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कुत्तों के लिए आई नौकरियां, 35 हजार पद पर भर्ती होंगे कुत्ते

देश की सुरक्षा को बढ़ाने, सुरक्षाबलों को आधुनिक बनाने के लिए आज के दौर में तीन चीजों की जरूरत हैं. ये तीनों चीजें भारतीय सुरक्षाबलों और पुलिस के पास हों तो इन्हें आतंक का सामना करने में कोई नहीं रोक सकता. नशीले पदार्थों की स्मलिंग बंद हो जाएगी. अपराध का खुलासा तेजी से होगा. साथ ही इससे सुरक्षाबलों की ताकत में इजाफा होगा. ये बातें कहीं विवेक भारद्वाज ने कहीं. विवेक भारद्वाज गृह विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी हैं और वे दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित तीन दिवसीय इंडिया इंटरनेशनल सिक्योरिटी एक्सपो-2019 में शामिल होने आए थे.

Dog Squad

सिक्योरिटी एक्सपो के पहले दिन विवेक भारद्वाज ने कहा कि देश की सुरक्षाबलों की अभी सबसे ज्यादा जिन तीन चीजों की जरूरत है, वे हैं – सुरक्षा और निगरानी सैटेलाइट, ड्रोन और कुत्ते. इन तीनों से भारतीय सुरक्षाबलों को ज्यादा ताकत मिलेगी. किसी भी कार्रवाई से पहले इनके जरिए रेकी की जा सकेगी. साथ ही हमारे जवानों की जान बचेगी. सैटेलाइट पर तो तेजी से काम हो रहा है. अभी सैटेलाइट्स के जरिए हमने आतंक के खिलाफ कई कड़े कदम उठाएं हैं. सीमा पार जाकर आतंकी ठिकानों पर हमले भी किए. ड्रोन से भी निगरानी की जाती है. इन दोनों के जरिए भारतीय सुरक्षाबल लगातार सीमाओं पर और सीमाओं के अंदर निगरानी करके अनहोनी रोक रहे हैं या एक्शन में मदद कर रहे हैं.

डॉग्स बढ़ाएंगे सुरक्षाबलों की ताकतः विवेक भारद्वाज

एडिशनल सेक्रेटरी विवेक भारद्वाज ने कहा कि देश के सुरक्षाबलों को सबसे ज्यादा जरूरत है डॉग्स की. ये उनके सबसे बेहतरीन दोस्त साबित होंगे. हमारे सुरक्षबलों के पास के-9 टीम है. जिसमें स्निफर डॉग्स होते हैं. इन डॉग्स की वजह से कई आतंकी हमले रोके गए. विस्फोटक बरामद किए गए. ड्रग्स की खेप पकड़ी गई. लेकिन आज भी देश में 35 हजार डॉग्स की कमी है. इनकी जल्द से जल्द भर्ती होनी चाहिए. अगर सुरक्षाबलों और पुलिस के पास इन डॉग्स की भर्ती की जाए तो ये सुरक्षाबलों की ताकत को बढ़ाएंगे. इसके साथ ही पुलिस विभाग के लिए अलग से सैटेलाइट होने चाहिए. ताकि वे किसी भी अपराधी को पकड़ने, साइबर अपराध को सुलझाने में आगे बढ़ सकें.

क्या सीखने लायक है प्लासी और पानीपत के युद्धों से?

विवेक भारद्वाज ने कहा कि दो युद्धों ने देश की सुरक्षा को लेकर उस समय के लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया था. प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दौला ब्रिटिश सेनाओं से हार गए. जबकि, उनके पास ज्यादा सैनिक थे. ब्रिटिश सेनाओं के पास 2000 सैनिक थे और कुछ तोप. जबकि, सिराजुद्दौला के पास करीब 50 हजार सैनिक थे और तोप. सिराजुद्दौला के तोप एक बार गोला दागने के बाद 15 मिनट का समय लेते थे नया गोला दागने में. लेकिन ब्रिटिश तोप हर मिनट 2 से 3 गोला दाग रहे थे. ऐसी हालत में सिराजुद्दौला हार गए. ऐसी ही कहानी पानीपत की लड़ाई की भी थी. कहने का मतलब ये है कि हमें ज्यादा आदमी नहीं, ज्यादा बेहतरीन टेक्नोलॉजी चाहिए. हमारी पुलिस फोर्स दुनिया की सबसे बड़ी पुलिस फोर्स है लेकिन सुविधाओं और आधुनिक हथियारों के मामले में बेहद पीछे.

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Saloni

सलोनी भल्ला पत्रकारिता में पिछले चार साल से एक्टिव हैं। यहां से पहले अमर उजाला में कार्यरत थीं। "खबरी अड्डा" के बाद साथ-साथ लाइव टुडे में भी कार्यरत हैं। वॉयस ओवर आर्टिस्ट, कंटेंट राइटिंग, कंटेंट एडिटिंग और एंकरिंग में एक्सपीरियंस है। लेखन में पॉलीटिकल, क्राइम, एंटरटेनमेंट, ब्यूटी और हेल्थ के साथ-साथ गली मोहल्लों  की खबरों से लेकर सोशल मीडिया तक की चहल-पहल पर अपनी पैनी नजर रखती हैं।

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