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सोते समय नेट ऑफ कर दूर रखें मोबाइल, बच्‍चे ले रहे ऑनलाइन क्‍लास तो इसका भी रखें ध्‍यान

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 जेएनएन: डिजिटल युग में मोबाइल और लैपटॉप आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरत बन गया है। कोरोना काल में हुए लॉकडाउन के दौरान व उसके बाद लोगों की निर्भरता मोबाइल लैपटॉप व कंप्यूटर पर और भी अधिक बढ़ गई है। मगर इससे निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव आंखों के साथ-साथ शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा रही है।
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पीके दुबे ने आंखों की सेहत के ल‍िएकोरोना काल में हुए लॉकडाउन के दौरान व उसके बाद लोगों की निर्भरता मोबाइल लैपटॉप व कंप्यूटर पर और भी अधिक बढ़ गई है। मगर इससे निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव आंखों के साथ-साथ शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा रही है।
बहुत देर तक मोबाइल, लैपटॉप, डेस्कटॉप या टीवी स्क्रीन पर आंखें गड़ाए रहने से रोशनी प्रभावित हो सकती है। इससे आंखों का नंबर भी बढ़ सकता है। यह कहना है डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पीके दुबे का। दैनिक जागरण के हेलो डॉक्टर कार्यक्रम में पाठकों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने यह भी बताया कि सोते समय मोबाइल को सिर के आसपास नहीं रखना चाहिए। इसे डाटा ऑफ करके कहीं दूर रख देना चाहिए। क्योंकि इससे निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव शरीर की रासायनिक क्रियाओं को प्रभावित करती है। जिसकी वजह से कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं

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