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कल्याण सिंह फिर बने बीजेपी के सदस्य, कहा- यूपी में योगी का कोई विकल्प नहीं

राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह ने सोमवार को फिर से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सदस्यता ग्रहण कर ली. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने 87 वर्ष की उम्र में फिर से सक्रिय राजनीति में वापसी की है. राजनीति में वापसी के बाद कल्याण सिंह ने कहा, ‘मैं बतौर राज्यपाल कुछ नहीं बोलता था, लेकिन हर रोज डेढ़ घंटा यूपी की जानकारी लेता रहता था.

kalyaan Singh

लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के लिए सहयोग करता रहूंगा. यूपी में योगी आदित्यनाथ का कोई विकल्प नहीं है. पूर्व सीएम ने कहा, ‘मैं बीजेपी को मजबूत करने के लिए काम करता रहूंगा. मैं आगे चुनाव नहीं लड़ूंगा. मैंने बहुत चुनाव लड़ा और कार्यकर्ताओं का खूब प्यार भी मिला.

राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह आज सोमवार को फिर से बीजेपी के हो गए. बीजेपी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई. इस दौरान बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में भारी संख्या में कल्याण सिंह के समर्थक मौजूद थे.

राज्यपाल पद से सेवानिवृत्त होने के बाद लखनऊ लौटने पर कल्याण सिंह का उनके समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया. इसके बाद वे सीधे बीजेपी के प्रदेश मुख्यालय गए. पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद कल्याण सिंह अपने पौत्र एवं राज्यमंत्री संदीप सिंह के माल एवेन्यू स्थित आवास पर कार्यकर्ताओं को संबोधित किया.

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2014 में राज्यपाल बने थे कल्याण

कल्याण सिंह ने 4 सितंबर, 2014 को राजस्थान के राज्यपाल पद की शपथ ली थी और इस साल 3 सितंबर को उनका 5 साल का कार्यकाल पूरा हो गया, जिसके बाद उन्होंने अपने गृह प्रदेश यूपी वापसी की. खास बात यह है कि वापस लौटते ही वह उत्तर प्रदेश की सक्रिय राजनीति में लौट भी आए.

कल्याण सिंह का जन्म 5 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था. वो संघ की गोद में पले बढ़े. बीजेपी के कद्दावर नेताओं में शुमार किए जाते थे और एक दौर में वह उत्तर प्रदेश में बीजेपी के चेहरा माने जाते थे. उनकी पहचान कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी और प्रखर वक्ता की थी. वह दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं.

अयोध्या आंदोलन ने बीजेपी के कई नेताओं को देश की राजनीति में एक पहचान दी, लेकिन राम मंदिर के लिए सबसे बड़ी कुर्बानी नेता कल्याण सिंह ने दी थी. कल्याण बीजेपी के इकलौते नेता थे, जिन्होंने 6 दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी विध्वंस के बाद अपनी सत्ता की बलि चढ़ा दी थी. राम मंदिर के लिए सत्ता ही नहीं गंवाई, बल्कि इस मामले में सजा पाने वाले भी वे एकमात्र शख्स हैं.

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Saloni

सलोनी भल्ला पत्रकारिता में पिछले चार साल से एक्टिव हैं। यहां से पहले अमर उजाला में कार्यरत थीं। "खबरी अड्डा" के बाद साथ-साथ लाइव टुडे में भी कार्यरत हैं। वॉयस ओवर आर्टिस्ट, कंटेंट राइटिंग, कंटेंट एडिटिंग और एंकरिंग में एक्सपीरियंस है। लेखन में पॉलीटिकल, क्राइम, एंटरटेनमेंट, ब्यूटी और हेल्थ के साथ-साथ गली मोहल्लों  की खबरों से लेकर सोशल मीडिया तक की चहल-पहल पर अपनी पैनी नजर रखती हैं।

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