाई गई समिति पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा कि पहले सरकार विभागों एवं निगमों की जमीनी हकीकत को समझे तब कोई कदम उठाये।  उन्होंने कहा कि इस समिति के बिना ही विभागीय एवं निगम स्तर पर खर्च कम करने और दक्षता परीक्षण के मानक पहले से उपलब्ध है। कई बार अनुपयोगी  संसाधनों और खर्च कम करने के तथ्य कर्मचारी संगठनों द्वारा राज्य सरकार तक उचित माध्यम से पहुचाए जा चुके है, लेकिन सालों बीत जाने पर भी उन पर विचार नही किया गया।

उदाहरण के तौर पर उन्होंने लोक निर्माण विभाग में वर्षो से बंद पड़े बहुत ही महत्वपूर्ण  अन्वेषणालय का जिक्र करते हुए पत्राचार किया था कि ठेकेदारी  प्रथाको बढ़ाने के लिए अन्वेषणालय की करोड़ रूपये की मशीनरी और श्रम शक्ति को कण्डम साबित करते हुए मशीनरी को सड़ाया गया और सालों से वहाॅ की तकनीकी क्षमता को बिना काम वेतन दिया गया। इसी तरह घाटे में चल रहे निगमों को भी वर्षो से बेरोकटोक के चलाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों की दक्षता परीक्षण और राजकीय संसाधनों तथा खर्चा पर कमी के संबंध में सरकार द्वारा एक समिति बनाई गई। जबकि सरकार इस बाॅत से भली भाॅति अवगत है कि सभी विभागों में रिक्तियों के सापेक्ष कर्मचारियों की संख्या के लगभग 30 प्रतिशत पद खाली पड़े हुए हैं। निगमों की हालत खास्ताहाल है। कर्मचारी कल्याण निगम की अनदेखी लम्बे अरसे से हो रही है, जहां 2 वर्षों से बराबर मुख्य सचिव स्तर पर वार्ता के बाद उन्हें खाली बैठाया गया है।

इस निगम के कर्मचारियों की श्रम शक्ति का बिना उपयोग किये बिठाए रखा गया है जबकि काफी कर्मचारी अधिकारी बीआरएस ( स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) लेना चाहते हैं लेकिन न तो उन्हें वेतन मिल रहा है नर ही वीआरएस दिया जा रहा है।  कई निगम घाटे में चल रहे हैं  उनके कर्मचारियों के कार्यों में लगाया जाए ये चर्चाएं संगठन बराबर उच्च स्तर पर करता रहा है घाटे के निगमों को बंद कर के कर्मचारियों को दूसरे कार्यों में लगाया जाए जाना चाहिए।

इसी प्रकार एक पत्रावली सात स्थानों पर सिर्फ हस्ताक्षर होते हुए प्रमुख सचिव स्तर पर पहुंचती है और इसी प्रकार वापस आती है। इसे कम किया जा सकता है कर्मचारियों की दक्षता परीक्षण के तमाम आदेश विद्यमान हैं उन्हीं के अनुसार उनके वेतन वृद्धि होती है कुछ कार्य ऐसे होते हैं जो गोपनीयता पूर्ण होते हैं जिसको साझा करना विभाग और सरकार के हित में नहीं होगा ।लोक निर्माण विभाग में जो रोलर आदि मशीन चलती थी प्राइवेट सेक्टर में दे दिया गया अब उनसे संबंधित इंजीनियर और स्टाफ ट्रेनिंग देकर सिविल कार्य में लगाने के लिए 17 वर्ष पहले टाटा कंसल्टेंसी रिपोर्ट मैं तय किया गया था लेकिन वे बिना वेतन कार्य ले रहे हैं।

Saurabh Bhatt

सौरभ भट्ट पिछले दस सालों से मीडिया से जुड़े हैं। यहां से पहले टेलीग्राफ में कार्यरत थे। इन्हें कई छोटे-बड़े न्यूज़ पेपर, न्यूज़ चैनल और वेब पोर्टल में रिपोर्टिंग और डेस्क पर काम करने का अनुभव है। इनकी हिन्दी और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छी पकड़ है। साथ ही पॉलिटिकल मुद्दों, प्रशासन और क्राइम की खबरों की अच्छी समझ रखते हैं।

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button