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दिल्ली HC ने इंडियाबुल्स मामले में RBI समेत इन संस्थाओं को जारी किया नोटिस

इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (IHFL) के फंड हेराफेरी मामले में दिल्‍ली हाईकोर्ट ने IHFL के अलावा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया, नेशनल हाउसिंग बैंक और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस को नोटिस भेजा है. दिल्‍ली हाईकोर्ट द्वारा ये कार्रवाई इंडियाबुल्‍स के खिलाफ दायर याचिका पर की गई है.

Indiabulls Case

एनजीओ सिटीजंस विस्सल ब्लोअर फोरम ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई है कि इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने अपने प्रवर्तकों और ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के माध्यम से बड़ी कॉरपोरेट समूह के स्वामित्व वाली कंपनियों को संदिग्ध कर्ज दिया. याचिका में आरोपों की एसआईटी से जांच करवाने की भी मांग की गई है.

इसके साथ ही याचिका में दावा किया गया है कि इस कर्ज की हेराफेरी कर के इंडियाबुल्स के प्रवर्तकों की स्वामित्व वाली कंपनियों के खाते में डाल दिया गया. इसका मकसद उनकी निजी संपत्ति को बढ़ाना था. याचिका के मुताबिक कि इन आर्थिक अनियमितताओं के कारण इंडियाबुल्स में निवेश करने वाले शेयरधारकों को नुकसान हुआ.बहरहाल, दिल्‍ली हाईकोर्ट ने इंडियाबुल्स के अलावा आरबीआई, सेबी, एमसीए और एसएफआईओ को दो हफ्ते के भीतर नोटिस पर अपने जवाब दाखिल करने को कहा है.

क्‍या है मामला?

दरअसल,  कुछ महीनों पहले इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड पर जनता के 98 हजार करोड़ रुपये के फंड में हेराफेरी के आरोप लगे थे. यह आरोप कानूनी फर्म मानाजियम जुरिस ने लगाया था. हालांकि इस फर्म ने झूठे आरोप के लिए बाद में माफी भी मांग ली. इस मामले के खत्‍म होने के बाद दिल्‍ली हाईकोर्ट में एक नई याचिका दायर कर दी गई. इस याचिका में इंडियाबुल्‍स पर वित्‍तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं. बता दें कि 80 हजार करोड़ से अधिक के कर्ज में डूबी हुई इंडियाबुल्स समूह रियल एस्टेट, शेयर बाजार, बैंकिंग और हाउसिंग लोन के कारोबार में सक्रिय है.

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बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का जिक्र

इंडियाबुल्स ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का भी जिक्र किया. कंपनी ने कहा कि सुब्रमण्‍यम स्‍वामी के कंटेंट को ध्यान में रख कर कोर्ट में याचिका को दायर कर दिया गया. इसमें किसी भी तरह‍ का तथ्‍य नहीं है. इंडियाबुल्‍स ने आगे कहा कि हमारी कंपनी भारत के सबसे बेहतर हाउसिंग कॉपरेटिव है. लिहाजा एनजीओ द्वारा दायर की गई इस याचिका पर नोटिस जारी नहीं किया जाना चाहिए. ये दुर्भावना से दाखिल की गई याचिका है.बता दें कि इंडियाबुल्स के वित्तीय घोटाले मामले को लेकर सुब्रमण्‍यम स्वामी लंबे समय से मुखर हैं.

इंडियाबुल्स ने कोर्ट को कहा कि अगर इस याचिका पर नोटिस जारी किया गया तो शेयर गिर जाएंगे. कंपनी ने कोर्ट को बताया कि जैसे ही एनजीओ ने इस याचिका को कोर्ट में डाला, सुनवाई से पहले ही याचिका की कॉपी को मीडिया में बांट दिया गया, जिससे हमारे शेयर 25 फीसदी तक नीचे गिर गए. इंडियाबुल्‍स की ओर से कही गई इन बातों पर हाईकोर्ट ने कहा कि हम आपकी समस्या को समझते हैं. हालांकि कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करके अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. अब इस मामले पर 13 दिसंबर को अगली सुनवाई होगी.

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Saloni

सलोनी भल्ला पत्रकारिता में पिछले चार साल से एक्टिव हैं। यहां से पहले अमर उजाला में कार्यरत थीं। "खबरी अड्डा" के बाद साथ-साथ लाइव टुडे में भी कार्यरत हैं। वॉयस ओवर आर्टिस्ट, कंटेंट राइटिंग, कंटेंट एडिटिंग और एंकरिंग में एक्सपीरियंस है। लेखन में पॉलीटिकल, क्राइम, एंटरटेनमेंट, ब्यूटी और हेल्थ के साथ-साथ गली मोहल्लों  की खबरों से लेकर सोशल मीडिया तक की चहल-पहल पर अपनी पैनी नजर रखती हैं।

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