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स्वतंत्रता दिवस : सोनिया गांधी ने मोदी सरकार को बताया लोकतंत्र विरोधी

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नई दिल्ली : कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर शनिवार को देशवासियों को शुभकामनाएं देने के साथ ही केंद्र सरकार पर निशाना साधा. सोनिया ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार प्रजातांत्रिक व्यवस्था, संवैधानिक मल्यों और स्थापित परंपराओं के विपरीत खड़ी है. उन्होंने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शहीद हुए 20 जवानों पर को याद करते हुए कहा कि भारतीय भूभाग की रक्षा करना और चीनी घुसपैठ को विफल करना ही इन शहीदों को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी.

सोनिया गांधी ने स्वतंत्रता दिवस पर जारी शुभकमाना संदेश में कहा, ‘सभी को 74वें स्वाधीनता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं. भारतवर्ष की ख्याति विश्वभर में न सिर्फ प्रजातांत्रिक मूल्यों और विभिन्न भाषा, धर्म, संप्रदाय के बहुलतावाद की वजह से है, बल्कि भारत प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना एकजुटता के साथ करने के लिए भी जाना जाता है.’

कांग्रेस की मुखिया के मुताबिक, ‘आज जब समूचा विश्व कोरोना महामारी की महाविभीषिका से जूझ रहा है, तब भारत को एकजुट होकर इस महामारी को परास्त करने के प्रतिमान स्थापित करने होंगे और मैं पूरे आत्मविश्वास से कह सकती हूं कि हम सब मिलकर इस महामारी व गंभीर आर्थिक संकट की दशा से बाहर आ जाएंगे.’

सोनिया गांधी ने कहा, ‘हमने आजादी के बाद अपने प्रजातांत्रिक मूल्यों को समय-समय पर परीक्षा की कसौटी पर परखा है और उसे निरंतर परिपक्व किया है.’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘आज ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार प्रजातांत्रिक व्यवस्था, संवैधानिक मूल्यों और स्थापित परंपराओं के विपरीत खड़ी है. भारतीय लोकतंत्र के लिए भी यह परीक्षा की घड़ी है.’

सोनिया ने पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना के साथ संघर्ष में शहीद हुए जवानों को याद करते हुए कहा, ‘आज कर्नल संतोष बाबू समेत हमारे 20 जवानों की गलवान घाटी में वीरगति को भी साठ दिन बीत चुके हैं. मैं उनको भी याद कर उनकी वीरता को नमन करती हूं व सरकार से आग्रह करती हूं कि उनकी वीरता का स्मरण करे व उचित सम्मान दे.’

उन्होंने कहा, ‘भारत मां की सरजमीं की रक्षा व चीनी घुसपैठ को विफल करना इन शहीदों को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी.’ सोनिया ने इस बात पर जोर दिया, ‘आज हर देशवासी को अंतरात्मा में झांक कर यह सोचने की आवश्यकता है कि आजादी के क्या मायने हैं? क्या आज देश में लिखने, बोलने, सवाल पूछने, असहमत होने, विचार रखने और जवाबदेही मांगने की आजादी है?’ उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार विपक्ष होने के नाते यह हमारा उत्तरदायित्व है कि हम भारत की प्रजातांत्रिक स्वाधीनता को अक्षुण्ण बनाए रखने का हरसंभव प्रयत्न व संघर्ष करें.

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