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म्यांमार में सैनिकों और सशस्‍त्र नागरिकों के बीच फिर छिड़ी जंग, 100 से ज्‍यादा नागरिक भागकर पहुंचे मिजोरम

म्‍यांमार (Myanmar) में सेना और नागरिकों में बढ़ते संघर्ष के बीच 100 से ज्‍यादा नागरिक सीमा से सटे भारतीय राज्‍य मिजोरम (Mizoram) में आ गए हैं. इसपर मिजोरम के गृह मंत्री लाल चमलियाना ने कहा क‍ि फिलहाल सटीक आंकड़े तो नहीं है, लेकिन राज्‍य के दो जिलों में म्‍यांमार के नागरिक आए हैं.

हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्री ने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों में म्‍यांमार से सैकड़ों नागरिक भारतीय राज्‍य मिजोरम में घुसे हैं. लेकिन म्‍यांमार से मिजोरम आने वाले लोगों का सटीक आंकड़ा नहीं है, क्‍योंकि मैं इस समय क्‍वारंटाइन में हूं.’ बता दें क‍ि मिजोरम से सटे म्‍यांमार के क्षेत्रों में सेना और सशस्‍त्र नागरिकों के बीच फिर संघर्ष छिड़ गया है. हिंसा से बचकर कुछ नागरिक मिजोरम में आ गए हैं.

इस साल मार्च से ही म्‍यांमार में सेना और नागरिकों के बीच संघर्ष जारी है. जिसके कारण अब तक हजारों की संख्‍या में आम नागरिक मिजोरम में आ चुके हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, म्‍यांमार के लगभग 10 हजार लोग मिजोरम में रह रहे हैं.

म्यांमार में सैनिकों और रेजिस्टेंस फोर्स के बीच फिर छिड़ी जंग में 15 लोगों की मौत

बता दें कि म्यांमार में एक बार फिर सरकारी सैनिकों और रेजिस्टेंस फोर्स के बीच लड़ाई शुरू हो गई है. एक ग्रामीण और स्वतंत्र मीडिया रिपोर्ट्स में शुक्रवार को बताया गया है कि सरकारी सैनिकों और रेजिस्टेंस फोर्स के बीच जुलाई के बाद से सबसे भयंकर लड़ाई हुई है. इस लड़ाई में कई किशोरों सहित पंद्रह से 20 ग्रामीण मारे गए हैं. गुरुवार को उत्तर-पश्चिमी मैगवे टाउनशिप के पास लड़ाई शुरू हुई. इस लड़ाई से दो दिन पहले ‘राष्ट्रीय एकता सरकार’ द्वारा एक राष्ट्रव्यापी विद्रोह का आह्वान जारी किया गया. ‘राष्ट्रीय एकता सरकार’ सैन्य शासन के प्रतिरोध के साथ समन्वय करना चाहता है.

एक निवासी ने एसोसिएटेड प्रेस को फोन कर बताया, लड़ाई तब शुरू हुई, जब म्यिन थार और आसपास के पांच अन्य गांवों में क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए चार सैन्य वाहनों में 100 से अधिक सैनिक पहुंचे. गांव के मिलिशिया ने चेतावनी देते हुए गोलीबारी की. मगर सैनिक इसके बाद भी इलाके में घुस आए और फिर दोनों पक्षों के बीच झड़प की शुरुआत हुई. अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा का हवाला देते हुए नाम न छापने की शर्त पर एक निवासी ने इसकी जानकारी दी. फरवरी में म्यांमार की नेता आंग सान सू की की सरकार को हटाने के बाद सेना के खिलाफ विपक्षी आंदोलन की शुरुआत हुई थी.

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