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परमेश्वर से मिलने की नीति का निर्धारण करना आस्था से खिलवाड़: सुरेन्द्र नाथ त्रिवेदी

लखनऊ। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश प्रवक्ता सुरेन्द्र नाथ त्रिवेदी ने प्रदेश सरकार द्वारा भगवान के मन्दिरों में प्रवेश एवं दर्शन करने के नियम निर्धारित करने के साथ साथ मन्दिरों में सैनिटाइजेशन जैसी प्रक्रिया अपनाने पर विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि मन्दिरों में देवी देवताओं की मूर्तियों की स्थापना प्राण प्रतिष्ठा के साथ की जाती है और आम जन मानस में यह अकाट्य विश्वास होता है कि वहाँ पर देवी देवताओं का निवास है। ऐसी स्थिति में परम पिता परमेश्वर से मिलने की नीति का निर्धारण करना आस्था से खिलवाड़ करने जैसा है जबकि सामाजिक दूरी के सम्बन्ध में तीन महीने से जनता को अवगत कराया गया है।

त्रिवेदी ने कहा कि भाजपा ने जब माँ गंगा की सफाई करने का संकल्प लिया था और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुश्री उमा भारती ने कहा था कि यदि गंगा निर्मल न हुई तो वे जल समाधि ले लेंगी, उसी समय मैंने कहा था कि जो माँ गंगा समस्त विश्व के पापों को धोकर विश्व का कल्याण करती है, उसे निर्मल करने का संकल्प, हास्यास्पद है। देश का अरबों रुपया बन्दर बाँट में गया और न गंगा निर्मल हुईं और न ही किसी ने जल समाधि ली। लॉकडाउन में ईश्वर और प्रकृति ने सिर्फ गंगा ही नहीं बल्कि समस्त नदियों को निर्मल और स्वच्छ कर दिया।

इसी कारण गोस्वामी तुलसीदास जी के ईश्वर के लिए कहा है कि “बिनु पद चलै सुनै बिनु काना। कर बिनु कर्म करइ विधि नाना।” उन्होंने कहा कि सरकार में बैठे लोगों को ईश्वर में आस्था उसी प्रकार की रखनी चाहिए जैसी चुनावों के समय प्रदर्शित की जाती है। रालोद प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि महामारी और विपत्तियों से घिरे हुए सभी लोगों को अपने ईश्वर से मिलने की विधियाँ मालूम हैं अतः पूजा और इबादतगाहों के साथ साथ सभी धार्मिक स्थलों में दर्शन करने के निर्देश स्थानीय प्रबन्धन द्वारा निर्धारित करके संचालित करना चाहिए।ईश्वरीय सत्ता सबकी और सबके लिए है।

Ramanuj Bhatt

रामअनुज भट्ट तकरीबन 15 सालों से पत्रकारिता में हैं। इस दौरान आपने दैनिक जागरण, जनसंदेश, अमर उजाला, श्री न्यूज़, चैनल वन, रिपोर्टर 24X7 न्यूज़, लाइव टुडे जैसे सरीखे संस्थानों में छोटी-बड़ी जिम्मेदारियों के साथ ख़बरों को समझने/ कहने का सलीका सीखा।

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