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आजादी के 75 वर्षो बाद मिला शरणार्थियों को न्याय और अधिकार

लखनऊ ।  राजधानी में महापौर संयुक्ता भाटिया की अध्यक्षता में नगर निगम कार्यकारिणी समिति की सामान्य बैठक लालबाग स्थित नगर निगम के राजकुमार हॉल में गुरुवार को सम्पन्न हुई। महापौर की पहल पर आजादी के 75 वर्षो बाद मिला शरणार्थियों को न्याय और अधिकार मोहन मार्केट में स्वतंत्रता के समय के शरणार्थी होकर आए विस्थापित दुकानदारों को 75 वर्षो बाद 327 आवंटित दुकानदारों के पक्ष में विक्रय किये जाने के प्रस्ताव को कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

महापौर संयुक्ता भाटिया ने बताया कि 1947 में भारत के बंटवारे के बाद शरणार्थी के रूप में आये लोगो के पुनर्वास हेतु अमीनाबाद में बसाया गया था। यह शरणार्थी पाकिस्तान में अपनी करोड़ो की संपत्तियों को छोड़कर भारत आये थे, जिसके एवज में इन्हें यह छोटी दुकाने जीवन यापन के लिए दी गयी थी।  इनका बकाया किराया जमा करते हुए नामांतरण कर मूल आवंटियों को जिलाधिकारी सर्किल रेट से 2 गुना एवं इसके अतिरिक्त रक्त सम्बन्धी आवंटियों को 3 गुना रेट पर आवंटियों के पक्ष में विक्रय करने हेतु प्रस्ताव पारित कर दिया गया। महापौर ने बताया कि अब इसको शासन भेजा जाएगा।

75 वर्षो में शरणार्थियों के रूप में रह रहे यह लोग विगत 7 दशकों से मालिकाना हक मांगते चले आ रहे है, जिसपर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई थी, इन शरणार्थियों में विभाजन की विभीषिका और वेदना को स्वयं झेलने वाली महापौर संयुक्ता भाटिया से गुहार लगाई, महापौर ने उनका दर्द समझा और उन्हें समस्या निस्तारण के लिए आश्वस्त किया। महापौर स्वयं मोहन मार्केट गयी थी और समस्त स्थापित व्यापारियों से मिली भी थी।  महापौर ने प्रस्ताव को सदन और कार्यकारिणी  से पारित करा कर उनके पुनर्वास की राह प्रशस्त की। महापौर ने बताया कि इस प्रस्ताव के पारित होने के उपरांत शासन की अनुमति प्राप्त होते ही

1- इन संपत्तियों की रजिस्ट्री होने व हस्तांतरण होने पर दाखिल खारिज कराने से शासन को करोड़ो रुपए के राजस्व की प्राप्ति होगी।
2- नगर निगम द्वारा हर वर्ष इनपर संपति कर, जलकर एवं अन्य कर लिए जा सकेंगे, करों के रूप में नगर निगम को राजस्व मिलेगा।
3- नगर निगम की यह संपत्तियां जो अलाभकारी संपति है अब लाभकारी संपति में परिवर्तित हो जाएंगी।
4- अपनी संपत्ति होने पर व्यापारी बैंक से ऋण लेकर अपना कारोबार बढ़ा सकेंगे जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा।
5- ‘अमृत महोत्सव’ में शरणार्थियों का पुनर्वास संभव होगा।

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