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जन्माष्टमी का ये खूबसूरत नजारा इस जगह के अलावा कहीं नहीं देखने को मिलता

हिंदू मान्यताओं के अनुसार लगभग 5000 साल पहले भगवान विष्णु के आंठवें अवतार ने धरती पर जन्म लिया था। जिसे कृष्णजन्माष्टमी के रूप में देशभर में मनाया जाता है। लोग इस दिन अपने घरों, मंदिरों को सजाते हैं और आधी रात को भगवान को जब भगवान का जन्म होता है तो मंदिरों में होने वाली रौनक देखने लायक होती है। कृष्णजन्माष्टमी का सबसे अलग नजारा मथुरा और वृंदावन का होता है।

 

वृंदावन में लगभग 4000 मंदिर हैं जिसमें बांके बिहारी मंदिर, रंगनाथजी मंदिर, इस्कॉन मंदिर, राधारमण मंदिर सबसे खास हैं। जहां जन्माष्टमी की रौनक दो तीन पहले से ही नजर आने लगती है। मंदिर फूलों से सजने लगते हैं और पूरा मथुरा मिठाईयों की खुशबू से महक उठता है।

यमुना नदी के किनारे बसा है मधुबन। ऐसा माना जाता है कि भगवान वहां रासलीला किया करते थे और आज भी करते हैं इसलिए यहां सूरज ढ़लने के बाद स्थानीय लोग नजर नहीं आते। इस जगह को देखने दूर देशों से पर्यटकों की भीड़ आती है।

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मथुरा में जन्माष्टमी की रौनक

यहां दो तरह से जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है।

झूलनोत्सव

लोग अपने घर के आंगन को फूलों और रंगोली से सजाते हैं और झूले को भी। झूले को सजाने का मकसद भगवान श्रीकृष्ण का स्वागत करना होता है।

घाटास

मथुरा आकर इस अनोखी सेलिब्रेशन का भी हिस्सा बन सकते हैं। यहां स्थित सारे मंदिरों को सजाया जाता है। पूरे महीने इसकी उत्सव की रौनक देखने को मिलती है जब तक जन्माष्टमी का त्योहार संपन्न नहीं हो जाता।

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Saloni

सलोनी भल्ला पत्रकारिता में पिछले चार साल से एक्टिव हैं। यहां से पहले अमर उजाला में कार्यरत थीं। "खबरी अड्डा" के बाद साथ-साथ लाइव टुडे में भी कार्यरत हैं। वॉयस ओवर आर्टिस्ट, कंटेंट राइटिंग, कंटेंट एडिटिंग और एंकरिंग में एक्सपीरियंस है। लेखन में पॉलीटिकल, क्राइम, एंटरटेनमेंट, ब्यूटी और हेल्थ के साथ-साथ गली मोहल्लों  की खबरों से लेकर सोशल मीडिया तक की चहल-पहल पर अपनी पैनी नजर रखती हैं।

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