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विजय रूपाणी: म्‍यांमार में जन्म, छात्रसंघ से जुड़े, मंत्री और राज्यसभा सदस्य रहे, फिर संभाली गुजरात की कमान, अब दिया ​इस्तीफा

गुजरात के मुख्यमंत्री (Gujrat CM) पद से विजय रूपाणी ने इस्तीफा दे दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को हटाकर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया था. वे अमित शाह के करीबी माने जाते हैं और संघ के बैकग्राउंड से हैं. गुजरात विधानसभा चुनाव से 16 महीने पहले रूपाणी के इस्तीफे ने लोगों को चौंका दिया है. उनके इस्तीफे के पीछे कारण बहुत स्पष्ट नहीं है. हालांकि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि वे संगठन के लिए काम करना चाहते हैं.

विजय रूपाणी बीजेपी के उन खांटी नेताओं में गिने जाते हैं, जो शुरू से ही पार्टी से जुड़े रहे और कभी विचारधारा नहीं बदली. छात्र जीवन से ही उनका झुकाव जनसंघ की ओर रहा. विधायक बने, राज्य में मंत्री रहे, राज्यसभा सांसद भी रहे और फिर बीजेपी ने उनके हाथों में राज्य की कमान सौंप दी. संगठन से उभरे रूपाणी अब फिर से संगठन में लौट रहे हैं.

विजय रूपाणी का जन्म म्यांमार (तत्कालीन बर्मा) की राजधानी रंगून में 2 अगस्त 1956 को हुआ था. उनके पिता कारोबार के लिए वहां गए थे, जो 4 साल बाद 1960 में राजकोट लौट आए. रूपाणी जैन बनिया समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. गुजरात लौटने के बाद उनकी पढ़ाई-लिखाई यहीं होने लगी.

ABVP से जुड़े फिर जनसंघ के होकर रह गए

छात्र जीवन में ही विजय रूपाणी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ जुड़े और एक छात्र कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक करियर शुरू किया. वर्ष 1971 में वे जनसंघ के साथ जुड़े और स्थापना काल से ही भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गए. वे पार्टी से ऐसे जुड़े कि यहीं के होकर रह गए.

इमरेजेंसी में जेल जाने वाले इकलौते नेता

विजय रूपाणी इमरजेंसी के दौरान जेल जाने वाले प्रदेश सरकार के इकलौते नेता हैं. 1976 में आपातकाल के दौरान भावनगर और भुज की जेलों में वे 11 महीने तक कैद रखे गए थे. वर्ष 1987 में उन्होंने राजकोट नगर निगम चुनावों से शुरुआत की. 1996 से 1997 तक वे राजकोट के मेयर रहे.

वर्ष 1998 में उन्हें भाजपा की गुजरात इकाई का महासचिव बनाया गया. वर्ष 2006 में वे गुजरात पर्यटन के अध्यक्ष नियुक्त किए गए. 2006 से 2012 तक वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे हैं.

2014 में जीता विधानसभा चुनाव, 2016 में बने सीएम

वर्ष 2014 में उन्‍होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता. वाजुभाई वाला के गवर्नर बनने के बाद उन्होंने अपनी सीट छोड़ी और इसके बाद उपचुनाव हुआ, जिसमें उन्हें जीत हासिल हुई. नवंबर 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने जब पहला कैबिनेट विस्तार किया तो उन्हें मंत्री बनाया गया. उन्हें परिवहन, जल आपूर्ति, श्रम और रोजगार मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई. फरवरी 2016 से अगस्त 2016 तक वे बीजेपी के स्टेट प्रेसिडेंट भी रहे. 5 अगस्त 2016 को उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

डेढ़ दशक पहले छोड़ना चाहते थे राजनीति

बताया जाता है कि विजय रूपाणी 15 साल पहले ही राजनीति छोड़ना चाहते थे. तब उनके परिवार में हुई एक दुखद घटना से वे बहुत आहत थे. दरअसल छत से गिरकर उनके बेटे की मौत हो गई थी. तब सब लोगों ने मिलकर उन्हें संभाला. उनके बेटे के नाम पर अभी भी एक ट्रस्ट चलता है जो गरीब बच्चों की मदद करता है. उनकी एक बेटी लंदन में है और एक बेटा अभी पढ़ाई कर रहा है.

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